भकूट-दोष — कुण्डली-मिलान का दोष। 36 गुणों में 7 अंक भकूट के। राशि-दूरी पर आधारित।
दूरी 6-8, 9-5, 12-2 की हो तो दोष। नाड़ी के बाद दूसरा-गम्भीर।
✦ भकूट-दोष कब
वर-वधू की राशियाँ 6-8 (षडाष्टक): सन्तान-समस्या।
9-5 (नवपंचम): सम्पत्ति-संघर्ष।
12-2 (द्विद्वार्दश): आर्थिक-तनाव।
3-11, 4-10, 7-7 = सर्व-शुभ। दोष-नहीं।
✦ राशि-गणना
उदाहरण: वर-वृषभ (2), वधू-धनु (9)। गिनती: 2 से 9 = 8वीं राशि। दोष!
पीछे की गिनती: 9 से 2 = 6वीं राशि। 6-8 दोष!
दोनों-दिशाएँ देखें।
✦ अपवाद (निरस्त)
राशि-स्वामी एक हो (मेष-वृश्चिक: मंगल, वृषभ-तुला: शुक्र)।
मित्र-राशि-स्वामी।
ग्रह-दृष्टि-शुभ।
नाड़ी-गुण और सब-गुण उच्च = दोष-निरस्त।
✦ उपाय
विष्णु-लक्ष्मी-पूजन।
सत्यनारायण-कथा।
सम्बन्धित-राशि-स्वामी-ग्रह की उपासना।
दान-धर्म।
कुम्भ-विवाह-संस्कार (तुलसी या वृक्ष से वर का प्रथम-विवाह)।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भकूट-दोष = विवाह-वर्जित?▼
नहीं। उपाय से समाधान। यदि नाड़ी-गुण उच्च और अन्य-दोष-नहीं, तो विवाह-स्वीकार्य।
कुम्भ-विवाह क्या?▼
दोष-वर का प्रथम-विवाह तुलसी/मिट्टी-कुम्भ से। फिर मनुष्य से। शास्त्र-स्वीकार्य।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।