गुड़ी-पाडवा — चैत्र-शुक्ल-प्रतिपदा। हिन्दू-नव-वर्ष का प्रारम्भ। 2026 में 19 मार्च (गुरुवार)। महाराष्ट्र-गोवा-कर्नाटक में मुख्य-त्यौहार। आन्ध्र-तेलंगाना में "उगादि" नाम से। ब्रह्मा ने इसी-दिन सृष्टि-रचना प्रारम्भ की।
"गुड़ी" = ध्वज (पीले-वस्त्र, नारियल, नीम-पत्ती, चांदी का कलश)। घर के बाहर लगायी जाती। विजय का प्रतीक।
✦ गुड़ी-पाडवा 2026 मुहूर्त
प्रतिपदा प्रारम्भ: 18 मार्च 11:00 PM। समाप्त: 19 मार्च 8:30 PM।
गुड़ी-स्थापना: 19 मार्च प्रात: 6:30-7:50 AM।
नये-वर्ष-पूजा: पूरे-दिन। अबूझ-मुहूर्त।
✦ विधि
प्रात: स्नान। नये-वस्त्र (पीले/केसरी)।
गुड़ी तैयार: बाँस के डंडे पर पीले-वस्त्र, नीम-आम पत्ते, फूल-माला, चीनी की मिश्री-माला, ऊपर चांदी/तांबे का कलश।
मुख्य-द्वार के दाहिनी ओर ऊँचा-उठा कर खड़ी करें।
नीम-गुड़-इमली-सरसों-धनिया का प्रसाद। नया-संवत्सर-पूजन।
सूर्यास्त बाद गुड़ी-उतारना। प्रसाद-वितरण।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुड़ी-पाडवा क्यों मनायी जाती?▼
1) ब्रह्मा-सृष्टि-रचना-आरम्भ 2) श्रीराम का अयोध्या-राज्याभिषेक 3) शिवाजी की विजय। हिन्दू-नव-वर्ष का प्रारम्भ।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।