गरुड़-पुराण — 18 महापुराणों में एक। मृत्यु-पश्चात-जीवन का प्रमुख-शास्त्र। विष्णु ने गरुड़ को सुनाया।
19,000 श्लोक। 2 खण्ड: पूर्व (विष्णु-कथा, धर्म) और उत्तर (मृत्यु-नर्क-स्वर्ग, श्राद्ध)।
✦ मुख्य-विषय
यम-धर्म-दर्शन।
नर्क-स्वर्ग-वर्णन।
मृत्यु-पश्चात आत्मा-यात्रा।
13-दिन-कर्म।
गरुड़-पुराण-पाठ।
पुनर्जन्म-व्याख्या।
कर्म-फल-निर्धारण।
✦ 13-दिन-यात्रा (मरण-पश्चात)
1. आत्मा शरीर त्यागती।
2. पिण्ड-दान शुरू।
3-10. यमदूत आत्मा को ले जाते।
11. प्रेत-भोज।
12. सपिण्डीकरण।
13. पुनर्जन्म-निर्धारण।
हर-दिन के विशेष-कर्म।
✦ मृत-घर में पाठ
मृत्यु-काल या पश्चात।
13 दिन प्रतिदिन।
परिवार सुनता।
मृत्यु-भय-नाश।
सद्-कर्म-प्रेरणा।
मोक्ष-मार्ग-दर्शन।
अकेले या पुरोहित-द्वारा।
✦ गलत-धारणाएँ
भय-शास्त्र-नहीं — मार्ग-दर्शक।
केवल मृत्यु-पश्चात नहीं — जीवित में भी पढ़ें।
नर्क-वर्णन रूपक।
कर्म-शिक्षा सर्वोपरि।
सद्-कर्म से मोक्ष।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गरुड़-पुराण घर रख सकते?▼
हाँ — कोई-निषेध नहीं। पुराण है, अशुभ नहीं। पठन-योग्य। मृत्यु-पश्चात विशेष-पाठ।
13-दिन-कर्म आधुनिक-समय में?▼
पुरोहित-व्यवस्था कठिन। आदर्श-समय अनुसार करें। कुछ-कर्म 13वें-दिन सम्पन्न। आचार-अनुसार।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।