शिरडी साईं बाबा

महाराष्ट्र के शिरडी-गाँव के सर्व-धर्म-सन्त

समाधि-वर्ष

1918

मुख्य-शिक्षा

श्रद्धा-सबूरी

दैनिक-आरती

5

शिरडी साईं बाबा — महाराष्ट्र के शिरडी-गाँव के सन्त। 1838-1918 (अनुमानित)। हिन्दू-मुस्लिम-दोनों परम्पराओं के सम्मानित।

मूल-शिक्षा: "श्रद्धा" और "सबूरी" (धैर्य)। "सबका मालिक एक।" अल्लाह-राम एक।

जीवन-संक्षेप

जन्म-स्थान-धर्म अनिश्चित।

16 आयु में शिरडी पहुँचे।

द्वारकामाई-मस्जिद में निवास।

60 वर्ष शिरडी में।

दैनिक: भिक्षा, धुनि (अग्नि), लोगों की सहायता।

15 अक्टूबर 1918 (विजयदशमी) महासमाधि।

चमत्कार

उडी-धूलि (अग्नि-राख): रोग-निवारण।

भविष्य-कथन।

भक्तों की रक्षा (दूर-स्थान)।

दीप जलाया जल से।

मरण के बाद भी अनुभव।

मन्दिर-दर्शन

समाधि-मन्दिर: मुख्य।

द्वारकामाई-मस्जिद: निवास-स्थल।

चावड़ी: रात्रि-विश्राम-स्थल।

गुरुस्थान: पहले-दर्शन-वृक्ष।

दर्शन: सुबह 4:00 — रात्रि 11:15।

गुरुवार और रामनवमी विशेष।

पहुँच

नज़दीकी रेलवे: साईंनगर शिरडी।

हवाई: शिरडी-हवाई-अड्डा (15 किमी)।

मुम्बई से 240 किमी (5 घण्टे)।

पुणे से 185 किमी।

नासिक से 90 किमी।

सुलभ-यातायात।

5 दैनिक-आरतियाँ

काकड़-आरती: 4:30 AM।

मंगल-आरती।

दोपहर-आरती: 12:00 PM।

धूप-आरती: सायं।

शेज-आरती: 10:30 PM।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साईं बाबा हिन्दू थे या मुस्लिम?

अनिश्चित। उन्होंने स्वयं कहा: "अल्लाह मालिक।" "राम-अल्लाह एक।" सब-धर्म-समान।

उडी (राख) का महत्त्व?

धुनि-अग्नि की राख। बाबा ने भक्तों को दी। माना: रोग-निवारक, सुरक्षा-कवच।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।