नाग-पंचमी — श्रावण-शुक्ल-पंचमी पर नाग-देवताओं की पूजा। 2026 में नाग-पंचमी 19 अगस्त (बुधवार)। 8 नाग-देवताओं (अनन्त, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंखपाल, कुलिक) की पूजा। काल-सर्प-दोष-निवारण का सर्वोच्च-दिन।
पुराण: श्रीकृष्ण ने यमुना में कालिया-नाग का दमन किया था इसी-काल में। नाग-पंचमी पर नाग-दर्शन-पूजा-दूध-अर्पण से अकाल-मृत्यु, सर्प-भय, काल-सर्प-दोष से रक्षा।
✦ नाग-पंचमी 2026 — मुहूर्त
पंचमी-तिथि प्रारम्भ: 18 अगस्त 2026 रात्रि 11:00 PM। समाप्त: 19 अगस्त रात्रि 8:30 PM।
पूजा-मुहूर्त: 19 अगस्त प्रात: 5:50 AM से दोपहर 12:00 PM तक। श्रेष्ठ — सूर्योदय बाद का अमृत-चौघड़िया।
✦ पूजा-विधि
सामग्री: नाग-मूर्ति/चित्र (चांदी की), दूध, हल्दी, चन्दन, अक्षत, फूल, धूप, दीप, मिठाई, गन्ना, खीर।
विधि: नाग-मूर्ति/प्रतिमा को पञ्चामृत-स्नान। हल्दी-कुंकुम-तिलक। दूध का अर्पण (सर्वोत्तम)। मिठाई-भोग।
मन्त्र: "ॐ नागदेवताभ्यो नमः" 108 बार। नाग-स्तोत्र-पाठ।
घर-शुद्धि: मुख्य-द्वार पर गाय के गोबर से 9-नाग का चित्र। हल्दी-चन्दन से।
विशेष: मन्दिर/नाग-स्थल पर पूजा। सर्प-दर्शन हो — नमस्कार। मारें नहीं।
✦ काल-सर्प-दोष-निवारण
काल-सर्प-दोष-वाले के लिए नाग-पंचमी सर्वश्रेष्ठ-निवारण-दिन।
त्र्यम्बकेश्वर/कालहस्ती में काल-सर्प-पूजा। यदि न-सम्भव — स्थानीय-शिव-मन्दिर में नाग-पूजा।
108 बार "ॐ नागदेवताय नमः" + 108 बार "ॐ नमः शिवाय"।
चांदी का नाग-जोड़ा बहती-नदी में विसर्जित। दूध-दान।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सच्चे साँप को दूध पिलाना उचित?▼
नहीं — सर्प-शास्त्रीय-दृष्टि से दूध हानिकारक (सर्प lactose-intolerant)। मूर्ति/प्रतिमा को दूध-अर्पण ही करें। जीवित-सर्प पर पानी ही पर्याप्त।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।