नैना-देवी-मन्दिर — हिमाचल-प्रदेश के बिलासपुर में। 51 शक्ति-पीठों में एक। माँ-सती की दोनों आँखें (नैन) गिरीं।
गोबिन्द-सागर-झील के पास 1100 मी ऊँचाई पर। चारों ओर मनोरम-दृश्य।
✦ पौराणिक-कथा
सती-दाह के बाद शिव का तांडव।
विष्णु ने 51 भाग किये।
सती की आँखें (नैन) यहाँ गिरीं।
बाद में नैना-नाम के गोला (चरवाहा) ने गाय का दूध रोज एक-शिला पर गिरते देखा। खुदाई की। मूर्ति मिली।
मन्दिर 8वीं सदी का।
✦ दर्शन
सुबह 6:00 — रात्रि 10:00।
दैनिक-आरती: 5:00 AM, 12:00 PM, 7:00 PM।
नवरात्रि: चैत्र (मार्च-अप्रैल), शारदीय (अक्टूबर) — अति-भीड़।
सर्व-दर्शन: निःशुल्क।
VIP/शीघ्र: ₹100।
उडन-खटोला (केबल-कार) उपलब्ध।
✦ पहुँच
आनन्दपुर साहिब (रेलवे): 30 किमी।
चण्डीगढ़: 100 किमी।
दिल्ली: 350 किमी।
सड़क-मार्ग सरल।
केबल-कार: ₹150 round-trip।
पैदल: 1.5 किमी।
✦ आसपास के दर्शनीय
गोबिन्द-सागर-झील।
भाखड़ा-नांगल-बाँध।
आनन्दपुर साहिब (सिख-तीर्थ)।
चिंतपूर्णी-देवी-मन्दिर (50 किमी)।
मनसा-देवी (200 किमी)।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नैना-देवी और चिंतपूर्णी एक-यात्रा में?▼
हाँ — 50 किमी दूर। 1-2 दिन में दोनों दर्शन। आसपास और शक्ति-पीठ भी।
मेला कब?▼
चैत्र-नवरात्रि और शारद-नवरात्रि (9 दिन)। श्रावण-अष्टमी विशेष।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।