अमावस्या तिथियाँ

अमावस्या तिथियाँ

वर्ष की समस्त अमावस्या तिथियाँ — पितृ-तर्पण एवं स्नान

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अमावस्या तिथियाँ क्या है?

अमावस्या कृष्ण पक्ष का अन्तिम तिथि है, जब चन्द्रमा सूर्य के समान देशान्तर पर होकर पूर्णतः अदृश्य हो जाता है। प्रत्येक चन्द्र मास में एक अमावस्या आती है — वर्ष में सामान्यतः १२ अमावस्या तिथियाँ होती हैं।

पितृ-तर्पण एवं श्राद्ध के लिए अमावस्या सर्वोत्तम तिथि मानी गई है। विशेष रूप से सोमवती अमावस्या (सोमवार के दिन), मौनी अमावस्या (माघ), हरियाली अमावस्या (श्रावण), भाद्रपद अमावस्या (कुशोत्पाटिनी), अश्विन (महालया अमावस्या / सर्वपितृ श्राद्ध), कार्तिक (दीवाली अमावस्या), मार्गशीर्ष (बकुला अमावस्या) — ये सभी विशेष महत्व की हैं।

अमावस्या पर किया गया तर्पण-दान सहस्र-गुना फल देता है। गंगा एवं अन्य पवित्र नदियों में स्नान विशेष पुण्यदायी। साधना, मन्त्र-जप एवं ध्यान के लिए भी यह तिथि उत्तम।

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अवधारणा एवं नियम

खगोलीय आधार: अमावस्या तब बनती है जब चन्द्र-सूर्य का कोणीय अन्तर शून्य (अथवा ३६०° का गुणक) होता है — दोनों एक ही सायन देशान्तर पर। तकनीकी रूप से तिथि क्रम संख्या ३० है। चन्द्रमा सूर्य की पीछे चला जाता है, इसलिए दृश्य आकाश में नहीं दिखता। हमारी सूची में सूर्योदय पर सक्रिय अमावस्या तिथि को उस दिन की अमावस्या मानते हैं — पारम्परिक मानक।

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आगामी अमावस्या तिथियाँ

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16 मई 2026 · शनि

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15 जून 2026 · सोम

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14 जुलाई 2026 · मंगल

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12 अगस्त 2026 · बुध

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11 सितम्बर 2026 · शुक्र

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10 अक्टूबर 2026 · शनि

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9 नवम्बर 2026 · सोम

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8 दिसम्बर 2026 · मंगल

* दिल्ली पंचांग सन्दर्भ। स्थान बदलने पर तिथियाँ ±1 दिन भिन्न हो सकती हैं।

करने योग्य कार्य

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पितृ-तर्पण एवं श्राद्ध
💧
गंगा-स्नान एवं पवित्र नदी स्नान
💝
दान — अन्न, तिल, वस्त्र
🌳
पीपल-वृक्ष पूजा
🪔
मन्त्र साधना (विशेषतः शनि)
🌑
व्रत — विशेषकर सोमवती में

वर्जित कार्य

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विवाह एवं सगाई
🏡
गृह प्रवेश एवं भूमि पूजन
💼
व्यापार-संस्था का उद्घाटन
🧭
यात्रा — दीर्घ-दूर की