चंद्र ग्रहण — पारंपरिक नियम, क्या करें क्या न करें

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चंद्र ग्रहण — पारंपरिक नियम, क्या करें क्या न करें

चंद्र ग्रहण की शास्त्रीय आचार-संहिता — नौ-घंटे का सूतक काल, अनुशंसित मंत्र-जप एवं दान, वर्जित कार्य, तथा सूर्य ग्रहण से नियमों का अंतर।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को तब घटित होता है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। सूर्य ग्रहण के विपरीत यह खुली आँख से देखना सुरक्षित है तथा एक साथ पृथ्वी के पूरे रात्रि-पक्ष से दिखाई देता है।

चंद्र ग्रहण का सूतक

चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण आरंभ से नौ घंटे पूर्व प्रारंभ होकर ग्रहण समाप्ति पर समाप्त होता है। यह सूर्य ग्रहण के बारह घंटे से कम है क्योंकि चंद्रमा मन का कारक है तथा हल्के सूतक का संबंध हल्के ग्रह से है।

शुभ कार्य

  • **पूर्व-स्नान एवं ग्रहण-समाप्ति-स्नान** दोनों विहित।
  • **मंत्र-जप** — चंद्र-बीज मंत्र (ॐ सोम सोमाय नमः) एवं महामृत्युंजय।
  • **तुलसी या कुश** भोजन-जल में रखें।
  • **दान** — चांदी, चावल, श्वेत वस्त्र, चीनी, दूध — चंद्रमा से सम्बद्ध वस्तुएँ।
  • **पाठ** — गीता, सुंदरकांड, विष्णु सहस्रनाम का पाठ इस चिंतनशील काल में अनुकूल माना गया है।

वर्जित कार्य

ताज़ा भोजन पकाना-खाना; ग्रहण-काल में निद्रा; काटना-सिलना अथवा नया व्यवसाय आरंभ करना; मूर्ति-पूजा।

जब ग्रहण स्थानीय रूप से दृश्य न हो

अधिकांश आचार्यों का मत है कि सूतक तभी प्रवर्त्य है जब ग्रहण आपके स्थान से दृश्य हो। विश्वसनीय पंचांग प्रत्येक नगर हेतु दृश्यता प्रकाशित करते हैं।

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पारंपरिक सलाह — विश्राम, तीक्ष्ण उपकरणों से दूरी, ग्रहणोत्तर स्नान — कोमल एवं निरापद है।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यदि ग्रहण मेरे नगर से दृश्य न हो तो क्या सूतक माना जाएगा?

अधिकांश आचार्यों के अनुसार नहीं। सूतक तभी प्रवर्त्य है जहाँ ग्रहण दृश्य हो। अपने स्थान की दृश्यता के लिए विश्वसनीय पंचांग देखें।

चंद्र सूतक सौर सूतक से छोटा क्यों है?

शास्त्रीय कारण: सूर्य आत्मा का तथा चंद्र मन का कारक है; भारी सूतक भारी कारक के साथ जुड़ता है। व्यावहारिक रूप से चंद्र ग्रहण अधिक बारंबार एवं कोमल घटना है।

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