✦ चन्द्र ग्रहण ✦
✦ राहु-केतु द्वारा चन्द्रमा का ग्रहण — पूर्णिमा का विशेष काल ✦
✦ चन्द्र ग्रहण क्या है? ✦
चन्द्र ग्रहण = खगोलीय घटना जिसमें पृथ्वी सूर्य एवं चन्द्र के बीच आकर अपनी छाया चन्द्र पर डालती है। यह केवल पूर्णिमा के दिन ही सम्भव है — और तब भी हर पूर्णिमा को नहीं, क्योंकि चन्द्र-कक्षा सूर्य-कक्षा से ५° झुकी है।
पुराण-कथा अनुसार राहु-केतु अमृत-छल के पश्चात् सूर्य एवं चन्द्र को निगलने का प्रयास करते हैं। चन्द्र ग्रहण में राहु/केतु चन्द्र को निगलते हुए दृष्टिगोचर होते हैं — मन का देवता, चित्त का स्वामी।
चन्द्र ग्रहण का सूतक-काल = ग्रहण से ९ घंटे पूर्व प्रारम्भ (सूर्य ग्रहण से कम)। मन-सम्बन्धी कार्य त्याज्य — विवाह-वार्ता, सम्बन्ध-निर्णय, मानसिक संकल्प। ग्रहण-काल में मन्त्र-जप, ध्यान, अमृत-स्तोत्र पाठ अति-शुभ।
तीन प्रकार — पूर्ण (चन्द्र पूर्णतः छाया में), आंशिक (कुछ भाग में), उपछाया (penumbral — हल्की छाया)। सूतक नियम केवल पूर्ण एवं आंशिक के लिए — उपछाया ग्रहण के लिए सूतक नहीं।
✦ अवधारणा एवं नियम ✦
खगोलीय आधार: पृथ्वी की छाया दो प्रकार की होती है — अम्ब्रा (पूर्ण छाया) एवं पेनम्ब्रा (आंशिक/उपछाया)। चन्द्र अम्ब्रा में प्रवेश करने पर पूर्ण/आंशिक ग्रहण; केवल पेनम्ब्रा में रहने पर उपछाया ग्रहण। एक वर्ष में २-५ चन्द्र ग्रहण होते हैं। प्रत्येक ग्रहण विश्व के एक भाग से दृश्य होता है — भारत की दृश्यता ग्रहण-दर-ग्रहण भिन्न।
✦ आगामी चन्द्र ग्रहण (२०२६-२०२८) ✦
28 अगस्त 2026 · शुक्र
आंशिक चन्द्र ग्रहण · भारत में पूर्ण दृश्य
20 फ़रवरी 2027 · शनि
उपछाया चन्द्र ग्रहण · विश्व में अधिकांशतः दृश्य
17 अगस्त 2027 · मंगल
उपछाया चन्द्र ग्रहण · भारत में दृश्य
12 जनवरी 2028 · बुध
आंशिक चन्द्र ग्रहण · एशिया में दृश्य — भारत में पूर्ण दृश्य
6 जुलाई 2028 · गुरु
आंशिक चन्द्र ग्रहण · भारत में दृश्य
31 दिसम्बर 2028 · रवि
आंशिक चन्द्र ग्रहण · भारत में दृश्य
* दिल्ली पंचांग सन्दर्भ। स्थान बदलने पर तिथियाँ ±1 दिन भिन्न हो सकती हैं।