ज्वालामुखी-मन्दिर — हिमाचल-प्रदेश के काँगड़ा जिले में। 51 शक्ति-पीठों में एक। माँ-सती की जिह्वा गिरी थी।
अद्वितीयता: कोई-मूर्ति नहीं — मन्दिर के अन्दर 9 प्राकृतिक-ज्वालाएँ निरन्तर जलतीं। प्राकृतिक गैस-स्रोत।
✦ 9 ज्वालाएँ
1. **महाकाली**: मुख्य-ज्वाला।
2. **अन्नपूर्णा**।
3. **चण्डी**।
4. **हिंगलाज**।
5. **विन्ध्यवासिनी**।
6. **महालक्ष्मी**।
7. **सरस्वती**।
8. **अम्बिका**।
9. **अंजी देवी**।
सब निरन्तर-जलतीं। बाहरी-तेल-गैस-नहीं।
✦ पौराणिक-कथा
सती-दाह के बाद शिव का तांडव।
विष्णु ने सुदर्शन-चक्र से शरीर 51 भागों में।
जिह्वा यहाँ गिरी।
अकबर ने जल से ज्वाला बुझाने की कोशिश — विफल। बाद में भक्त बना।
मन्दिर के मुकुट-रूप में सोने का छत्र अकबर का दान।
✦ दर्शन
सुबह 5:00 — रात्रि 10:00।
सर्व-दर्शन: निःशुल्क।
VIP-दर्शन: ₹100।
दैनिक-आरती: 5:00 AM, 12:00 PM, 7:00 PM, 10:00 PM।
नवरात्रि-विशेष: चैत्र और शारदीय।
भोग: मीठी रबड़ी।
✦ पहुँच
नज़दीकी रेलवे: काँगड़ा-मन्दिर (30 किमी)।
हवाई: धर्मशाला (50 किमी)।
दिल्ली से 480 किमी।
चण्डीगढ़ से 200 किमी।
सड़क-मार्ग साफ।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ज्वालाएँ कैसे जलती?▼
प्राकृतिक-गैस (मुख्यतः मीथेन) भूमि से। सदियों से। वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया।
किसे क्या मनोकामना?▼
महाकाली: सर्व-इच्छा। अन्नपूर्णा: धन-अन्न। चण्डी: शत्रु-नाश। महालक्ष्मी: समृद्धि।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।