श्री नाथजी नाथद्वार

राजस्थान में 7-वर्ष-बाल-कृष्ण का गोवर्धन-धारक-स्वरूप

दैनिक-दर्शन

8 झाँकी

उदयपुर से

50 किमी

सम्प्रदाय

पुष्टिमार्ग

श्री नाथजी मन्दिर — राजस्थान के नाथद्वार में। श्रीकृष्ण की 7-वर्ष-बाल-स्वरूप (गोवर्धन-धारक)। पुष्टिमार्ग-वल्लभाचार्य-सम्प्रदाय का मुख्य-धाम।

मूर्ति मूल-गोवर्धन-पर्वत से। औरंगजेब के काल में मुग़ल-आक्रमण-बचाव हेतु लाई गयी।

इतिहास

मूर्ति-स्वयंभू (गोवर्धन-पर्वत से प्रकट)।

वल्लभाचार्य ने प्रकटन।

मेवाड़-राज्य ने शरण।

1671 ई. नाथद्वार में स्थापित।

7 हवेलियाँ (अन्य पुष्टिमार्ग-स्वरूप)।

8 दैनिक-झाँकी (दर्शन)

1. **मंगला** (5:30 AM): प्रात:-दर्शन।

2. **श्रृंगार** (7:30 AM): वस्त्र-आभूषण।

3. **ग्वाल** (9:00 AM): गाय-चराने हेतु।

4. **राजभोग** (11:30 AM): राज-भोजन।

5. **उत्थापन** (3:30 PM): विश्राम-समाप्ति।

6. **भोग** (4:30 PM): अल्पाहार।

7. **सन्ध्या-आरती** (5:00 PM)।

8. **शयन** (8:00 PM): रात्रि-शयन।

पुष्टिमार्ग-विशेषताएँ

सेवा भक्ति-मार्ग।

कृष्ण-सखा भाव।

भोग-सेवा 8 बार।

कीर्तन-धोलपद।

मन्दिर "हवेली" (घर-जैसे)।

पुजारी "मुखियाजी"।

पहुँच

उदयपुर से 50 किमी (1 घण्टा)।

नज़दीकी रेलवे: मावली-जंक्शन।

हवाई: उदयपुर।

नाथद्वार-छोटा-शहर।

पुष्टिमार्गी धर्मशाला।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीनाथजी और कृष्ण एक?

हाँ। श्रीनाथजी = गोवर्धन-धारक 7-वर्षीय कृष्ण। पुष्टिमार्ग का मुख्य-स्वरूप।

मन्दिर "हवेली" क्यों?

पुष्टिमार्ग में कृष्ण को सखा-स्वामी मानते। मन्दिर = कृष्ण का घर। दैनिक-दिनचर्या मानव-तुल्य।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।