चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को तब घटित होता है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। सूर्य ग्रहण के विपरीत यह खुली आँख से देखना सुरक्षित है तथा एक साथ पृथ्वी के पूरे रात्रि-पक्ष से दिखाई देता है।
✦ चंद्र ग्रहण का सूतक
चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण आरंभ से नौ घंटे पूर्व प्रारंभ होकर ग्रहण समाप्ति पर समाप्त होता है। यह सूर्य ग्रहण के बारह घंटे से कम है क्योंकि चंद्रमा मन का कारक है तथा हल्के सूतक का संबंध हल्के ग्रह से है।
✦ शुभ कार्य
- ✦**पूर्व-स्नान एवं ग्रहण-समाप्ति-स्नान** दोनों विहित।
- ✦**मंत्र-जप** — चंद्र-बीज मंत्र (ॐ सोम सोमाय नमः) एवं महामृत्युंजय।
- ✦**तुलसी या कुश** भोजन-जल में रखें।
- ✦**दान** — चांदी, चावल, श्वेत वस्त्र, चीनी, दूध — चंद्रमा से सम्बद्ध वस्तुएँ।
- ✦**पाठ** — गीता, सुंदरकांड, विष्णु सहस्रनाम का पाठ इस चिंतनशील काल में अनुकूल माना गया है।
✦ वर्जित कार्य
ताज़ा भोजन पकाना-खाना; ग्रहण-काल में निद्रा; काटना-सिलना अथवा नया व्यवसाय आरंभ करना; मूर्ति-पूजा।
✦ जब ग्रहण स्थानीय रूप से दृश्य न हो
अधिकांश आचार्यों का मत है कि सूतक तभी प्रवर्त्य है जब ग्रहण आपके स्थान से दृश्य हो। विश्वसनीय पंचांग प्रत्येक नगर हेतु दृश्यता प्रकाशित करते हैं।
✦ गर्भवती स्त्रियाँ
पारंपरिक सलाह — विश्राम, तीक्ष्ण उपकरणों से दूरी, ग्रहणोत्तर स्नान — कोमल एवं निरापद है।