पितृ दोष

पूर्वजों की उपेक्षा से वंशजों के जीवन में बाधा

मुख्य-संकेत

सूर्य-राहु

उपाय

8

प्रमुख-स्थल

त्र्यम्बकेश्वर

पितृ-दोष — कुण्डली का आध्यात्मिक-कर्म-दोष। पूर्वजों की अधूरी-इच्छा या उपेक्षा से वंशजों के जीवन में बाधा।

मुख्य-संकेत: सूर्य-राहु/केतु-युति, 9वें भाव में सूर्य पीड़ित, बार-बार सन्तान-हानि, विवाह-विलम्ब।

पितृ-दोष के लक्षण

सन्तान-अभाव या बार-बार गर्भपात।

विवाह-विलम्ब (32+ स्त्री, 35+ पुरुष)।

कठिन-परिश्रम के बावजूद सफलता-नहीं।

बार-बार बीमारी, विशेषतः मानसिक।

सम्पत्ति-विवाद, परिवार-कलह।

मृत-सम्बन्धियों के बार-बार सपने।

8 शास्त्रीय-उपाय

1. **पितृ-तर्पण** अमावस्या पर।

2. **श्राद्ध** मृत्यु-तिथि पर।

3. **त्रिपिण्डी-श्राद्ध** त्र्यम्बकेश्वर/गया/पुष्कर।

4. **दैनिक-दीपक** दक्षिण-कोने में।

5. **कौओं को भोजन** पितृ-पक्ष में।

6. **गाय-कुत्ता-ब्राह्मण** साप्ताहिक-भोज।

7. **पीपल-वृक्ष-स्थापना** + दैनिक-जल।

8. **विष्णु-सहस्रनाम** एकादशी पर।

विशेष-गुरु-नियम

कुलदेवता का पता लगायें।

वार्षिक-कुलदेवता-दर्शन।

पितृ-पक्ष (सितम्बर-अक्टूबर) में दैनिक-तर्पण।

सर्व-पितृ-अमावस्या (पितृ-पक्ष का अन्तिम-दिन) पर सर्व-शान्ति-श्राद्ध।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पितृ-दोष कितने-समय में हटता?

सतत-अभ्यास से 1-3 वर्ष में महत्वपूर्ण-राहत। एक-बार त्रिपिण्डी-श्राद्ध सर्व-शक्तिशाली।

बिना ज्योतिषी कैसे जानें?

मुफ्त-कुण्डली-वेबसाइट सूर्य-राहु/केतु-युति बतायें। बार-बार पारिवारिक-दुर्भाग्य भी संकेत।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।