भकूट दोष

राशि-दूरी पर आधारित कुण्डली-दोष — 7 अंक

दोष-दूरी

6-8 / 9-5 / 12-2

अंक

7/36

उपाय

कुम्भ-विवाह

भकूट-दोष — कुण्डली-मिलान का दोष। 36 गुणों में 7 अंक भकूट के। राशि-दूरी पर आधारित।

दूरी 6-8, 9-5, 12-2 की हो तो दोष। नाड़ी के बाद दूसरा-गम्भीर।

भकूट-दोष कब

वर-वधू की राशियाँ 6-8 (षडाष्टक): सन्तान-समस्या।

9-5 (नवपंचम): सम्पत्ति-संघर्ष।

12-2 (द्विद्वार्दश): आर्थिक-तनाव।

3-11, 4-10, 7-7 = सर्व-शुभ। दोष-नहीं।

राशि-गणना

उदाहरण: वर-वृषभ (2), वधू-धनु (9)। गिनती: 2 से 9 = 8वीं राशि। दोष!

पीछे की गिनती: 9 से 2 = 6वीं राशि। 6-8 दोष!

दोनों-दिशाएँ देखें।

अपवाद (निरस्त)

राशि-स्वामी एक हो (मेष-वृश्चिक: मंगल, वृषभ-तुला: शुक्र)।

मित्र-राशि-स्वामी।

ग्रह-दृष्टि-शुभ।

नाड़ी-गुण और सब-गुण उच्च = दोष-निरस्त।

उपाय

विष्णु-लक्ष्मी-पूजन।

सत्यनारायण-कथा।

सम्बन्धित-राशि-स्वामी-ग्रह की उपासना।

दान-धर्म।

कुम्भ-विवाह-संस्कार (तुलसी या वृक्ष से वर का प्रथम-विवाह)।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भकूट-दोष = विवाह-वर्जित?

नहीं। उपाय से समाधान। यदि नाड़ी-गुण उच्च और अन्य-दोष-नहीं, तो विवाह-स्वीकार्य।

कुम्भ-विवाह क्या?

दोष-वर का प्रथम-विवाह तुलसी/मिट्टी-कुम्भ से। फिर मनुष्य से। शास्त्र-स्वीकार्य।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।