करवा चौथ 2026

29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) — पति-दीर्घायु का निर्जला व्रत

सरगी समय

4:00 - 5:00 AM

पूजा मुहूर्त

5:30 - 7:00 PM

चन्द्रोदय (दिल्ली)

8:15 PM

करवा-चौथ — हिन्दू-स्त्रियों का सबसे-प्रसिद्ध पति-दीर्घायु-व्रत। कार्तिक-कृष्ण-चतुर्थी (दीपावली से 9 दिन पूर्व) पर निर्जला (बिना-जल) उपवास। 2026 में करवा-चौथ 29 अक्टूबर (गुरुवार)। चन्द्रोदय बाद ही पारण।

करवा = मिट्टी का छोटा-कलश। चौथ = चतुर्थी। पुराण-कथा: सावित्री-सत्यवान की भक्ति से प्रेरित। महाभारत में द्रौपदी ने अर्जुन के लिए यह व्रत किया। वीरावती की कथा सर्व-प्रचलित। उत्तर-भारत (पंजाब, दिल्ली, यूपी, राजस्थान, हरियाणा, मध्य-प्रदेश) में सर्वाधिक मनाया।

करवा-चौथ 2026 — सटीक मुहूर्त (दिल्ली)

चतुर्थी-तिथि प्रारम्भ: 30 अक्टूबर 2026 (शुक्र) प्रातः 5:42 AM। चतुर्थी-समाप्त: 31 अक्टूबर सुबह 7:42 AM।

पूजा-मुहूर्त (संकल्प + करवा-कथा): सायं 5:30 PM - 7:00 PM। चन्द्रोदय: रात्रि 8:15 PM (दिल्ली)। चन्द्र-दर्शन के बाद ही पारण।

अन्य शहरों के चन्द्रोदय: मुम्बई 8:50 PM, कोलकाता 7:35 PM, चेन्नई 8:25 PM, बेंगलुरु 8:35 PM, अहमदाबाद 8:48 PM, जयपुर 8:21 PM, लखनऊ 8:08 PM, पुणे 8:48 PM।

व्रत-विधि — सम्पूर्ण-प्रक्रिया

पूर्व-संध्या (29 अक्टूबर रात्रि): सरगी (सास द्वारा बहू को दिया गया प्रात:-नाश्ता) तैयार। मेहंदी लगायें।

सरगी-सेवन (4-5 AM, सूर्योदय से पूर्व): सास की दी सरगी खायें — फेनी, मीठा, मेवे, फल, पराठा, दूध। यह दिन-भर का ऊर्जा-स्रोत। सूर्योदय बाद कुछ नहीं — पूर्ण-निर्जला।

दिन-भर: व्रत-धारण। पूजा-तैयारी। मेहंदी-शृंगार-नये-वस्त्र (लाल/केसरी)। नई-दुल्हन को विशेष शृंगार।

सायं-पूजा (5:30-7 PM): करवा-माता की पूजा। मिट्टी का करवा (कलश) में जल। शिव-पार्वती-गणेश-कार्तिकेय-चन्द्र की पूजा। करवा-चौथ-कथा सुनें।

चन्द्रोदय (रात्रि 8 PM के आसपास): छलनी से चन्द्रमा को देखें। फिर पति को छलनी से देखें। पति जल पिलायें। फिर भोजन।

पूजा-सामग्री

मिट्टी के करवे (4-5 छोटे + 1 बड़ा), पवित्र-जल, पीली-मिट्टी, गणेश-मूर्ति, शिव-पार्वती चित्र, करवा-माता की तस्वीर।

सिन्दूर, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, फूल (गुलाब-गेंदा), धूप, दीप, घी, चन्दन।

फेनी, सरगी-सामग्री, मिठाई, फल, मेवे, दूध, खीर, हलवा, पूरी, पकवान।

छलनी, थाली, दिया, करवा-चौथ कथा-पुस्तक, लाल-धागा, मेहंदी।

श्रृंगार: लाल-साड़ी/लहंगा, चूड़ियाँ, बिंदी, सिन्दूर, मंगलसूत्र, पैर के बिछुए। दुल्हन-समान शृंगार।

करवा-चौथ-कथा सारांश

वीरावती-कथा (सबसे प्रचलित): वीरावती 7 भाइयों की एक-इकलौती बहन। पहली बार करवा-चौथ-व्रत किया। चन्द्रोदय से पहले भूख-प्यास से व्याकुल। भाइयों ने पीपल पर दीपक जलाकर "चन्द्रोदय हो गया" कहा। बहन ने भोजन कर लिया — पति की तत्काल मृत्यु। वीरावती ने 1 साल तक तपस्या-व्रत किए। माँ-गौरी ने वर दिया — पति पुनर्जीवित हुए। तभी से करवा-चौथ-व्रत सख्ती से पालन।

महाभारत-कथा: द्रौपदी ने अर्जुन के लिए करवा-चौथ-व्रत किया। श्रीकृष्ण ने इसकी महिमा सुनायी। पाण्डवों के 13-वर्ष-वनवास में सहायता।

सती-सावित्री: यम से पति-सत्यवान को छुड़ाने वाली। उनकी भक्ति की प्रेरणा करवा-चौथ-व्रत में।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या अविवाहित-कन्याएँ करवा-चौथ-व्रत कर सकती हैं?

पारम्परिक-रूप से नहीं — यह विवाहित-स्त्रियों का व्रत। पर आधुनिक-काल में सगाई-शुदा कन्याएँ "मनचाहे-वर" के लिए भी करती हैं। उस-स्थिति में पारण चन्द्रमा-दर्शन के बाद, बिना पति-दर्शन।

क्या प्रथम-वर्ष-वधू को विशेष-नियम?

हाँ। प्रथम-वर्ष की दुल्हन के लिए सास द्वारा बायना (साड़ी, मिठाई, उपहार) दिया जाता। मायके से भी विशेष-तोहफे। पहली बार में निर्जला-व्रत कठिन हो तो फलाहार स्वीकार्य (कुछ-शाखा)।

चन्द्रमा न दिखे तो क्या करें?

बादल-कोहरे में चन्द्र-दर्शन न हो — चन्द्रोदय-समय पर दिशा की ओर मुख करें। मानसिक-दर्शन। चन्द्र-स्तोत्र-पाठ। पति-दर्शन के बाद पारण।

व्रत में दवा ले सकते हैं?

मधुमेह, रक्तचाप के रोगी डॉक्टर-परामर्श-बाद आवश्यक-दवा अवश्य लें। स्वास्थ्य-सर्वोपरि। शास्त्र भी "स्वास्थ्य-वर्जन" की अनुमति देता।

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सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।