ओणम — केरल का प्रमुख-त्योहार। 10-दिन का। राजा महाबली के स्वर्ग से वार्षिक-आगमन का स्वागत।
नवीन-फसल और एकता का त्योहार। हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई सब मनाते। पुष्प-रंगोली (पूक्कलम), साद्य (भोज)।
✦ 10 दिन (आथम — थिरुवोणम)
1. आथम: पूक्कलम-आरम्भ।
2. चिथिरा: रंगोली-विस्तार।
3. चोडी: नये-वस्त्र-खरीद।
4. विशाकम: चन्दन-तेल-स्नान।
5. अनिजहम: नौका-दौड़।
6. थ्रिकेट्टा: परिवार-मिलन।
7. मूलम: साद्य-तैयारी।
8. पूराडम: महाबली-स्वागत।
9. उथराडम: मूल-दिन।
10. **थिरुवोणम**: मुख्य-दिन। साद्य-भोज।
✦ 2026 ओणम
आथम: 17 अगस्त 2026।
थिरुवोणम: 26 अगस्त 2026 (बुधवार)।
केरल में राजकीय-अवकाश।
✦ मुख्य-परम्पराएँ
**पूक्कलम**: 10 दिन प्रत्येक-घर के सामने पुष्प-रंगोली। प्रतिदिन-नई।
**ओणसाद्य**: 26 व्यंजन का शाकाहारी-भोज। केले-पत्ते पर।
**वल्लम-कली**: नौका-दौड़ (एलप्पुजा प्रसिद्ध)।
**ओणक्कोडी**: नये-वस्त्र।
**कुम्मट्टी-कली**: मुखौटा-नृत्य।
**पुलि-कली**: बाघ-नृत्य।
✦ महाबली-कथा
महाबली: असुर-राजा किन्तु धर्मी।
केरल में स्वर्ग-समान-राज्य।
देवताओं ने ईर्ष्या की।
विष्णु ने वामन-अवतार लिया।
3-पग-भूमि माँगी।
2 पगों में सब। तीसरा-पग बाली के सिर पर।
बाली पाताल भेजे गये।
वर्ष में एक-बार प्रजा-दर्शन की अनुमति।
यही ओणम।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ओणम-साद्य में 26 व्यंजन क्यों?▼
पारम्परिक: 26 शुभ-संख्या। आधुनिक: 30+ हो सकते। केले के पत्ते पर सजे क्रम।
गैर-केरली ओणम मना सकते?▼
हाँ! त्योहार सब के लिए। पूक्कलम-साद्य घर पर। केरल-रेस्टोरेन्ट में साद्य।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।