गरुड़ पुराण

मृत्यु-पश्चात-जीवन का प्रमुख-पुराण — 19000 श्लोक

श्लोक

19,000

खण्ड

2

विशेष

13-दिन-कर्म

गरुड़-पुराण — 18 महापुराणों में एक। मृत्यु-पश्चात-जीवन का प्रमुख-शास्त्र। विष्णु ने गरुड़ को सुनाया।

19,000 श्लोक। 2 खण्ड: पूर्व (विष्णु-कथा, धर्म) और उत्तर (मृत्यु-नर्क-स्वर्ग, श्राद्ध)।

मुख्य-विषय

यम-धर्म-दर्शन।

नर्क-स्वर्ग-वर्णन।

मृत्यु-पश्चात आत्मा-यात्रा।

13-दिन-कर्म।

गरुड़-पुराण-पाठ।

पुनर्जन्म-व्याख्या।

कर्म-फल-निर्धारण।

13-दिन-यात्रा (मरण-पश्चात)

1. आत्मा शरीर त्यागती।

2. पिण्ड-दान शुरू।

3-10. यमदूत आत्मा को ले जाते।

11. प्रेत-भोज।

12. सपिण्डीकरण।

13. पुनर्जन्म-निर्धारण।

हर-दिन के विशेष-कर्म।

मृत-घर में पाठ

मृत्यु-काल या पश्चात।

13 दिन प्रतिदिन।

परिवार सुनता।

मृत्यु-भय-नाश।

सद्-कर्म-प्रेरणा।

मोक्ष-मार्ग-दर्शन।

अकेले या पुरोहित-द्वारा।

गलत-धारणाएँ

भय-शास्त्र-नहीं — मार्ग-दर्शक।

केवल मृत्यु-पश्चात नहीं — जीवित में भी पढ़ें।

नर्क-वर्णन रूपक।

कर्म-शिक्षा सर्वोपरि।

सद्-कर्म से मोक्ष।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गरुड़-पुराण घर रख सकते?

हाँ — कोई-निषेध नहीं। पुराण है, अशुभ नहीं। पठन-योग्य। मृत्यु-पश्चात विशेष-पाठ।

13-दिन-कर्म आधुनिक-समय में?

पुरोहित-व्यवस्था कठिन। आदर्श-समय अनुसार करें। कुछ-कर्म 13वें-दिन सम्पन्न। आचार-अनुसार।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।