शरद सम्पात (तुला संक्रान्ति)

शरद सम्पात (तुला संक्रान्ति)

सूर्य का भूमध्य रेखा को पार — दिन-रात्रि पुनः बराबर

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शरद सम्पात (तुला संक्रान्ति) क्या है?

शरद सम्पात (Autumnal Equinox) = वर्ष का वह दिन जब सूर्य भूमध्य रेखा को उत्तर से दक्षिण पार करता है। दिन एवं रात्रि की लम्बाई पुनः बराबर — १२ घंटे प्रत्येक। तिथि लगभग प्रत्येक वर्ष २२ अथवा २३ सितम्बर।

खगोलीय रूप से इसी दिन सायन (पाश्चात्य) सूर्य तुला राशि में प्रवेश करता है। उत्तरी गोलार्ध में शरद ऋतु का खगोलीय आरम्भ — दिन छोटे एवं रात्रि लम्बी होने लगती हैं। दक्षिणी गोलार्ध में वसन्त का प्रारम्भ।

भारतीय वैदिक परम्परा में निरयन तुला संक्रान्ति लगभग १७ अक्टूबर पर आती है — अयनांश-अन्तर के कारण। यह "तुला मास" का प्रारम्भ। शरद नवरात्रि एवं दशहरा इसी काल में मनाये जाते हैं — शक्ति-पूजन के लिए।

शरद सम्पात "देव-काल" का अन्त एवं "पितृ-काल" का प्रारम्भ — कुछ परम्पराओं अनुसार। यह सन्तुलन का दूसरा बिन्दु — वसन्त एवं शरद दोनों दिन-रात्रि-समानता के दिन। प्रकृति में शान्ति, अधिक-न्यून का संतुलन।

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अवधारणा एवं नियम

खगोलीय आधार: २३ सितम्बर के निकट पृथ्वी की धुरी का सूर्य के सापेक्ष कोई गोलार्धीय झुकाव नहीं। सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा पर लम्बवत्। उत्तरी गोलार्ध से सूर्य की दिशा अब दक्षिण की ओर — दिन छोटे होने प्रारम्भ। उत्तर ध्रुव पर अब ६ माह की रात्रि का प्रारम्भ। सूर्य-दर्शन की अवधि क्रमशः घटने लगती है।

करने योग्य कार्य

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पितृ-तर्पण — महालया श्राद्ध काल आरम्भ
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शरद नवरात्रि की तैयारी
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दान — गरम वस्त्र, अन्न
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सूर्य अर्घ्य एवं गायत्री जप
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योग एवं ध्यान — शान्त ऋतु में सर्वोत्तम
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गृह-शुद्धि एवं ऋतु-परिवर्तन तैयारी