मकर-संक्रान्ति — सूर्य का धनु-राशि से मकर-राशि में प्रवेश। उत्तरायण का प्रारम्भ। 2026 में मकर-संक्रान्ति 14 जनवरी (बुधवार)। यह सौर-त्यौहार है — चन्द्र-तिथि-वार नहीं — इसलिए हर-वर्ष लगभग एक-ही-तिथि।
क्षेत्रीय-नाम: उत्तरायण (गुजरात-राजस्थान), लोहड़ी (पंजाब, 13 जनवरी), पोंगल (तमिलनाडु, 4 दिन), उत्तरायण (आन्ध्र), मकर विलक्कु (केरल), माघी (हिमाचल), बिहु (असम)। 12+ राज्यों में अलग-अलग नामों से।
✦ मकर-संक्रान्ति 2026 — समय एवं विशेष
सूर्य का मकर-प्रवेश: 14 जनवरी 2026 (बुध) सुबह 8:53 AM (दिल्ली)।
पुण्य-काल: 14 जनवरी प्रातः 8:53 AM से सायं 5:30 PM तक। महा-पुण्य-काल: 8:53-12:30 PM (पहले 4 घंटे)।
गंगा-स्नान-समय: सूर्योदय से पुण्य-काल समाप्ति तक। हरिद्वार, प्रयागराज, गंगासागर में करोड़ों स्नान।
दान-समय: सूर्योदय से पूरा दिन। तिल-गुड़, खिचड़ी, गर्म-कपड़े, कम्बल विशेष।
✦ खगोलीय एवं धार्मिक महत्त्व
खगोलीय: मकर-संक्रान्ति वास्तव में सौर-कैलेंडर का "नया-दिन" — सूर्य की दक्षिणायन-यात्रा पूर्ण होकर उत्तरायण-शुरू। दिन लंबे होने लगते।
धार्मिक: उत्तरायण = "देवताओं का दिन"। दक्षिणायन = "देवताओं की रात्रि"। उत्तरायण में मरने वाले को मोक्ष — भीष्म ने इसी का इन्तजार किया था।
पौराणिक: सूर्य अपने पुत्र शनि (मकर-राशि-स्वामी) से मिलने जाते। पिता-पुत्र मेल का त्यौहार।
सांस्कृतिक: फसल-कटाई के बाद का त्यौहार। अन्न-धान्य से समृद्धि। तिल-गुड़ का सेवन — शीत-ऋतु-गर्मी।
✦ क्षेत्रीय-त्यौहार-तालिका
पंजाब: लोहड़ी (13 जनवरी रात्रि — आग के चारों ओर नृत्य, मूँगफली-तिल-रेवड़ी)।
तमिलनाडु: पोंगल (14-17 जनवरी, 4 दिन — भोगी-पोंगल, सूर्य-पोंगल, मट्टू-पोंगल, कानुम-पोंगल)।
गुजरात-राजस्थान: उत्तरायण/मकर-संक्रान्ति (पतंग-उत्सव — विश्व-प्रसिद्ध अहमदाबाद-इन्टरनेशनल काइट-फेस्टिवल)।
महाराष्ट्र: तिल-गुड़ बाँटना — "तिळगूळ घ्या आणि गोड बोला" (तिल-गुड़ खाओ और मीठा बोलो)।
पश्चिम-बंगाल: पौष-संक्रान्ति, गंगासागर-मेला (1-2 करोड़ श्रद्धालु)।
आन्ध्र-प्रदेश-तेलंगाना: संक्रान्ति 4 दिन (भोगी, संक्रान्ति, कानुमु, मुक्कनुमा)।
असम: माघ-बिहु (फसल-कटाई-त्यौहार)।
✦ विधि एवं परम्पराएँ
प्रात: स्नान: गंगा/नदी/घर। पवित्र-स्नान + तिल-मिश्रित जल।
सूर्य-अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल + तिल + लाल-फूल। "ॐ घृणि सूर्याय नमः"।
दान: तिल, गुड़, खिचड़ी, चावल, गर्म-वस्त्र, कम्बल, गाय (श्रेष्ठ)। सूर्य-शनि-दोनों को दान।
भोजन: तिल-गुड़ का लड्डू, खिचड़ी (दाल-चावल), उड़द, घी।
पतंग-उड़ान: पारम्परिक — आकाश में पतंग = सूर्य-स्वागत।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर-संक्रान्ति की तिथि क्यों लगभग-स्थिर?▼
सौर-त्यौहार। चन्द्र-कैलेंडर पर नहीं। सूर्य का मकर-राशि-प्रवेश हर 365.25 दिन में। तिथि 0.25 दिन प्रति-वर्ष आगे — हर 4 साल में 1 दिन। 1900 में 13 जनवरी, 2025 में 14 जनवरी, 2100 में 15 जनवरी।
पतंग क्यों उड़ाते हैं?▼
सूर्य-स्वागत का प्रतीक। साथ ही: 1) धूप-सेवन (विटामिन-D)। 2) फसल-कटाई के बाद सामाजिक-गतिविधि। 3) ऊँचाई पर पतंग = आत्म-उन्नति का प्रतीक। गुजरात-राजस्थान में अति-लोकप्रिय।
क्या मकर-संक्रान्ति-दिन शुभ-कार्य कर सकते हैं?▼
हाँ — सबसे शुभ-दिनों में से एक। पुण्य-काल में दान, स्नान, पूजा, मन्त्र-जप सर्वश्रेष्ठ। विवाह आदि के लिए भी पंचांग देखकर। उत्तरायण-काल (14 जनवरी से 14 जुलाई) हर शुभ-कार्य के लिए श्रेष्ठ।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।