यात्रा मुहूर्त 2026

सोम/बुध/गुरु/शुक्र श्रेष्ठ

सोम/शनि शूल

पूर्व ✗

मंगल/बुध शूल

उत्तर ✗

गुरु शूल

दक्षिण ✗

यात्रा-मुहूर्त — दीर्घ-यात्रा (विदेश, पवित्र-तीर्थ, नौकरी-स्थानांतरण) के लिए शुभ-समय का चयन। पंचांग-शास्त्र में यात्रा-मुहूर्त को विशेष-महत्त्व। दिशा-वार + वार-वार + नक्षत्र-वार नियम।

2026 के लिए यात्रा के शुभ-दिन: सोम, बुध, गुरु, शुक्र। मंगल/शनि/रवि सामान्य-यात्रा के लिए कम-शुभ। दिशा-शूल का ध्यान विशेष।

दिशा-शूल — वार-वार वर्जित-दिशा

सोमवार: पूर्व-दिशा वर्जित (दिशा-शूल)। शनिवार: पूर्व वर्जित।

मंगलवार: उत्तर वर्जित। बुधवार: उत्तर वर्जित।

गुरुवार: दक्षिण वर्जित। रविवार: पश्चिम वर्जित। शुक्रवार: पश्चिम वर्जित।

दिशा-शूल-निवारण: यदि वर्जित-दिशा यात्रा अनिवार्य — गुड़, घी, दूध, फल खाकर निकलें। हनुमान-चालीसा।

यात्रा-नक्षत्र

श्रेष्ठ: पुनर्वसु, हस्त, स्वाती, अश्विनी, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, मृगशिरा। चर/लघु-स्वभाव के नक्षत्र।

वर्जित: भरणी, मघा, मूल, ज्येष्ठा, आर्द्रा, आश्लेषा। उग्र/तीक्ष्ण नक्षत्र।

अपने जन्म-नक्षत्र पर भी यात्रा वर्जित (कुछ शाखा)।

यात्रा-संकल्प की विधि

मुहूर्त-समय: अमृत/शुभ/लाभ-चौघड़िया। राहु-काल टालें।

घर से निकलने से पूर्व: स्नान, गणेश-स्मरण, हनुमान-चालीसा, कुलदेवी-कुलदेवता-स्मरण।

दूब-दही-गुड़ खाकर निकलें (पारम्परिक "मंगल-शकुन")।

मुख्य-द्वार पर: माँ-पिता-गुरु का आशीर्वाद। पैर छूकर निकलें।

दहलीज पर खड़े होकर गुड़-धनिये के दाने पीछे फेंकें — सुरक्षित-वापसी का संकेत।

2026 तीर्थ-यात्रा शुभ-समय

चार-धाम (उत्तराखण्ड): 19 अप्रैल (अक्षय-तृतीया) से 14 नवम्बर तक खुले। मई-जून-सितम्बर-अक्टूबर श्रेष्ठ।

वैष्णो-देवी: साल-भर। नवरात्रि (मार्च, अक्टूबर) में विशेष।

तिरुपति: साल-भर। ब्रह्मोत्सव (सितम्बर-अक्टूबर) विशेष।

पवित्र-स्नान: मकर-संक्रान्ति (14 जनवरी), महाशिवरात्रि (15 फरवरी), अक्षय-तृतीया (20 अप्रैल), गंगा-दशहरा (25 मई), कार्तिक-पूर्णिमा (24 नवम्बर)।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिशा-शूल कितना सख्त नियम?

पारम्परिक रूप से सख्त। आधुनिक-यात्रा (रोज की office-यात्रा) में लगभग असम्भव। नियम मुख्यतः दीर्घ-यात्रा के लिए। निवारण के साथ छोटी-यात्रा सम्भव।

घर से निकलते दहलीज पर ठोकर — अशुभ?

पारम्परिक: हाँ — पुनः अन्दर जाएं, थोड़ी देर रुकें, पानी पियें, फिर निकलें। आधुनिक-दृष्टि: मानसिक-सतर्कता का संकेत — एक-पल रुकना उपयोगी।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।