श्री महालक्ष्मी पूजा विधि

श्री महालक्ष्मी पूजा विधि

धन-समृद्धि की देवी की षोडशोपचार पूजा — १६ चरण

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श्री महालक्ष्मी पूजा विधि परिचय

श्री महालक्ष्मी पूजा हिन्दू गृहस्थ-जीवन का परम-शुभ अनुष्ठान है। दीवाली रात्रि (अमावस्या), शुक्रवार, अक्षय तृतीया, धनतेरस — सभी पर लक्ष्मी पूजा का विधान। व्यापारी एवं उद्यमी विशेष रूप से इस पूजा में आस्था रखते हैं।

षोडशोपचार पूजा १६ उपचारों से सम्पन्न होती है। श्री सूक्त, लक्ष्मी अष्टकम्, महालक्ष्मी कवचम् का पाठ इस पूजा का अंग। पूजा के अन्त में विसर्जन नहीं किया जाता — मूर्ति/यन्त्र को धन-कोष में स्थापित रखें।

विशेष — दीवाली पर "लक्ष्मी-गणेश-कुबेर" तीनों की एक साथ पूजा होती है। तिजोरी, बही-खाते, चूड़ी, सोना — सभी की पूजा। नये कारोबारी अपना नया खाता "हाल-खाता" इस दिन खोलते हैं।

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शुभ मुहूर्त एवं तिथियाँ

दीवाली रात्रि (कार्तिक अमावस्या) — सर्वोत्तम। शुक्रवार सायं प्रदोष काल। अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया)। धनतेरस। शरद पूर्णिमा। महालक्ष्मी व्रत (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से १६ दिन)। प्रात:काल अथवा सायं प्रदोष काल।

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पूजा सामग्री

1

लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा / यन्त्र

2

लाल / गुलाबी रेशमी वस्त्र

3

कमल पुष्प (अनिवार्य)

२१

4

गुलाब के फूल

मिश्रित

5

चन्दन (श्वेत एवं केसर)

पेस्ट

6

अक्षत (हल्दी मिश्रित चावल)

१ कटोरी

7

रोली / कुंकुम

थोड़ा

8

खीर — विशेष नैवेद्य

१ कटोरी

9

बताशा एवं माखाना

मिश्रित

10

सुगन्धित अगरबत्ती / लोबान

समग्र

11

घी के दीपक — ११ अथवा १०८

११+

12

गंगाजल / शुद्ध जल

१ लोटा

13

शंख — समुद्र-मन्थन से लक्ष्मी प्रकट

14

पानी से भरा कलश + आम-पत्र + नारियल

15

स्वर्ण-रजत के सिक्के / आभूषण

समग्र

16

पंचामृत

१ कटोरी

16 चरण विधि

1
🙏

संकल्प

(Sankalpa)

दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प लेकर अपना नाम, गोत्र, तिथि, स्थान बोलते हुए संकल्प लें — महालक्ष्मी पूजा के उद्देश्य से।

ॐ श्री महालक्ष्मी प्रीत्यर्थम् पूजनं करिष्ये।

Om Shri Mahalakshmi Prityartham Pujanam Karishye

2
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कलश स्थापना

(Kalash-sthapana)

सर्वप्रथम गणेश को नमन करते हुए तांबे/पीतल का कलश स्थापित करें — पानी, अक्षत, सुपारी, सिक्का डालकर। आम के पत्ते एवं नारियल ऊपर। यह कलश समस्त देवी-देवताओं का प्रतीक।

ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः।

Om Kalashasya Mukhe Vishnuh Kanthe Rudrah Samashritah

3
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आवाहन

(Avahana)

महालक्ष्मी जी का आवाहन करें — मन से उन्हें मूर्ति में आने का निमन्त्रण दें।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः । आगच्छ देवी कमले महाश्री।

Om Shreem Mahalakshmyai Namah · Aagachchha Devi Kamale Mahashri

4
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पाद्य-अर्घ्य

(Padya-Arghya)

पंचपात्र से जल लेकर देवी के चरणों पर अर्पित करें (पाद्य) एवं हस्त-शुद्धि हेतु जल (अर्घ्य) दें।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै पादयोः पाद्यं समर्पयामि।

Om Shreem Mahalakshmyai Padayoh Padyam Samarpayami

5
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पंचामृत स्नान

(Snan)

पंचामृत — दूध, दही, घी, मधु, शक्कर — से क्रमशः स्नान। फिर शुद्ध जल से शुद्ध-स्नान।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै स्नानं समर्पयामि।

Om Shreem Mahalakshmyai Snanam Samarpayami

6
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वस्त्र एवं आभूषण

(Vastra-Aabhushan)

लाल/गुलाबी रेशमी वस्त्र अर्पण करें। स्वर्ण-रजत के सिक्के एवं आभूषण देवी को समर्पित।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै वस्त्र-आभूषणानि समर्पयामि।

Om Shreem Mahalakshmyai Vastra-Aabhushanani Samarpayami

7
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गन्ध (केसर-चन्दन)

(Gandha)

श्वेत चन्दन ललाट पर एवं केसर-चन्दन पूरे शरीर पर अर्पण करें। माथे पर तिलक।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै गन्धं समर्पयामि।

Om Shreem Mahalakshmyai Gandham Samarpayami

8
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पुष्प (कमल)

(Pushpa)

कमल पुष्प (२१) एवं गुलाब अर्पण करें। कमल लक्ष्मी का परम-प्रिय। श्वेत एवं गुलाबी कमल विशेष।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै पुष्पं समर्पयामि।

Om Shreem Mahalakshmyai Pushpam Samarpayami

9
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धूप

(Dhupa)

सुगन्धित अगरबत्ती / लोबान जलाकर देवी के सम्मुख घुमाएँ।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै धूपं समर्पयामि।

Om Shreem Mahalakshmyai Dhupam Samarpayami

10
🪔

दीप जलाएँ

(Deepa)

११ अथवा १०८ घी के दीप जलाएँ। दीवाली रात्रि पूरे घर में दीप जलाएँ। यह "लक्ष्मी का स्वागत-प्रकाश"।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै दीपं समर्पयामि।

Om Shreem Mahalakshmyai Deepam Samarpayami

11
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नैवेद्य (खीर)

(Naivedya)

खीर अर्पण करें — दूध-चावल-शक्कर। साथ में बताशा, माखाना, पंचमेवा। तुलसी-दल की एक पत्ती (विष्णु पत्नी होने से), केला।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नैवेद्यं समर्पयामि।

Om Shreem Mahalakshmyai Naivedyam Samarpayami

12
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ताम्बूल

(Tambula)

पान-सुपारी-लौंग-इलायची अर्पण करें।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै ताम्बूलं समर्पयामि।

Om Shreem Mahalakshmyai Tambulam Samarpayami

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मन्त्र जप एवं श्री सूक्त

(Mantra-japa)

मूल मन्त्र "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का १०८ बार जप। फिर "श्री सूक्त" (१६ ऋचाएँ) का पाठ। दीवाली पर "महालक्ष्मी अष्टकम्" भी।

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै कमलवासिन्यै स्वाहा।

Om Hreem Shreem Kleem Mahalakshmyai Kamalavasinyai Svaha

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धन-कोष पूजन

(Dhana-puja)

तिजोरी, बही-खाते, सोना-चाँदी, शंख की भी पूजा करें। नये बही-खाते पर "श्री लाभ" लिखें।

ॐ कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्याधिपतये नमः।

Om Kuberaya Vaishravanaya Dhana-Dhanyadhipataye Namah

15
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आरती

(Aarti)

"ॐ जय लक्ष्मी माता" आरती गाएँ। दीप-थाली से ५ बार वामावर्त घुमाएँ।

16
🙏

क्षमा याचना

(Kshama-yachana)

पूजन की त्रुटियों के लिए क्षमा माँगें — "क्षमस्व" कहते हुए। अन्त में पूरे घर में दीप जलाएँ। दीवाली पर मूर्ति/यन्त्र को धन-स्थान पर ही रखें — विसर्जन नहीं।

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नैवेद्य — प्रिय भोग

महालक्ष्मी को परम-प्रिय भोग है खीर — दूध-चावल की मीठी खीर। बताशा, माखाना (कमल-गट्टा), पंचमेवा, बेसन के लड्डू, गुलाब-जामुन, श्रीफल (नारियल), केला, सेब। दीवाली पर "अनरसा", पीले मीठे चावल भी। तुलसी-दल केवल एक पत्ती (विष्णु पत्नी होने से वर्जित नहीं)। मांस-मद्य त्याज्य।

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आरती — समापन

"ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता"… यह आरती समस्त उत्तर भारत में सर्व-प्रचलित। दीवाली एवं शुक्रवार पर अनिवार्य। दक्षिण भारत में "महालक्ष्मी अष्टकम्" अधिक प्रचलित। आरती के बाद घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएँ — लक्ष्मी जी के पदचिह्न।

सावधानियाँ

पूजा के समय घर में स्वच्छता एवं प्रकाश आवश्यक
मूर्ति का मुख पूर्व अथवा उत्तर — कभी दक्षिण नहीं
पूजा के बाद घर में अन्धकार न रखें — अमावस्या पर भी नहीं
दीवाली पर रात्रि १२ बजे तक दीप जलाये रखें
टूटी मूर्ति / गिरा हुआ कलश — पूजा रोकें, पुनः शुरू
पूजा-स्थल को कभी झाड़ू न लगाएँ — पूजा का अपमान
मांस, मद्य, झगड़ा, अप्रसन्नता — सब त्याज्य