कलश-स्थापना — पूजा का मुख्य-संस्कार। पीतल/तांबे का कलश पवित्र-जल + अन्य-सामग्री से भरा। देवताओं का प्रतीकात्मक-आसन। नवरात्रि-पूजा, गृह-प्रवेश, विवाह सब में अनिवार्य।
✦ कलश-सामग्री
कलश: पीतल/तांबा/मिट्टी। नया श्रेष्ठ।
जल: गंगाजल या पवित्र-जल।
अन्य: सिक्का (चांदी/तांबे का), 5 आम के पत्ते, नारियल (फूटा-नहीं), दूब-घास, पंचरत्न (हीरा-मोती-माणिक्य-पन्ना-नीलम), सुगन्धित-पुष्प, चन्दन, अक्षत, हल्दी।
✦ स्थापना-विधि
स्थान: ईशान-कोण। शुद्ध-वेदी।
कलश पर हल्दी-कुंकुम-स्वस्तिक-चिह्न।
कलश में जल-सिक्का-पंचरत्न-दूब डालें।
5 आम-पत्ते मुख पर रखें (किनारे बाहर)।
नारियल पत्तों के ऊपर। मौली बाँधें।
मन्त्र: "ॐ कलशाय नमः"।
फूल-धूप-दीप अर्पण।
9 दिन (नवरात्रि) निरन्तर। बाद में बहती-नदी में विसर्जन।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नारियल फूटा हो?▼
नहीं — पूरा-गोल नारियल चाहिए। दरारें/फूट = अशुभ। चयन सावधानी से।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।