भोग प्रसाद विधि

प्रत्येक देवता का प्रिय भोग अलग

गणेश

मोदक

लक्ष्मी

खीर

शिव

बेल-पत्र

भोग-प्रसाद — देवता को अर्पित-भोजन। पूजा का मुख्य-अंग। प्रत्येक-देवता का प्रिय-भोग अलग। पारम्परिक-नियम पालन से पूजा-फल बढ़ता।

देवता-वार-भोग

गणेश: मोदक, दूर्वा, गुड़।

लक्ष्मी: खीर, बताशा, कमल।

सरस्वती: दूध, गुड़, पीला-भोजन।

शिव: बेल-पत्र, धतूरा, भांग, दूध।

विष्णु: तुलसी, पंचामृत, खीर।

कृष्ण: माखन-मिश्री, पंजीरी।

दुर्गा: हलवा-पूड़ी-चना (कन्या-पूजन)।

हनुमान: गुड़-चना, बूँदी।

शनि: तेल-तिल।

सूर्य: गुड़-गेहूँ की रोटी।

भोग-नियम

स्वच्छ-स्थान पर बनायें।

स्नान-शुद्ध होकर।

मांस-मदिरा-प्याज-लहसुन वर्जित।

पहले देवता को अर्पित। फिर प्रसाद-वितरण।

तुलसी-पत्र विष्णु को (शिव को नहीं)।

दूर्वा-घास गणेश को (अन्य-को नहीं)।

थाली में 5 या 7 वस्तुएँ। सम-संख्या नहीं।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रसाद कब-तक रख सकते?

पूजा-समाप्ति पर तुरन्त-वितरण। सायं-तक स्वीकार्य। अगले-दिन वर्जित। बचा-प्रसाद गाय-कौवे को।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।