गुरुवायुर मन्दिर

केरल का 'दक्षिण-द्वारका' — श्रीकृष्ण-धाम

नित्य-पूजा

11

मण्डलम्

41 दिन

दिव्य-देशम्

108 में एक

गुरुवायुर-मन्दिर — केरल के थ्रिशूर के पास। श्रीकृष्ण-धाम। "दक्षिण-द्वारका"। 5000+ वर्ष पुराना।

मूर्ति: 4-भुज विष्णु, शंख-चक्र-गदा-पद्म-धारी। मूल-प्रतिमा द्वारका से लाई गयी (मान्यता)।

विशेषताएँ

गुरु (बृहस्पति) + वायु (पवन) ने प्रतिष्ठित किया → गुरुवायुर।

पाताल-अंजन शिला-निर्मित मूर्ति।

केवल हिन्दू-प्रवेश।

धोती (पुरुष), साड़ी (स्त्री)।

108 दिव्य-देशम् में एक।

कथकली-केन्द्र (पास)।

दर्शन-समय

सुबह 3:00 — दोपहर 1:00।

सायं 4:30 — रात्रि 9:15।

नित्य-पूजा 11 बार।

निर्माल्य-दर्शन: 3:00 AM (विशेष)।

उषापूजा: 7:00 AM।

सीवेली-शोभायात्रा: सायं।

विशेष-कार्यक्रम

एकादशी विशेष।

कृष्ण-जन्माष्टमी (मलयालम-कलेण्डर)।

मण्डलम् व्रत: 41 दिन।

गुरुवायुर-मण्डलम्: नवम्बर-दिसम्बर।

कृष्ण-गुरुवायुर-एकादशी।

दैनिक-तुलाभारम्: स्वयं को सोने/केले से तौलना।

पहुँच

नज़दीकी रेलवे: गुरुवायुर/त्रिचूर (30 किमी)।

हवाई: कोचि (90 किमी)।

तिरुवनन्तपुरम से 350 किमी।

धर्मशाला आसपास।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलाभारम् क्या?

भक्त अपना भार सोने/केले/घी से तौलता। तौल-वस्तु मन्दिर को दान। मनोकामना-पूर्ति।

मण्डलम्-व्रत?

41 दिन कठोर-संयम। माँसाहार-त्याग, ब्रह्मचर्य। काली-वस्त्र। नंगे-पाँव। शबरीमलाई-व्रत-तुल्य।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।