नरसिंह-अवतार — विष्णु का चौथा अवतार। नर (मनुष्य) + सिंह (शेर) — आधा-मनुष्य आधा-शेर। हिरण्यकशिपु-वध हेतु प्रकट।
भक्त-प्रह्लाद की रक्षा-कथा। सर्व-अवतारों में सबसे-उग्र। भय-नाश के लिए पूजित।
✦ पौराणिक-कथा
हिरण्यकशिपु-असुर। ब्रह्मा से वरदान:
न मनुष्य न पशु से मारा-जाये।
न दिन न रात।
न घर के अन्दर न बाहर।
न पृथ्वी न आकाश।
न शस्त्र न अस्त्र।
पुत्र प्रह्लाद विष्णु-भक्त।
हिरण्यकशिपु ने पूछा: तेरा भगवान कहाँ? प्रह्लाद: सर्वत्र।
खम्भे को तोड़ा। नरसिंह प्रकट।
गोधूलि-बेला (न दिन न रात)।
द्वार-दहलीज पर बैठा (न अन्दर न बाहर)।
गोद में रखा (न पृथ्वी न आकाश)।
नाखूनों से चीरा (न शस्त्र न अस्त्र)।
नर-सिंह (न मनुष्य न पशु)।
✦ पूजा-विधि
नरसिंह-जयन्ती: वैशाख शुक्ल चतुर्दशी।
2026 तिथि: 1 मई।
सायं-समय (गोधूलि) पूजा।
लाल-वस्त्र-पुष्प।
खीर-पंजीरी-नैवेद्य।
नरसिंह-कवच-पाठ।
उग्र-नरसिंह = क्रोधित। शान्त-नरसिंह = बैठे।
✦ मन्त्र
मूल: "ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्"।
बीज: "क्षौं" (नरसिंह-बीज)।
नरसिंह-कवच (सर्व-रक्षा)।
भक्तों की रक्षा-शक्ति।
✦ विशेष-स्थल
अहोबिलम् (आन्ध्र-प्रदेश): 9-नरसिंह-मन्दिर।
सिंहाचलम् (विशाखापत्तनम)।
मन्गलगिरी (आन्ध्र)।
योगा-नरसिंह-मन्दिर (मेलकोटे, कर्नाटक)।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नरसिंह क्यों उग्र-अवतार?▼
सब-अवतार धर्म-स्थापना के लिए। नरसिंह विशेष — असम्भव-शर्तों के बावजूद वध। भय-नाश का प्रतीक।
प्रह्लाद-कथा का सन्देश?▼
अटूट-भक्ति। पिता-राजा-असुर के विरुद्ध भी ईश्वर-भक्ति। श्रद्धा से असम्भव सम्भव।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।