सप्त-धातु — आयुर्वेद के अनुसार शरीर के 7 मूल-ऊतक। प्रत्येक से अगला-धातु बनता। पोषण-क्रम।
क्रम: रस → रक्त → मांस → मेद → अस्थि → मज्जा → शुक्र। प्रत्येक-धातु के असन्तुलन से विशेष-रोग।
✦ 7 धातु
1. **रस** (Plasma): भोजन-पाचन का प्रथम-उत्पाद। पोषण-वहन।
2. **रक्त** (Blood): रस से। ऑक्सीजन-वहन।
3. **मांस** (Muscle): रक्त से। शरीर-संरचना।
4. **मेद** (Fat): मांस से। ऊर्जा-संग्रह।
5. **अस्थि** (Bone): मेद से। संरचना-समर्थन।
6. **मज्जा** (Marrow/Nerves): अस्थि से। तन्त्रिका-तेल।
7. **शुक्र** (Reproductive Tissue): मज्जा से। प्रजनन।
✦ पोषण-समय
भोजन से रस तक: 5 दिन।
रस → रक्त: 5 दिन।
क्रमशः प्रत्येक-धातु: 5 दिन।
कुल भोजन से शुक्र तक: 35 दिन।
अतः: स्वास्थ्य-परिवर्तन में 35 दिन लगते।
✦ धातु-असन्तुलन-रोग
**रस-दोष**: थकान, त्वचा-रूखी।
**रक्त-दोष**: एनीमिया, सूजन।
**मांस-दोष**: कमजोरी, मांसपेशी-दर्द।
**मेद-दोष**: मोटापा, आलस्य।
**अस्थि-दोष**: जोड़ों के दर्द, गठिया।
**मज्जा-दोष**: तन्त्रिका-समस्या।
**शुक्र-दोष**: नपुंसकता, बांझपन।
✦ धातु-वर्धक-आहार
रस: ताज़े-फल, छाछ।
रक्त: चुकन्दर, अनार, हरी-सब्जी।
मांस: दाल, दूध।
मेद: घी, मेवे।
अस्थि: तिल, दूध, खजूर।
मज्जा: बादाम, अखरोट, घी।
शुक्र: शतावरी, अश्वगन्धा, बादाम।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सब 7 धातु एक-साथ कैसे ठीक?▼
त्रिदोष-संतुलन से सब-धातु ठीक। पंचकर्म-शुद्धिकरण। सात्विक-आहार। नियमित-दिनचर्या।
शुक्र-धातु क्यों श्रेष्ठ?▼
सब-धातुओं का सार। बल, ओज, तेज देता। ब्रह्मचर्य से रक्षित।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।