श्री गणेश पूजा विधि

श्री गणेश पूजा विधि

विघ्नहर्ता गणपति की षोडशोपचार पूजा — १६ चरण

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श्री गणेश पूजा विधि परिचय

श्री गणेश पूजा प्रत्येक धार्मिक कार्य का प्रथम सोपान है। "श्री गणेशाय नमः" के बिना कोई कार्य प्रारम्भ नहीं किया जाता। गणेश पूजा गृहस्थ-जीवन में दैनिक भी की जा सकती है — बुधवार, चतुर्थी, गणेश चतुर्थी पर विशेष महत्व।

षोडशोपचार पूजा १६ उपचारों से सम्पन्न होती है — आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमनीय, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा। यह पूजा सरल है, परन्तु पूर्ण-फल देती है।

घर में मिट्टी की मूर्ति, रजत-धातु प्रतिमा, अथवा शुद्ध-यन्त्र की पूजा कर सकते हैं। प्रत्येक चरण के साथ संक्षिप्त मन्त्र — पूर्ण विधि के लिए नीचे का चरण-दर-चरण विवरण देखें।

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शुभ मुहूर्त एवं तिथियाँ

बुधवार (गणेश दिन), चतुर्थी तिथि (विशेष: संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी), गणेश चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी), गुरु पुष्य योग। प्रात:काल अथवा अभिजित मुहूर्त सर्वोत्तम। प्रदोष काल भी शुभ।

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पूजा सामग्री

1

श्री गणेश की प्रतिमा अथवा मूर्ति

2

पीला रेशमी वस्त्र

१ टुकड़ा

3

रोली / सिन्दूर / कुंकुम

थोड़ा-थोड़ा

4

चन्दन (श्वेत एवं लाल)

पेस्ट

5

अक्षत (हल्दी मिश्रित चावल)

१ कटोरी

6

दूर्वा (दूब घास) — अनिवार्य

२१ गाँठ

7

लाल पुष्प (गुड़हल / जपा)

२१

8

मोदक — गणेश का प्रिय भोग

२१

9

धूप एवं अगरबत्ती

समग्र

10

घी का दीपक

11

पंचामृत (दूध, दही, घी, मधु, शक्कर)

१ कटोरी

12

गंगाजल / शुद्ध जल

१ लोटा

13

पान, सुपारी, लौंग, इलायची

समग्र

14

नारियल

15

फल — केला, आम, सेब

मिश्रित

16

कलश — आम-पत्र एवं नारियल सहित

16 चरण विधि

1
🙏

संकल्प

(Sankalpa)

दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प लेकर अपना नाम, गोत्र, तिथि, स्थान बोलते हुए संकल्प लें — किस उद्देश्य से यह पूजा कर रहे हैं। फिर जल छोड़ें।

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः । अद्य …तिथौ … स्थाने श्री गणेश पूजनं अहं करिष्ये।

Om Vishnur Vishnur Vishnuh · Adya … tithau … sthane Shri Ganesha pujanam aham karishye

2
🪔

आवाहन

(Avahana)

गणेश जी का आवाहन करें — मन से उन्हें मूर्ति में आने का निमन्त्रण दें। हाथ जोड़कर ध्यान-मुद्रा में।

ॐ गं गणपतये नमः । आगच्छ देवदेवेश तेजोराशे जगत्पते।

Om Gam Ganapataye Namah · Aagachchha Devadevesha Tejorase Jagatpate

3
🪑

आसन

(Asana)

पुष्प एवं अक्षत मूर्ति के सामने अर्पण करते हुए आसन प्रदान करें।

ॐ गं गणपतये आसनं समर्पयामि।

Om Gam Ganapataye Aasanam Samarpayami

4
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पाद्य (चरण-धोवन)

(Padya)

पंचपात्र से जल लेकर मूर्ति के चरणों पर अर्पित करें।

ॐ गं गणपतये पादयोः पाद्यं समर्पयामि।

Om Gam Ganapataye Padayoh Padyam Samarpayami

5
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स्नान

(Snan)

पंचामृत स्नान — दूध, दही, घी, मधु, शक्कर एवं अन्त में शुद्ध जल से क्रमशः मूर्ति को स्नान कराएँ।

ॐ गं गणपतये स्नानं समर्पयामि।

Om Gam Ganapataye Snanam Samarpayami

6
👘

वस्त्र

(Vastra)

पीला रेशमी वस्त्र अर्पण करें।

ॐ गं गणपतये वस्त्रं समर्पयामि।

Om Gam Ganapataye Vastram Samarpayami

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गन्ध (चन्दन)

(Gandha)

श्वेत चन्दन ललाट पर एवं लाल चन्दन/सिन्दूर पूरे शरीर पर अर्पण करें। दूर्वा भी इसी समय अर्पित।

ॐ गं गणपतये गन्धं समर्पयामि।

Om Gam Ganapataye Gandham Samarpayami

8
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पुष्प

(Pushpa)

लाल पुष्प (विशेषतः गुड़हल) २१ संख्या में अर्पण करें। तुलसी पत्र गणेश-पूजा में वर्जित।

ॐ गं गणपतये पुष्पं समर्पयामि।

Om Gam Ganapataye Pushpam Samarpayami

9
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धूप

(Dhupa)

धूप अथवा अगरबत्ती जलाकर मूर्ति को घुमाएँ।

ॐ गं गणपतये धूपं समर्पयामि।

Om Gam Ganapataye Dhupam Samarpayami

10
🪔

दीप

(Deepa)

घी का दीपक जलाकर मूर्ति को दिखाएँ।

ॐ गं गणपतये दीपं समर्पयामि।

Om Gam Ganapataye Deepam Samarpayami

11
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नैवेद्य

(Naivedya)

मोदक (२१ संख्या), केला, गुड़, नारियल अर्पण करें। तुलसी रहित। फल-नैवेद्य के साथ जल भी अर्पित।

ॐ गं गणपतये नैवेद्यं समर्पयामि।

Om Gam Ganapataye Naivedyam Samarpayami

12
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ताम्बूल

(Tambula)

पान-सुपारी-लौंग-इलायची अर्पण करें।

ॐ गं गणपतये ताम्बूलं समर्पयामि।

Om Gam Ganapataye Tambulam Samarpayami

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दक्षिणा

(Dakshina)

दक्षिणा (शुभ-धन-राशि) मूर्ति के सम्मुख रखें — शास्त्रोक्त धन-दान।

ॐ गं गणपतये दक्षिणां समर्पयामि।

Om Gam Ganapataye Dakshinam Samarpayami

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मन्त्र जप

(Mantra-japa)

गणेश मूल मन्त्र "ॐ गं गणपतये नमः" का १०८ बार रुद्राक्ष-माला से जप। संकष्टी पर "वक्रतुण्ड महाकाय" स्तोत्र।

15
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आरती

(Aarti)

"सुखकर्ता दुखहर्ता" आरती गाएँ। दीप-थाली से ५ बार वामावर्त (बायें से दायें) घुमाएँ।

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प्रदक्षिणा एवं विसर्जन

(Pradakshina)

मूर्ति की ३ बार प्रदक्षिणा करें। दण्डवत् प्रणाम करें। पूजा के अन्त में भगवान् से पूजन की त्रुटियों के लिए क्षमा माँगें — "क्षमस्व" कहते हुए।

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नैवेद्य — प्रिय भोग

गणेश को सर्वाधिक प्रिय भोग है मोदक — विशेषतः उकडीचे मोदक (steamed)। २१ की संख्या में चढ़ाये जाते हैं। केला, नारियल, गुड़-चूर्ण, मलाई-बर्फी, लड्डू भी प्रिय। गणेश-पूजा में तुलसी पत्र वर्जित — पुराण-कथा अनुसार तुलसी ने गणेश को विवाह-प्रस्ताव दिया था जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया।

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आरती — समापन

"सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची"… यह मराठी आरती समर्थ रामदास द्वारा रचित — गणेश की समस्त आरतियों में सर्व-प्रसिद्ध। हिन्दी में "जय गणेश जय गणेश देवा" भी सर्व-प्रचलित। आरती के अन्त में दीप का प्रकाश सबको दिखाएँ — सबकी आँखों पर ले जाकर।

सावधानियाँ

गणेश पूजा में तुलसी पत्र कभी न चढ़ाएँ
टूटी अथवा खण्डित मूर्ति की पूजा न करें
पूजा से पूर्व स्नान आवश्यक — शुद्ध वस्त्र धारण
मूर्ति का मुख दक्षिण की ओर न रखें — पूर्व अथवा उत्तर शुभ
पूजा के समय मन में नकारात्मक विचार न लाएँ
मासिक धर्म वाली स्त्री प्रत्यक्ष पूजा न करे — मन से कर सकती है