रामेश्वरम् ज्योतिर्लिङ्ग

पम्बन-द्वीप पर 11वाँ ज्योतिर्लिङ्ग — दक्षिण-धाम

क्रम

11/12

तीर्थ-कुण्ड

22

गलियारा

1219 मी

रामेश्वरम् ज्योतिर्लिङ्ग — तमिलनाडु के पम्बन-द्वीप पर। 12-ज्योतिर्लिङ्ग में 11वाँ। बड़ा-चार-धाम का दक्षिण-धाम।

भगवान राम ने रावण-वध-पाप-निवारण हेतु शिव-पूजा यहाँ की। मुख्य-लिङ्ग रामलिङ्ग। हनुमान-द्वारा कैलाश से लाया।

अद्वितीय-विशेषताएँ

विश्व का सबसे लम्बा मन्दिर-गलियारा (1219 मी)।

22 तीर्थ-कुण्ड मन्दिर-परिसर में।

प्रत्येक-कुण्ड का अलग-गुण/स्वाद।

**अग्नि-तीर्थ**: समुद्र-तट पर। पाप-नाश।

गन्धमादन-पर्वत: राम के चरण-चिह्न।

पौराणिक-कथा

राम ने रावण-वध-पाप-शुद्धि हेतु शिव-पूजा का संकल्प।

हनुमान कैलाश से लिङ्ग लाने भेजे।

मुहूर्त चूकने का खतरा।

सीता ने बालू का लिङ्ग बनाया (रामलिङ्ग)।

हनुमान आये — विश्वलिङ्ग। पहले विश्वलिङ्ग-पूजा-राम-वचन।

दोनों स्थापित।

दर्शन और स्नान

सुबह 5:00 — दोपहर 1:00, सायं 3:00 — रात्रि 9:00।

22 तीर्थ-स्नान: ₹50 टिकट। पुजारी जल-स्नान कराता।

मुख्य-लिङ्ग: काँच-कक्ष। पास-दर्शन।

स्फटिक-दर्शन: सुबह 5:00 AM।

सोमवार-शिवरात्रि भीड़।

पहुँच

नज़दीकी रेलवे: रामेश्वरम्।

चेन्नई से 600 किमी।

मदुरै से 175 किमी।

हवाई: मदुरै।

पम्बन-पुल पर रेल/सड़क।

धनुष्कोडि-दर्शन (रामसेतु अन्तिम-छोर)।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

22 तीर्थ-स्नान क्यों?

प्रत्येक-कुण्ड का अलग-पाप-नाश-गुण। 22-स्नान = सर्व-पाप-शुद्धि। पुजारी क्रम-अनुसार जल डालते।

धनुष्कोडि-राम-सेतु?

द्वीप का अन्तिम-छोर। राम ने यहीं से लंका-सेतु बनाया। 1964 चक्रवात से वीरान।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।