भागवत-सप्ताह — श्रीमद्-भागवत-पुराण का 7-दिन का अखण्ड-पाठ। 18,000 श्लोकों का सम्पूर्ण-वर्णन। मोक्ष-दायक।
12 स्कन्ध: सृष्टि, अवतार, कृष्ण-लीला, गोवर्धन, रास, उद्धव-गीता, शुक-परीक्षित-संवाद।
✦ 7-दिन-वितरण
**दिन 1**: स्कन्ध 1-2 (सृष्टि, ब्रह्मा-नारद)।
**दिन 2**: स्कन्ध 3-4 (वराह, ध्रुव)।
**दिन 3**: स्कन्ध 5-6 (नर्क-स्वर्ग, अजामिल)।
**दिन 4**: स्कन्ध 7-8 (प्रह्लाद, गजेन्द्र, समुद्र-मन्थन)।
**दिन 5**: स्कन्ध 9-10 (कृष्ण-जन्म, बाल-लीला)।
**दिन 6**: स्कन्ध 10 शेष (रास-लीला, कंस-वध)।
**दिन 7**: स्कन्ध 11-12 (उद्धव-गीता, परीक्षित-मोक्ष)।
✦ आयोजन-विधि
प्रामाणिक-कथावाचक (पण्डित)।
साफ-स्वच्छ-स्थान।
मण्डप-निर्माण: फूलों, केले-स्तम्भ।
कलश-स्थापना।
गणेश-पूजन प्रथम।
संकल्प।
दैनिक 4-6 घण्टे प्रवचन।
सायं-आरती।
भोग-वितरण।
7वें-दिन समापन-यज्ञ।
✦ फल और लाभ
सर्व-पाप-नाश।
पितृ-तृप्ति।
मनोकामना-पूर्ति।
परिवार-शान्ति।
मोक्ष-सम्भावना।
कथा-स्थल पवित्र।
परीक्षित-राजा को 7 दिन में मोक्ष मिला।
✦ खर्च और तैयारी
पण्डित-दक्षिणा: ₹50,000-2,00,000 (प्रतिष्ठा-अनुसार)।
मण्डप-सजावट: ₹25,000-1,00,000।
भोग-प्रसाद-वितरण: ₹50,000+।
कुल: ₹2-5 लाख घर-आयोजन।
सामूहिक-सस्ता।
परिवार-मित्र-सहयोग।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भागवत-सप्ताह क्यों 7 दिन?▼
राजा परीक्षित को 7 दिनों में मृत्यु-शाप था। शुकदेव ने 7 दिन भागवत सुनाई। मोक्ष मिला। तब से परम्परा।
घर पर सम्भव?▼
हाँ। न्यूनतम-मण्डप-परिवार-सहयोग। पण्डित-व्यवस्था। सायं-घण्टे ही पर्याप्त। 7 शनिवार/रविवार में भी कर सकते।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।