आज दिन का चौघड़िया

दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया लगभग 90 मिनट का। वर-स्वामी-अनुसार क्रम बदलता।

चौघड़िया — एक प्राचीन वैदिक समय-निर्धारण पद्धति जो दिन एवं रात्रि को सोलह भागों में विभाजित करती है। संस्कृत के "चतुर्घटिका" (चार घड़ी, अर्थात् लगभग 96 मिनट) से व्युत्पन्न, चौघड़िया मुहूर्त-शास्त्र की सबसे सरल एवं व्यावहारिक प्रणाली है। ग्रामीण भारत में यह सहस्राब्दियों से किसानों, व्यापारियों, यात्रियों के दैनिक निर्णयों का आधार रही है।

चौघड़िया का मूल सिद्धान्त है — दिन का प्रत्येक भाग किसी न किसी ग्रह से शासित है, और प्रत्येक ग्रह का अपना स्वभाव होता है — कोई शुभ, कोई अशुभ, कोई तटस्थ। यह जानकर कार्य का समय निर्धारण करने से सफलता की सम्भावना बढ़ती है। इस लेख में हम चौघड़िया के सिद्धान्त, सात प्रकारों, गणना पद्धति, एवं व्यावहारिक उपयोग का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

चौघड़िया का इतिहास एवं उत्पत्ति

चौघड़िया का उल्लेख प्राचीन भारतीय खगोलीय एवं ज्योतिषीय ग्रन्थों में मिलता है। मुहूर्त चिन्तामणि (16वीं शताब्दी) में चौघड़िया का विस्तृत विवेचन है। हालांकि इसकी मूल अवधारणा बहुत पुरानी है — संभवतः वैदिक काल से।

पारम्परिक रूप से चौघड़िया का उपयोग उन कार्यों के लिए होता था जिनके लिए विस्तृत पंचांग देखना सम्भव नहीं था। एक किसान जो खेत में बीज बोने जा रहा है, एक व्यापारी जो दुकान खोलने जा रहा है, एक यात्री जो नये गाँव जा रहा है — इन सबके लिए "चौघड़िया देखकर निकलना" एक स्थापित परिपाटी थी।

सात प्रकार के चौघड़िया

अमृत — चन्द्र शासित, सर्वश्रेष्ठ शुभ चौघड़िया। संस्कृत में "अमृत" का अर्थ है अमरता का रस — समुद्र मंथन से प्राप्त वही दिव्य पेय जो देवताओं को अमर बनाता है। इस चौघड़िया में आरम्भ किया गया कार्य अवश्य सफल होता है। विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा, पूजा, चिकित्सा — सभी के लिए सर्वोत्तम।

शुभ — गुरु (बृहस्पति) शासित, अत्यंत शुभ। बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं — ज्ञान, धर्म, एवं सदाचार के देवता। शुभ चौघड़िया में किए गए कार्य धर्म एवं नैतिकता के अनुसार सफल होते हैं। शिक्षा, धर्म-कर्म, गुरु-दीक्षा, विवाह, मुंडन — के लिए सर्वोत्तम।

लाभ — बुध शासित, धन-कार्यों हेतु शुभ। बुध बुद्धि एवं वाणिज्य के देवता हैं। लाभ चौघड़िया में आरम्भ किया गया व्यवसाय, निवेश, अथवा वित्तीय निर्णय अधिक लाभदायक होता है। नया व्यापार, दुकान खोलना, संपत्ति क्रय, सोना-चांदी क्रय, ऋण-वसूली — सभी के लिए उत्तम।

चर — शुक्र शासित, गतिशील। चर का अर्थ है "गतिमान" — यह चौघड़िया यात्रा एवं आवागमन के लिए विशेष शुभ। यद्यपि यह "तटस्थ" श्रेणी में आता है — न पूर्णतः शुभ, न अशुभ — परंतु दैनिक कार्यों एवं छोटी यात्राओं के लिए पूर्णतः उपयुक्त।

रोग — मंगल शासित, अशुभ। रोग का अर्थ है "बीमारी" — मंगल युद्ध एवं संघर्ष का देवता है। नये एवं शुभ कार्यों हेतु वर्जित। हालांकि अपवादस्वरूप — शत्रु पर विजय, युद्ध, प्रतिस्पर्धा, ऋण-वसूली, मुकदमा — के लिए अनुकूल।

काल — शनि शासित, अत्यंत अशुभ। काल का अर्थ है "मृत्यु" — शनि न्याय एवं कर्म-फल के देवता हैं। कोई भी नया कार्य सर्वथा वर्जित। हालांकि — धन संचय, कृषि कार्य, मजदूरी कार्य — के लिए शनि शुभ है, अतः ये कार्य काल चौघड़िया में किए जा सकते हैं।

उद्वेग — सूर्य शासित, अशुभ। उद्वेग का अर्थ है "चिंता एवं बेचैनी" — सूर्य की उग्र ऊर्जा को प्रतिबिंबित करता है। शुभ कार्य वर्जित। परंतु — सरकारी कार्य, अधिकारियों से भेंट, नेतृत्व-सम्बन्धी कार्य — के लिए उपयुक्त।

चौघड़िया की गणना

चौघड़िया की गणना सूर्योदय एवं सूर्यास्त पर आधारित है। दिन के सूर्योदय से सूर्यास्त तक की अवधि को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है — प्रत्येक भाग एक "दिन का चौघड़िया"। इसी प्रकार सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की अवधि को भी 8 भागों में बाँटा जाता है — "रात्रि के चौघड़िया"। कुल मिलाकर 24 घंटे में 16 चौघड़िया।

प्रत्येक चौघड़िया की अवधि स्थिर नहीं है — सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार बदलती है। ग्रीष्मकाल में दिन लम्बे होने से दिन का चौघड़िया 100+ मिनट का हो सकता है, परंतु रात्रि का चौघड़िया केवल 75-80 मिनट। शीतकाल में इसके विपरीत। इसीलिए आपके स्थान एवं तिथि के अनुसार सटीक गणना आवश्यक है।

दिन के पहले चौघड़िया का स्वामी ग्रह उस दिन के स्वामी ग्रह से निर्धारित होता है। उदाहरण: रविवार को दिन का पहला चौघड़िया उद्वेग (सूर्य) से प्रारम्भ होता है, सोमवार को अमृत (चन्द्र) से, मंगलवार को रोग (मंगल) से, बुधवार को लाभ (बुध) से, गुरुवार को शुभ (गुरु) से, शुक्रवार को चर (शुक्र) से, और शनिवार को काल (शनि) से।

आठ चौघड़िया का क्रम सदैव एक ही होता है: स्वामी → शनि → गुरु → मंगल → सूर्य → शुक्र → बुध → चन्द्र — फिर पुनरावृत्ति। यह क्रम "होरा क्रम" कहलाता है, जो सात ग्रहों की स्थिति-कक्षा पर आधारित है। उदाहरण: सोमवार दिन के 8 चौघड़िया — अमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर, लाभ, अमृत। रात्रि चौघड़िया उसी क्रम में चलते हैं।

चौघड़िया एवं अन्य मुहूर्त-पद्धतियाँ

चौघड़िया अकेली मुहूर्त-पद्धति नहीं है। पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार — का सम्पूर्ण विश्लेषण मुहूर्त की पारम्परिक एवं अधिक सटीक पद्धति है। चौघड़िया एक त्वरित विकल्प है — जब विस्तृत मुहूर्त-गणना सम्भव न हो।

सामान्य नियम: छोटे एवं दैनिक कार्य — यात्रा, बैठक, खरीद-फरोख्त, बाहर जाना — के लिए चौघड़िया पर्याप्त। बड़े जीवन-कार्य — विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, अन्नप्राशन, उपनयन — के लिए सम्पूर्ण पंचांग एवं कुंडली विश्लेषण आवश्यक।

अभिजित मुहूर्त एक विशेष काल है — दिन का 8वाँ मुहूर्त (मध्यान्ह के आसपास 48 मिनट) — जो सर्वथा शुभ माना जाता है (बुधवार को छोड़कर)। यदि अभिजित मुहूर्त किसी शुभ चौघड़िया (अमृत/शुभ/लाभ/चर) के साथ संयोग बना ले — तो यह सर्वोत्तम मुहूर्त है।

राहु काल चौघड़िया से अलग है — राहु काल दिन का एक विशेष 1-1.5 घंटे का खण्ड है जो किसी भी चौघड़िया के साथ ओवरलैप कर सकता है। यदि कोई शुभ चौघड़िया (जैसे अमृत) राहु काल में पड़ रहा हो — तो उस समय कार्य आरम्भ नहीं किया जाता। चौघड़िया को राहु काल/यमगण्ड/गुलिक काल/भद्रा से पृथक देखकर ही चुनें।

चौघड़िया के व्यावहारिक उपयोग

दैनिक यात्रा: यदि आप यात्रा पर जा रहे हैं, तो चर चौघड़िया सर्वोत्तम है — यह विशेष रूप से यात्रा के लिए डिज़ाइन किया गया है। अमृत, शुभ, लाभ — भी अनुकूल। रोग, काल, उद्वेग में यात्रा से बचें (छोटी यात्राओं में अपवाद)।

व्यापार आरम्भ: नया व्यवसाय, दुकान खोलना, उद्घाटन — के लिए लाभ चौघड़िया सर्वोत्तम (बुध शासित, धन का देवता)। शुभ एवं अमृत भी उत्तम। काल चौघड़िया कुछ धन-संचय कार्यों के लिए भी अनुकूल (अपवाद)।

पूजा एवं धार्मिक कार्य: अमृत अथवा शुभ चौघड़िया में पूजा से विशेष फल प्राप्त होता है। नवरात्रि के व्रत, सत्यनारायण कथा, हवन, शान्ति-पाठ — सब अमृत/शुभ चौघड़िया में करें।

चिकित्सा एवं औषधि: नई दवा प्रारम्भ करना, ऑपरेशन, अथवा महत्वपूर्ण चिकित्सीय निर्णय — अमृत चौघड़िया में सर्वोत्तम। रोग चौघड़िया में चिकित्सा वर्जित (नाम के विपरीत — रोग में चिकित्सा अशुभ मानी जाती है)।

विवाह वार्ता एवं सगाई: सगाई की वार्ता शुभ चौघड़िया में करें — गुरु-शासित होने से रिश्ते में दीर्घायु एवं समर्पण आता है। अमृत चौघड़िया में सगाई-समारोह करें।

📊7 चौघड़िया-प्रकार — स्वामी, स्वरूप, उपयोग

चौघड़ियास्वामी-ग्रहस्वरूपश्रेष्ठ-कार्यवर्जित-कार्य
अमृतचन्द्रमाअति-शुभसब शुभ-कार्य, चिकित्सा, पूजा, यात्राकुछ नहीं — सर्व-शुभ
शुभगुरुशुभमांगलिक-कार्य, धार्मिक-कर्म, शिक्षा-प्रारम्भ
लाभबुधलाभदायकव्यापार, धन-कार्य, हस्ताक्षर, खरीदारी
चरशुक्रगतिशीलयात्रा, कला, मनोरंजन, परिवर्तनविवाह (कुछ-शाखाओं में)
रोगमंगलअशुभसेना/शस्त्र-कार्य (अपवाद)चिकित्सा, यात्रा, नया-कार्य
कालशनिअशुभपितृ-कर्म, श्राद्ध, तर्पणसब मांगलिक-कार्य
उद्वेगसूर्यअशुभसरकारी-नौकरी, राजकीय-कार्य (अपवाद)विवाह, गृह-प्रवेश, यात्रा

अमृत-शुभ-लाभ-चर सर्वश्रेष्ठ। रोग-काल-उद्वेग वर्जित।

📊दैनिक चौघड़िया-क्रम — वार-वार

वारदिन का 1वाँ2रा3रा4थ5वाँ6ठा7वाँ8वाँ
रविउद्वेगचरलाभअमृतकालशुभरोगउद्वेग
सोमअमृतकालशुभरोगउद्वेगचरलाभअमृत
मंगलरोगउद्वेगचरलाभअमृतकालशुभरोग
बुधलाभअमृतकालशुभरोगउद्वेगचरलाभ
गुरुशुभरोगउद्वेगचरलाभअमृतकालशुभ
शुक्रचरलाभअमृतकालशुभरोगउद्वेगचर
शनिकालशुभरोगउद्वेगचरलाभअमृतकाल

सूर्योदय से 8 भाग में दिवस-चौघड़िया। सूर्यास्त से 8 भाग में रात्रि-चौघड़िया (अलग-क्रम)।

📋चौघड़िया-समय निकालने की 5-चरण विधि

  1. 1

    स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त-समय

    अपने शहर का सटीक सूर्योदय-सूर्यास्त। उदाहरण: दिल्ली 28 अप्रैल 2026 — सूर्योदय 5:42 AM, सूर्यास्त 6:55 PM।

  2. 2

    दिन-अवधि निकालें

    सूर्यास्त - सूर्योदय = कुल-दिन-मिनट। उदाहरण: 6:55 PM - 5:42 AM = 13 घंटे 13 मिनट = 793 मिनट।

  3. 3

    दिवस को 8 भागों में बाँटें

    प्रत्येक चौघड़िया = 793/8 = 99 मिनट (~1 घंटा 39 मिनट)।

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    वार-अनुसार पहला चौघड़िया

    रवि = उद्वेग, सोम = अमृत, मंगल = रोग, बुध = लाभ, गुरु = शुभ, शुक्र = चर, शनि = काल। 8वें चौघड़िया तक क्रम।

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    अपने कार्य के लिए चौघड़िया चुनें

    अमृत/शुभ/लाभ/चर — कार्य-प्रारम्भ करें। रोग/काल/उद्वेग — टालें। हमारी साइट पर तत्काल-गणना।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • चौघड़िया-समय "fixed" मानना — सब शहर में एक-समय

    क्यों: चौघड़िया स्थानीय-सूर्योदय-सूर्यास्त पर आधारित। दिल्ली vs चेन्नई = 30+ मिनट अंतर। मौसमी-अंतर भी (गर्मी-सर्दी)।

    सही उपाय: अपने शहर-तिथि का सटीक-समय हमारे कैल्कुलेटर से। पुस्तक-पंचांग केवल reference।

  • चौघड़िया केवल देखकर पंचांग के अन्य-अंग छोड़ना

    क्यों: चौघड़िया = quick-तरीका। बड़े-कार्य (विवाह, गृह-प्रवेश) के लिए तिथि-नक्षत्र-योग-करण भी देखें।

    सही उपाय: दैनिक-छोटे-कार्य = चौघड़िया पर्याप्त। बड़े-जीवन-कार्य = सम्पूर्ण-पंचांग।

  • रोग-चौघड़िया में चिकित्सा-प्रारम्भ

    क्यों: नाम-विपरीत — "रोग" चौघड़िया चिकित्सा के लिए वर्जित। रोग बढ़ने का संकेत।

    सही उपाय: चिकित्सा-प्रारम्भ अमृत-चौघड़िया में। यदि अनिवार्य — शुभ या लाभ। रोग में कभी नहीं।

  • दिवस-रात्रि चौघड़िया-क्रम भ्रम

    क्यों: दिवस-चौघड़िया का क्रम भिन्न, रात्रि-चौघड़िया का भिन्न। दोनों मिलाने में गलती।

    सही उपाय: दिवस = सूर्योदय से सूर्यास्त। रात्रि = सूर्यास्त से अगला सूर्योदय। दोनों के 8-8 चौघड़िया अलग-अलग। हमारा कैल्कुलेटर दोनों दिखाता।

  • राहु-काल चौघड़िया-शुभ हो — फिर भी चलाना

    क्यों: राहु-काल और चौघड़िया दोनों अलग। अमृत-चौघड़िया हो पर राहु-काल भी हो — फिर भी राहु-काल हावी।

    सही उपाय: दोनों जाँचें। यदि चौघड़िया शुभ + राहु-काल भी = वर्जित। दोनों शुभ हों तभी कार्य करें।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या चौघड़िया पंचांग का विकल्प है?

नहीं। चौघड़िया एक सरलीकृत मुहूर्त-पद्धति है — दैनिक एवं छोटे कार्यों के लिए पर्याप्त। बड़े जीवन-कार्यों (विवाह, गृह प्रवेश) के लिए सम्पूर्ण पंचांग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार — एवं कुंडली विश्लेषण आवश्यक।

क्या रात्रि चौघड़िया भी देखना चाहिए?

हाँ, यदि कार्य रात्रि में करना हो। रात्रि चौघड़िया दिन के समान सिद्धान्त से चलते हैं। शादी की पहली रात (सुहागरात) के लिए अमृत/शुभ रात्रि चौघड़िया चुनना पारम्परिक प्रथा है।

क्या प्रत्येक शहर का चौघड़िया अलग होता है?

हाँ। चौघड़िया सूर्योदय-सूर्यास्त पर आधारित है — दिल्ली का सूर्योदय चेन्नई से 30 मिनट अलग है, इसलिए चौघड़िया भी अलग। हमारा कैलकुलेटर 200+ शहरों के लिए स्थानीय गणना देता है।

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सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।