ग्रीष्म अयनान्त (दक्षिणायन आरम्भ)

ग्रीष्म अयनान्त (दक्षिणायन आरम्भ)

सूर्य का उत्तरतम बिन्दु — दक्षिणायन का प्रारम्भ

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ग्रीष्म अयनान्त (दक्षिणायन आरम्भ) क्या है?

ग्रीष्म अयनान्त (Summer Solstice) = वर्ष का वह दिन जब सूर्य आकाश में अपने उत्तरतम स्थान पर पहुँचता है। उत्तरी गोलार्ध में दिन सबसे लम्बा एवं रात्रि सबसे छोटी। तिथि लगभग प्रत्येक वर्ष २१ जून (कभी-कभी २०/२२ जून)।

वैदिक परम्परा में इसी दिन से सूर्य "दक्षिण" की ओर (दक्षिण गोलार्ध की ओर) यात्रा प्रारम्भ करता है — अर्थात् "दक्षिणायन" का आरम्भ। अगले छह महीनों तक सूर्य दक्षिण की ओर बढ़ता है। यह काल "पितृ-काल" अथवा "देवों की रात्रि" कहलाता है।

दक्षिणायन में पितृ-कार्य प्रधान होते हैं — श्राद्ध, तर्पण, पुण्य-कार्य। शास्त्रों के अनुसार दक्षिणायन में देह-त्याग करने वाले पितृ-लोक प्राप्त करते हैं। उत्तरायण की तुलना में यह काल आध्यात्मिक रूप से कम शुभ माना गया, परन्तु पितृ-तर्पण के लिए सर्वोत्तम।

खगोलीय रूप से इसी दिन सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करता है (पाश्चात्य) अथवा कर्क संक्रान्ति (वैदिक) — परन्तु सायन (पाश्चात्य) एवं निरयन (वैदिक) में अयनांश-अन्तर के कारण लगभग ३ सप्ताह का अन्तर।

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अवधारणा एवं नियम

खगोलीय आधार: पृथ्वी की धुरी सूर्य-कक्षा से २३.५° झुकी है। २१ जून के निकट उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर सर्वाधिक झुकता है — सूर्य आकाश में अपने उच्चतम बिन्दु पर। दिन की लम्बाई दिल्ली में लगभग १३.५ घंटे, अंदमान में १२.५ घंटे, लेह में १४.५ घंटे। उत्तर ध्रुव पर तो सूर्यास्त होता ही नहीं — २४ घंटे प्रकाश। दक्षिणायन का आरम्भ दिन सबसे लम्बे होने का दिन — विरोधाभास! लेकिन सूर्य की गति-दिशा अब दक्षिण है।

करने योग्य कार्य

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पितृ-तर्पण एवं श्राद्ध
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दान — अन्न, वस्त्र, छाता
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सूर्य अर्घ्य — विशेष शक्तिशाली
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योग एवं ध्यान — Yoga Day भी इसी दिन
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व्रत एवं उपवास
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जल-दान एवं छाया-दान