ज्वालामुखी मन्दिर

हिमाचल में 9 प्राकृतिक-ज्वालाएँ — सती की जिह्वा

ज्वालाएँ

9

स्रोत

प्राकृतिक-गैस

शक्ति-पीठ

51 में एक

ज्वालामुखी-मन्दिर — हिमाचल-प्रदेश के काँगड़ा जिले में। 51 शक्ति-पीठों में एक। माँ-सती की जिह्वा गिरी थी।

अद्वितीयता: कोई-मूर्ति नहीं — मन्दिर के अन्दर 9 प्राकृतिक-ज्वालाएँ निरन्तर जलतीं। प्राकृतिक गैस-स्रोत।

9 ज्वालाएँ

1. **महाकाली**: मुख्य-ज्वाला।

2. **अन्नपूर्णा**।

3. **चण्डी**।

4. **हिंगलाज**।

5. **विन्ध्यवासिनी**।

6. **महालक्ष्मी**।

7. **सरस्वती**।

8. **अम्बिका**।

9. **अंजी देवी**।

सब निरन्तर-जलतीं। बाहरी-तेल-गैस-नहीं।

पौराणिक-कथा

सती-दाह के बाद शिव का तांडव।

विष्णु ने सुदर्शन-चक्र से शरीर 51 भागों में।

जिह्वा यहाँ गिरी।

अकबर ने जल से ज्वाला बुझाने की कोशिश — विफल। बाद में भक्त बना।

मन्दिर के मुकुट-रूप में सोने का छत्र अकबर का दान।

दर्शन

सुबह 5:00 — रात्रि 10:00।

सर्व-दर्शन: निःशुल्क।

VIP-दर्शन: ₹100।

दैनिक-आरती: 5:00 AM, 12:00 PM, 7:00 PM, 10:00 PM।

नवरात्रि-विशेष: चैत्र और शारदीय।

भोग: मीठी रबड़ी।

पहुँच

नज़दीकी रेलवे: काँगड़ा-मन्दिर (30 किमी)।

हवाई: धर्मशाला (50 किमी)।

दिल्ली से 480 किमी।

चण्डीगढ़ से 200 किमी।

सड़क-मार्ग साफ।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्वालाएँ कैसे जलती?

प्राकृतिक-गैस (मुख्यतः मीथेन) भूमि से। सदियों से। वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया।

किसे क्या मनोकामना?

महाकाली: सर्व-इच्छा। अन्नपूर्णा: धन-अन्न। चण्डी: शत्रु-नाश। महालक्ष्मी: समृद्धि।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।