योगिनी दशा

वैदिक-ज्योतिष की 8-योगिनी 36-वर्ष-दशा

योगिनियाँ

8

चक्र

36 वर्ष

मूल

नक्षत्र

योगिनी-दशा — वैदिक-ज्योतिष का विशेष-दशा-तन्त्र। 8 योगिनियों के अनुसार 36-वर्ष-चक्र। नक्षत्र-स्वामी-आधारित।

मुख्य-उपयोग: तीव्र-घटनाओं की भविष्यवाणी। विशेषतः उत्तर-भारत में लोकप्रिय।

8 योगिनी-दशाएँ

1. **मंगला** (1 वर्ष): चन्द्र-स्वामी।

2. **पिंगला** (2 वर्ष): सूर्य।

3. **धान्या** (3 वर्ष): गुरु।

4. **भ्रामरी** (4 वर्ष): मंगल।

5. **भद्रिका** (5 वर्ष): बुध।

6. **उल्का** (6 वर्ष): शनि।

7. **सिद्धा** (7 वर्ष): शुक्र।

8. **सङ्कटा** (8 वर्ष): राहु।

कुल: 36 वर्ष।

दशा-फल

मंगला: मंगल-कार्य, धन-लाभ।

पिंगला: तेज-वृद्धि, यश।

धान्या: ज्ञान, सम्पत्ति।

भ्रामरी: यात्रा, परिवर्तन।

भद्रिका: शुभ-समाचार, संतान।

उल्का: कठिनाई, धैर्य-परीक्षा।

सिद्धा: सफलता, सिद्धि।

सङ्कटा: संकट, सावधानी।

गणना

जन्म-नक्षत्र देखें।

नक्षत्र की दशा-शुरुआत-तिथि-अनुसार।

कम्प्यूटर/सॉफ्टवेयर सटीक।

जन्म-समय अनिवार्य।

सूक्ष्म-अन्तर्दशा भी।

विमशोत्तरी से तुलना

विमशोत्तरी: 120 वर्ष-चक्र।

योगिनी: 36 वर्ष-चक्र।

विमशोत्तरी: 9 ग्रह।

योगिनी: 8 योगिनियाँ।

विमशोत्तरी: सर्व-स्वीकार्य।

योगिनी: तीव्र-फल। उत्तर-भारत में अधिक।

दोनों एक-साथ बेहतर-भविष्यवाणी।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगिनी-दशा सब के लिए?

हाँ। पर विमशोत्तरी मूल। योगिनी पूरक। ज्योतिषी दोनों देखते।

सङ्कटा-दशा में क्या करें?

8 वर्ष कठिन। सावधानी, अध्यात्म, राहु-उपाय। नया-कार्य न शुरू। दान।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।