सूतक काल — अर्थ, प्रकार एवं नियम

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सूतक काल — अर्थ, प्रकार एवं नियम

सूतक काल की स्पष्ट व्याख्या — ग्रहण, जन्म एवं कुल में मृत्यु पर पालन किए जाने वाले अशौच काल की शास्त्रीय आधारशिला, अवधि एवं व्यावहारिक आचार।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

सूतक (शाब्दिक "उत्तर-स्थिति") हिंदू परंपरा में तीन प्रकार की घटनाओं — ग्रहण, संतान-जन्म एवं कुल में मृत्यु — पर पालन किए जाने वाले अशौच का काल है। सूतक में कुछ नित्य धर्म-कार्य स्थगित रखे जाते हैं।

सूतक का प्रयोजन

दार्शनिक — खगोलीय (ग्रहण) अथवा जैविक (जन्म-मृत्यु) संक्रमण-क्षणों पर गृह की प्राण-ऊर्जा अस्थिर होती है; नित्य कर्म में विराम शरीर-मन को पुनः संतुलित करता है।

व्यावहारिक — जन्म एवं मृत्यु में प्राचीन काल में रक्त-आदि के सीधे संपर्क का खतरा था; धार्मिक एकांत स्वच्छता-संगरोध का काम भी करता था।

तीन प्रकार

ग्रहण-सूतक सूर्य ग्रहण: 12 घंटे पूर्व से ग्रहण समाप्ति। चंद्र ग्रहण: 9 घंटे पूर्व से ग्रहण समाप्ति। केवल वहाँ प्रवर्त्य जहाँ ग्रहण दृश्य हो।

जन्म-सूतक पैतृक सम्बन्धियों (सात पीढ़ी तक) के लिए परंपरागत 10 दिन। माता एवं शिशु का 40 दिन का सवा-मास विश्राम स्पष्ट शारीरिक-लाभ का है।

मरण-सूतक / पातक निकट पैतृक सम्बन्धियों के लिए परंपरागत 13 दिन। तेरहवें दिन शास्त्रीय श्राद्ध से काल का औपचारिक समापन।

स्थगित कार्य

  • मंदिर-दर्शन एवं मूर्ति-स्पर्श
  • देवार्पण हेतु भोजन निर्माण
  • दूसरों की मांगलिक क्रियाओं में सम्मिलित होना
  • नए वस्त्र-आभूषण, तिलक

निरंतर कार्य

  • नित्य व्यक्तिगत मंत्र-जप (मौन, मूर्ति-स्पर्श रहित)
  • पवित्र ग्रंथों का पाठ
  • स्नान, सामान्य गृह-कार्य
  • वृद्ध-रोगी-शिशु की सेवा सूतक से सर्वदा ऊपर है

समापन

स्नान, वस्त्र-परिवर्तन, संक्षिप्त शांति या नमस्कार के पश्चात् नित्य पूजा पुनः आरंभ। मरण-सूतक में 13वें दिन का विधिवत श्राद्ध।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सूतक माता-पक्ष पर भी लागू है?

शास्त्रीय सूतक मूलतः पितृ-गोत्र पर है। माता-पक्ष का आचार छोटा है तथा समुदाय-भेद से बदलता है।

क्या जन्म-सूतक में मैं कार्यालय जा सकता हूँ?

हाँ। सूतक मंदिर-गमन एवं देवार्पण को रोकता है, आजीविका को नहीं। कार्यालय का कार्य अप्रभावित है।

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