पितृ-दोष — कुण्डली का आध्यात्मिक-कर्म-दोष। पूर्वजों की अधूरी-इच्छा या उपेक्षा से वंशजों के जीवन में बाधा।
मुख्य-संकेत: सूर्य-राहु/केतु-युति, 9वें भाव में सूर्य पीड़ित, बार-बार सन्तान-हानि, विवाह-विलम्ब।
✦ पितृ-दोष के लक्षण
सन्तान-अभाव या बार-बार गर्भपात।
विवाह-विलम्ब (32+ स्त्री, 35+ पुरुष)।
कठिन-परिश्रम के बावजूद सफलता-नहीं।
बार-बार बीमारी, विशेषतः मानसिक।
सम्पत्ति-विवाद, परिवार-कलह।
मृत-सम्बन्धियों के बार-बार सपने।
✦ 8 शास्त्रीय-उपाय
1. **पितृ-तर्पण** अमावस्या पर।
2. **श्राद्ध** मृत्यु-तिथि पर।
3. **त्रिपिण्डी-श्राद्ध** त्र्यम्बकेश्वर/गया/पुष्कर।
4. **दैनिक-दीपक** दक्षिण-कोने में।
5. **कौओं को भोजन** पितृ-पक्ष में।
6. **गाय-कुत्ता-ब्राह्मण** साप्ताहिक-भोज।
7. **पीपल-वृक्ष-स्थापना** + दैनिक-जल।
8. **विष्णु-सहस्रनाम** एकादशी पर।
✦ विशेष-गुरु-नियम
कुलदेवता का पता लगायें।
वार्षिक-कुलदेवता-दर्शन।
पितृ-पक्ष (सितम्बर-अक्टूबर) में दैनिक-तर्पण।
सर्व-पितृ-अमावस्या (पितृ-पक्ष का अन्तिम-दिन) पर सर्व-शान्ति-श्राद्ध।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पितृ-दोष कितने-समय में हटता?▼
सतत-अभ्यास से 1-3 वर्ष में महत्वपूर्ण-राहत। एक-बार त्रिपिण्डी-श्राद्ध सर्व-शक्तिशाली।
बिना ज्योतिषी कैसे जानें?▼
मुफ्त-कुण्डली-वेबसाइट सूर्य-राहु/केतु-युति बतायें। बार-बार पारिवारिक-दुर्भाग्य भी संकेत।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।