मकर संक्रान्ति — सूर्य का उत्तरायण

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मकर संक्रान्ति — सूर्य का उत्तरायण

मध्य-जनवरी का पर्व जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश — उत्तरायण के आरंभ — को चिह्नित करता है। खगोलीय घटना, क्षेत्रीय नाम (पोंगल, लोहड़ी, माघ बिहू, उत्तरायण), तिल-गुड़ परंपरा, तथा पतंग-उत्सव।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

मकर संक्रान्ति तब आती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। अधिकांश हिंदू पर्वों के विपरीत — जो चंद्र-कैलेंडर का अनुसरण करते हैं — संक्रान्ति सौर-कैलेंडर पर आधारित है, अतः ग्रेगोरियन-तिथि निश्चित-सी रहती है, सामान्यतः 14 जनवरी (कभी-कभी 15 जनवरी)।

संक्रान्ति क्या?

शब्द संक्रान्ति का अर्थ है "सूर्य का संक्रमण" — जिस क्षण सूर्य एक राशि से अगली में जाता है। वर्ष में बारह संक्रान्तियाँ होती हैं। मकर संक्रान्ति — मकर में सूर्य-प्रवेश — सर्वाधिक मनाई जाती है क्योंकि यह उत्तरायण — सूर्य की छह-मासीय उत्तर-यात्रा — का आरंभ है।

खगोलीय सूत्र

शास्त्रीय भारतीय खगोल में उत्तरायण (उत्तर-पथ) एवं दक्षिणायन (दक्षिण-पथ) वर्ष को दो भागों में बाँटते हैं। मूलतः ये क्रमशः शीत-संक्रान्ति एवं ग्रीष्म-संक्रान्ति से संरेखित थे। विषुव-अग्रसरण के कारण वास्तविक शीत-संक्रान्ति अब 22 दिसम्बर है — आधुनिक संक्रान्ति-तिथि से लगभग तीन सप्ताह पूर्व। भारतीय खगोलीय परंपरा सायन (उष्ण-कटिबन्धीय) एवं निरयन (सिद्धान्तिक, ताराओं से बद्ध) — दोनों पद्धतियाँ रखती है, संक्रान्ति निरयन का अनुसरण करती है।

क्षेत्रीय नाम

समान खगोलीय घटना अनेक नामों में पालित:

  • **मकर संक्रान्ति** — उत्तर भारत, महाराष्ट्र
  • **पोंगल** — तमिलनाडु (चार-दिवसीय)
  • **लोहड़ी** — पंजाब (पिछली संध्या, 13 जनवरी)
  • **माघ बिहू / भोगाली बिहू** — असम
  • **उत्तरायन** — गुजरात (पतंग-पर्व प्रसिद्ध)
  • **खिचड़ी** — बिहार, उ.प्र.
  • **माघी** — पंजाब-हरियाणा के भाग
  • **पौष संक्रान्ति** — बंगाल

नाम भिन्न; तिथि लगभग एक; अंतर्निहित अर्थ — सूर्य की वापसी का आरंभ — साझा।

क्रिया

तिल-गुड़ पर्व का चिह्न-भोजन। दोनों माघ की शीत के लिए शास्त्रीय रूप से उष्ण; दोनों लोह एवं ऊर्जा से सम्पन्न जब कृषि-श्रम तीव्र होता है। महाराष्ट्र में अभिवादन "तिल-गुड़ ध्या, गोड़-गोड़ बोला"। तिल-गुड़ लड्डू एवं चिक्की बनाई एवं साझा की जाती है।

स्नान — सूर्योदय पर नदी अथवा पवित्र जल में। प्रयाग, गंगा सागर, त्रिवेणी एवं हरिद्वार में बड़े स्नान-पर्व।

दान — खिचड़ी-भोजन, गर्म वस्त्र, कम्बल, तिल, गुड़, ताज़ा कृषि-उत्पाद। संक्रान्ति हिंदू कैलेंडर के बड़े दान-दिवसों में से।

पतंग-उड़ान — गुजरात (अहमदाबाद का उत्तरायन पतंग-पर्व) में सबसे विशाल, परंतु राजस्थान, पंजाब, उ.प्र. के भागों में भी व्यापक। पतंगें सूर्य की उत्तर-यात्रा का रूपक हैं।

गौ-सज्जा — विशेषतः तमिलनाडु के पोंगल में, जहाँ चार दिनों में से एक (मट्टु पोंगल) गौ-सम्मान को।

संदेश

संक्रान्ति मोड़-दिवस है। सूर्य पथ बदलता है; कृषि-चक्र मुड़ता है; मौसम (सप्ताहों में) उष्ण होने लगेगा। पर्व का तेज उत्सव-पूर्ण है, परंतु अंतर्भाव स्वीकार है: वर्ष समतल नहीं, वक्र है, तथा वक्र के मोड़-बिंदु चिह्न के योग्य हैं।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर संक्रान्ति 14 जनवरी पर ही क्यों नहीं पड़ती?

यह वास्तविक क्षण पर निर्भर करता है जब सूर्य मकर के सिडेरियल राशि में प्रवेश करता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर प्रत्येक चार वर्ष में लीप-दिवस जोड़ता है तथा सिडेरियल वर्ष 365.25 दिन से थोड़ा बड़ा है — अतः धीमी प्रवृत्ति। कुछ दशकों में एक बार संक्रान्ति 15 जनवरी पर खिसक जाती है।

तिल-गुड़ चिह्न-भोजन क्यों?

तिल लोह-समृद्ध एवं उष्ण; गुड़ ऊर्जा-घन एवं उष्ण। दोनों ही शरीर की मध्य-जनवरी की शीत एवं भारी शीत-कालीन कृषि-कार्य की आवश्यकता हैं। शास्त्रीय भोजन-चयन ऋतु-चिकित्सा भी है।

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