जीवित्पुत्रिका-व्रत (जितिया) — माताएँ अपनी सन्तान की दीर्घायु-स्वास्थ्य के लिए कठोर-निर्जला-व्रत। आश्विन-कृष्ण-अष्टमी पर। 2026 में जीवित्पुत्रिका 4 अक्टूबर (रविवार)। 24-घंटे का निर्जला-व्रत।
✦ जितिया 2026
अष्टमी प्रारम्भ: 3 अक्टूबर 2026। समाप्त: 4 अक्टूबर 2026 (अष्टमी क्षय - मध्याह्न आधारित)।
नहाय-खाय: 3 अक्टूबर — एक-समय सात्विक-भोजन।
मुख्य-व्रत: 4 अक्टूबर 24 घंटे निर्जला।
पूजा: सायं जीमूतवाहन-कथा। चील-सियार की मिट्टी-मूर्ति।
पारण: 5 अक्टूबर सूर्योदय बाद।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जीमूतवाहन कौन?▼
गन्धर्व-राजकुमार। नागों के बच्चों को बचाने के लिए स्वयं बलिदान। उनकी कथा से सन्तान-दीर्घायु।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।