कल्प — हिन्दू-कॉस्मोलॉजी में सबसे-बड़ी समय-इकाई। ब्रह्मा का 1 दिन = 1 कल्प = 4.32 अरब वर्ष। हम वर्तमान में श्वेत-वराह-कल्प में।
1 कल्प = 14 मन्वन्तर = 1000 चतुर-युग।
✦ समय-इकाइयाँ
1 निमेष (पलक) = 0.2 सेकेण्ड।
15 निमेष = 1 काष्ठा।
30 काष्ठा = 1 कला।
30 कला = 1 क्षण।
12 क्षण = 1 मुहूर्त (48 मिनट)।
30 मुहूर्त = 1 दिन-रात्रि।
30 दिन = 1 मास।
12 मास = 1 वर्ष = 1 दिव्य-दिन।
360 दिव्य-दिन = 1 दिव्य-वर्ष।
✦ 4 युग
1. **सत्य-युग** (1,728,000 वर्ष): 100% धर्म।
2. **त्रेता-युग** (1,296,000 वर्ष): 75% धर्म।
3. **द्वापर-युग** (864,000 वर्ष): 50% धर्म।
4. **कलि-युग** (432,000 वर्ष): 25% धर्म।
कुल: 4,320,000 वर्ष = 1 चतुर-युग।
✦ मन्वन्तर और कल्प
1 चतुर-युग × 71 = 1 मन्वन्तर (~30.67 करोड़ वर्ष)।
14 मन्वन्तर + सन्धि = 1 कल्प (~4.32 अरब वर्ष)।
1 कल्प = ब्रह्मा-दिन।
दिन-रात मिलाकर ब्रह्मा का 1 अहोरात्र = 8.64 अरब वर्ष।
ब्रह्मा-आयु: 100 ब्रह्म-वर्ष = ~311 खरब वर्ष।
✦ वर्तमान-स्थान
वर्तमान-कल्प: श्वेत-वराह।
वर्तमान-मन्वन्तर: 7वाँ — वैवस्वत।
वर्तमान-चतुर-युग: 28वाँ।
वर्तमान-युग: कलि।
कलि-युग आरम्भ: 18 फरवरी 3102 ईसा-पूर्व (श्रीकृष्ण-निर्वाण)।
कलि-युग में हम: 5128 वर्ष में।
कलि-युग शेष: 426,872 वर्ष।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विज्ञान से कैसे मिलता?▼
पृथ्वी 4.5 अरब वर्ष पुरानी (विज्ञान)। 1 कल्प 4.32 अरब वर्ष (हिन्दू)। उल्लेखनीय-समानता।
कलि-युग कब समाप्त?▼
~426,872 वर्ष शेष। समाप्ति-पश्चात कल्कि-अवतार। फिर सत्य-युग आरम्भ।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।