आयुर्वेद परिचय

5000+ वर्ष पुरानी जीवन-विज्ञान

त्रिदोष

3

शाखाएँ

8

मूल-स्थापक

चरक-सुश्रुत

आयुर्वेद — "जीवन का विज्ञान"। 5000+ वर्ष पुरानी भारतीय-चिकित्सा। चरक, सुश्रुत, वाग्भट प्रमुख-आचार्य।

मूल: त्रिदोष (वात-पित्त-कफ) + सप्त-धातु + पंच-महाभूत। रोग-निवारण + दीर्घायु।

मूल-सिद्धान्त

**त्रिदोष**: वात (वायु+आकाश), पित्त (अग्नि+जल), कफ (पृथ्वी+जल)।

**प्रकृति**: जन्मजात-दोष-संयोग।

**विकृति**: वर्तमान-असन्तुलन।

**सप्त-धातु**: 7 ऊतक।

**त्रि-मल**: मल, मूत्र, स्वेद।

स्वास्थ्य = सन्तुलन।

रोग = असन्तुलन।

8 अंग (अष्टांग-आयुर्वेद)

1. **काय-चिकित्सा**: सामान्य-रोग।

2. **बाल-चिकित्सा**: बाल-रोग।

3. **ग्रह-चिकित्सा**: मानसिक-रोग।

4. **ऊर्ध्वांग-चिकित्सा**: ENT-नेत्र।

5. **शल्य-चिकित्सा**: सर्जरी।

6. **दंष्ट्रा**: विष-चिकित्सा।

7. **जरा**: रसायन (एण्टी-एजिंग)।

8. **वृष**: वाजीकरण (प्रजनन)।

दिनचर्या (दैनिक-नियम)

ब्रह्म-मुहूर्त उठें (4-5 AM)।

जीभ-सफाई।

तेल-कुल्ला (oil pulling)।

तेल-मालिश (अभ्यंग)।

योग-आसन।

सात्विक-नाश्ता।

दोपहर-भोजन सबसे-बड़ा।

सायं-हल्का-भोजन।

9-10 PM शयन।

प्रसिद्ध-औषधियाँ

अश्वगन्धा: तनाव, ऊर्जा।

तुलसी: रोग-प्रतिरोधक।

गिलोय: बुखार।

हल्दी: सूजन-रोधक।

त्रिफला: पाचन।

ब्राह्मी: स्मृति।

नीम: रक्त-शुद्धि।

शतावरी: स्त्री-स्वास्थ्य।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुर्वेद बनाम अंग्रेजी-दवा?

दोनों उपयोगी। तीव्र-रोग में अंग्रेजी। पुरानी-रोग, निवारण में आयुर्वेद। पूरक-दृष्टिकोण।

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सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।