नाड़ी-दोष — कुण्डली-मिलान का सबसे-गम्भीर-दोष। 36 गुणों में 8 अंक नाड़ी के। समान-नाड़ी = 0 अंक = विवाह-वर्जित।
3 नाड़ियाँ: आदि (वात), मध्य (पित्त), अन्त्य (कफ)। नक्षत्र-आधारित।
✦ 3 नाड़ियों का आयुर्वेद-संयोग
**आदि-नाड़ी (वात)**: अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा-फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वा-भाद्रपद।
**मध्य-नाड़ी (पित्त)**: भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा-फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वा-षाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तरा-भाद्रपद।
**अन्त्य-नाड़ी (कफ)**: कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उत्तरा-षाढ़ा, श्रवण, रेवती।
✦ दोष का प्रभाव
सन्तान-दोष: निःसन्तानता या कमजोर-सन्तान।
स्वास्थ्य-समस्याएँ।
तलाक की सम्भावना।
आर्थिक-संघर्ष।
दाम्पत्य-कलह।
✦ अपवाद (दोष-निरस्त)
एक-नक्षत्र में जन्म किन्तु अलग-चरण।
दोनों कुम्भ-राशि या मीन।
नक्षत्र-स्वामी एक किन्तु अलग-नक्षत्र।
मित्र-शत्रु-नक्षत्र-योग।
✦ उपाय
महामृत्युञ्जय-जप 1.25 लाख।
नाड़ी-निवारण-पूजा।
गौ-दान, अन्न-दान।
गोदान या स्वर्ण-दान।
ब्रह्म-विवाह-संस्कार।
कुलदेवता-आशीर्वाद।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नाड़ी-दोष से तलाक निश्चित?▼
नहीं। दोष का प्रभाव सूचक है, नियति नहीं। उपाय और शुद्ध-निष्ठा से सुखी-वैवाहिक-जीवन।
दोनों एक नक्षत्र = दोष?▼
अलग-चरण = दोष-न्यून। समान-चरण = पूर्ण-दोष। चरण-विवरण ज्योतिषी से।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।