भोग-प्रसाद — देवता को अर्पित-भोजन। पूजा का मुख्य-अंग। प्रत्येक-देवता का प्रिय-भोग अलग। पारम्परिक-नियम पालन से पूजा-फल बढ़ता।
✦ देवता-वार-भोग
गणेश: मोदक, दूर्वा, गुड़।
लक्ष्मी: खीर, बताशा, कमल।
सरस्वती: दूध, गुड़, पीला-भोजन।
शिव: बेल-पत्र, धतूरा, भांग, दूध।
विष्णु: तुलसी, पंचामृत, खीर।
कृष्ण: माखन-मिश्री, पंजीरी।
दुर्गा: हलवा-पूड़ी-चना (कन्या-पूजन)।
हनुमान: गुड़-चना, बूँदी।
शनि: तेल-तिल।
सूर्य: गुड़-गेहूँ की रोटी।
✦ भोग-नियम
स्वच्छ-स्थान पर बनायें।
स्नान-शुद्ध होकर।
मांस-मदिरा-प्याज-लहसुन वर्जित।
पहले देवता को अर्पित। फिर प्रसाद-वितरण।
तुलसी-पत्र विष्णु को (शिव को नहीं)।
दूर्वा-घास गणेश को (अन्य-को नहीं)।
थाली में 5 या 7 वस्तुएँ। सम-संख्या नहीं।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रसाद कब-तक रख सकते?▼
पूजा-समाप्ति पर तुरन्त-वितरण। सायं-तक स्वीकार्य। अगले-दिन वर्जित। बचा-प्रसाद गाय-कौवे को।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।