कलश स्थापना विधि

नवरात्रि-गृहप्रवेश-विवाह में अनिवार्य

कलश

पीतल/तांबा

दिशा

ईशान-कोण

पंचरत्न

5 रत्न

कलश-स्थापना — पूजा का मुख्य-संस्कार। पीतल/तांबे का कलश पवित्र-जल + अन्य-सामग्री से भरा। देवताओं का प्रतीकात्मक-आसन। नवरात्रि-पूजा, गृह-प्रवेश, विवाह सब में अनिवार्य।

कलश-सामग्री

कलश: पीतल/तांबा/मिट्टी। नया श्रेष्ठ।

जल: गंगाजल या पवित्र-जल।

अन्य: सिक्का (चांदी/तांबे का), 5 आम के पत्ते, नारियल (फूटा-नहीं), दूब-घास, पंचरत्न (हीरा-मोती-माणिक्य-पन्ना-नीलम), सुगन्धित-पुष्प, चन्दन, अक्षत, हल्दी।

स्थापना-विधि

स्थान: ईशान-कोण। शुद्ध-वेदी।

कलश पर हल्दी-कुंकुम-स्वस्तिक-चिह्न।

कलश में जल-सिक्का-पंचरत्न-दूब डालें।

5 आम-पत्ते मुख पर रखें (किनारे बाहर)।

नारियल पत्तों के ऊपर। मौली बाँधें।

मन्त्र: "ॐ कलशाय नमः"।

फूल-धूप-दीप अर्पण।

9 दिन (नवरात्रि) निरन्तर। बाद में बहती-नदी में विसर्जन।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नारियल फूटा हो?

नहीं — पूरा-गोल नारियल चाहिए। दरारें/फूट = अशुभ। चयन सावधानी से।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।