नरसिंह अवतार

नर+सिंह — विष्णु का सबसे-उग्र अवतार

क्रम

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जयन्ती 2026

1 मई

बीज-मन्त्र

क्षौं

नरसिंह-अवतार — विष्णु का चौथा अवतार। नर (मनुष्य) + सिंह (शेर) — आधा-मनुष्य आधा-शेर। हिरण्यकशिपु-वध हेतु प्रकट।

भक्त-प्रह्लाद की रक्षा-कथा। सर्व-अवतारों में सबसे-उग्र। भय-नाश के लिए पूजित।

पौराणिक-कथा

हिरण्यकशिपु-असुर। ब्रह्मा से वरदान:

न मनुष्य न पशु से मारा-जाये।

न दिन न रात।

न घर के अन्दर न बाहर।

न पृथ्वी न आकाश।

न शस्त्र न अस्त्र।

पुत्र प्रह्लाद विष्णु-भक्त।

हिरण्यकशिपु ने पूछा: तेरा भगवान कहाँ? प्रह्लाद: सर्वत्र।

खम्भे को तोड़ा। नरसिंह प्रकट।

गोधूलि-बेला (न दिन न रात)।

द्वार-दहलीज पर बैठा (न अन्दर न बाहर)।

गोद में रखा (न पृथ्वी न आकाश)।

नाखूनों से चीरा (न शस्त्र न अस्त्र)।

नर-सिंह (न मनुष्य न पशु)।

पूजा-विधि

नरसिंह-जयन्ती: वैशाख शुक्ल चतुर्दशी।

2026 तिथि: 1 मई।

सायं-समय (गोधूलि) पूजा।

लाल-वस्त्र-पुष्प।

खीर-पंजीरी-नैवेद्य।

नरसिंह-कवच-पाठ।

उग्र-नरसिंह = क्रोधित। शान्त-नरसिंह = बैठे।

मन्त्र

मूल: "ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्"।

बीज: "क्षौं" (नरसिंह-बीज)।

नरसिंह-कवच (सर्व-रक्षा)।

भक्तों की रक्षा-शक्ति।

विशेष-स्थल

अहोबिलम् (आन्ध्र-प्रदेश): 9-नरसिंह-मन्दिर।

सिंहाचलम् (विशाखापत्तनम)।

मन्गलगिरी (आन्ध्र)।

योगा-नरसिंह-मन्दिर (मेलकोटे, कर्नाटक)।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरसिंह क्यों उग्र-अवतार?

सब-अवतार धर्म-स्थापना के लिए। नरसिंह विशेष — असम्भव-शर्तों के बावजूद वध। भय-नाश का प्रतीक।

प्रह्लाद-कथा का सन्देश?

अटूट-भक्ति। पिता-राजा-असुर के विरुद्ध भी ईश्वर-भक्ति। श्रद्धा से असम्भव सम्भव।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।