पोंगल चार-दिवसीय तमिल हार्वेस्ट पर्व, तमिल मास माघरगज़ी के अंतिम दिवस (सामान्यतः 13 जनवरी) से आरंभ होकर थाई मास के प्रथम तीन दिनों तक। यह भारत के सर्वाधिक प्राचीन निरंतर-पालित पर्वों में से, संगम-युग की कविता (आरंभिक शताब्दी ई.) में उल्लिखित।
✦ शब्द
तमिल में पोंगल का शाब्दिक अर्थ "उबाल आना" अथवा "उमड़ना"। पर्व का केन्द्रीय व्यंजन — पोंगल — मीठे चावल-दूध की तैयारी है जिसे पात्र-रिम के ऊपर उबलकर बहने दिया जाता है (बल्कि प्रोत्साहित किया जाता है), उमड़ ही प्रचुरता का चिह्न। क्रिया एवं नाम अविभाज्य हैं।
✦ चार दिवस
प्रथम — भोगी पोंगल की पूर्व-संध्या। गृह पुराने, अनुपयोगी वस्तुओं को निकालता, साफ़ करता है। प्रातः-पूर्व आँगन अथवा गली में अग्नि-कुंड, वस्तुएँ अग्नि में अर्पित — शाब्दिक "पुराने का दहन"। दीवारें श्वेत-ली; पशु-कक्ष स्वच्छ। दिवस व्यावहारिक तैयारी, परंतु सांकेतिक भी: हार्वेस्ट स्वच्छ गृह में प्रवेश करता है।
द्वितीय — थाई पोंगल (सूर्य पोंगल) मुख्य दिवस। प्रात: में परिवार आँगन में मिट्टी का पात्र, प्रायः लघु काष्ठ-अग्नि पर। वर्ष की ताज़ा हार्वेस्ट से चावल, ताज़ा दूध, गुड़, इलायची, काजू परंपरागत क्रम में। मिश्रण उबलने एवं उठने पर परिवार "पोंगलो पोंगल!" का उद्घोष करता है, उमड़ का स्वागत। प्रथम भाग सूर्य को अर्पित (जिनका यह दिवस है, उत्तर के समान खगोलीय संक्रान्ति को चिह्नित करता)। शेष परिवार, पड़ोसी, वृद्ध, निर्धन एवं पशुओं में वितरित।
तृतीय — मट्टू पोंगल पशुओं का दिवस (तमिल में मट्टू)। पशुओं को स्नान, सींगों पर चित्रकारी, पुष्प-मालाएँ एवं छोटी घंटियाँ। उन्हें विशेष पोंगल खिलाया जाता है। कुछ ग्रामों में जल्लीकट्टू (विवादित परंपरा) इसी दिन। दिवस कृषक-परिवार के प्रमुख सहयोगी पशु का सम्मान।
चतुर्थ — कानूम पोंगल कानूम का अर्थ "देखना"। यह परिवार-यात्रा का दिवस, सम्बन्धियों को देखने का। बहनें परंपरागत रूप से भाइयों के कल्याण की प्रार्थना एवं उन्हें खिलाना। वरिष्ठ सम्बन्धी सम्मानित। पर्व परिवार-बंधन के स्पष्ट नवीकरण से समाप्त।
✦ पोंगल पकाने की विधि
पकाना ही केन्द्र है, केवल भोजन नहीं:
- ✦पात्र **सदा नया**, हल्दी-लेप एवं ताज़ा सूत्र से सज्जित।
- ✦अग्नि **काष्ठ-दहन** (आम अथवा चन्दन की लकड़ी)।
- ✦पात्र **पूर्व-मुख**, पाककार पूर्व-मुख।
- ✦पोंगल उबलने पर प्रथम शब्द — "पोंगलो पोंगल!" — कभी मौन उमड़ नहीं।
कर्म कृषि एवं धर्म को मिलाता है: गृह का वर्ष की चावल-हार्वेस्ट से प्रथम भोजन सार्वजनिक, साक्षी, आनन्दपूर्ण उमड़।
✦ पोंगल एवं संक्रान्ति
पोंगल मकर संक्रान्ति से संगत है तथा खगोलीय आधार साझा करता है — सूर्य का मकर-प्रवेश। परंतु पोंगल का बल भिन्न है। उत्तर में संक्रान्ति मूलतः एक-दिवसीय खगोलीय पर्व, क्षेत्रीय अलंकरणों सहित (पतंगें, तिल-गुड़, नदी-स्नान)। दक्षिण में पोंगल चार-दिवसीय कृषि-पर्व संरचित लय सहित — पुराना दहन करो, सूर्य के साथ हार्वेस्ट करो, पशुओं का सम्मान, परिवार-दर्शन। दोनों समान खगोलीय क्षण की वैध अभिव्यक्तियाँ। दक्षिणी स्वरूप प्राचीनतर तथा कृषि के वास्तविक अनुभव में अधिक जड़।