श्री नाथजी मन्दिर — राजस्थान के नाथद्वार में। श्रीकृष्ण की 7-वर्ष-बाल-स्वरूप (गोवर्धन-धारक)। पुष्टिमार्ग-वल्लभाचार्य-सम्प्रदाय का मुख्य-धाम।
मूर्ति मूल-गोवर्धन-पर्वत से। औरंगजेब के काल में मुग़ल-आक्रमण-बचाव हेतु लाई गयी।
✦ इतिहास
मूर्ति-स्वयंभू (गोवर्धन-पर्वत से प्रकट)।
वल्लभाचार्य ने प्रकटन।
मेवाड़-राज्य ने शरण।
1671 ई. नाथद्वार में स्थापित।
7 हवेलियाँ (अन्य पुष्टिमार्ग-स्वरूप)।
✦ 8 दैनिक-झाँकी (दर्शन)
1. **मंगला** (5:30 AM): प्रात:-दर्शन।
2. **श्रृंगार** (7:30 AM): वस्त्र-आभूषण।
3. **ग्वाल** (9:00 AM): गाय-चराने हेतु।
4. **राजभोग** (11:30 AM): राज-भोजन।
5. **उत्थापन** (3:30 PM): विश्राम-समाप्ति।
6. **भोग** (4:30 PM): अल्पाहार।
7. **सन्ध्या-आरती** (5:00 PM)।
8. **शयन** (8:00 PM): रात्रि-शयन।
✦ पुष्टिमार्ग-विशेषताएँ
सेवा भक्ति-मार्ग।
कृष्ण-सखा भाव।
भोग-सेवा 8 बार।
कीर्तन-धोलपद।
मन्दिर "हवेली" (घर-जैसे)।
पुजारी "मुखियाजी"।
✦ पहुँच
उदयपुर से 50 किमी (1 घण्टा)।
नज़दीकी रेलवे: मावली-जंक्शन।
हवाई: उदयपुर।
नाथद्वार-छोटा-शहर।
पुष्टिमार्गी धर्मशाला।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रीनाथजी और कृष्ण एक?▼
हाँ। श्रीनाथजी = गोवर्धन-धारक 7-वर्षीय कृष्ण। पुष्टिमार्ग का मुख्य-स्वरूप।
मन्दिर "हवेली" क्यों?▼
पुष्टिमार्ग में कृष्ण को सखा-स्वामी मानते। मन्दिर = कृष्ण का घर। दैनिक-दिनचर्या मानव-तुल्य।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।