मकर संक्रान्ति तब आती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। अधिकांश हिंदू पर्वों के विपरीत — जो चंद्र-कैलेंडर का अनुसरण करते हैं — संक्रान्ति सौर-कैलेंडर पर आधारित है, अतः ग्रेगोरियन-तिथि निश्चित-सी रहती है, सामान्यतः 14 जनवरी (कभी-कभी 15 जनवरी)।
✦ संक्रान्ति क्या?
शब्द संक्रान्ति का अर्थ है "सूर्य का संक्रमण" — जिस क्षण सूर्य एक राशि से अगली में जाता है। वर्ष में बारह संक्रान्तियाँ होती हैं। मकर संक्रान्ति — मकर में सूर्य-प्रवेश — सर्वाधिक मनाई जाती है क्योंकि यह उत्तरायण — सूर्य की छह-मासीय उत्तर-यात्रा — का आरंभ है।
✦ खगोलीय सूत्र
शास्त्रीय भारतीय खगोल में उत्तरायण (उत्तर-पथ) एवं दक्षिणायन (दक्षिण-पथ) वर्ष को दो भागों में बाँटते हैं। मूलतः ये क्रमशः शीत-संक्रान्ति एवं ग्रीष्म-संक्रान्ति से संरेखित थे। विषुव-अग्रसरण के कारण वास्तविक शीत-संक्रान्ति अब 22 दिसम्बर है — आधुनिक संक्रान्ति-तिथि से लगभग तीन सप्ताह पूर्व। भारतीय खगोलीय परंपरा सायन (उष्ण-कटिबन्धीय) एवं निरयन (सिद्धान्तिक, ताराओं से बद्ध) — दोनों पद्धतियाँ रखती है, संक्रान्ति निरयन का अनुसरण करती है।
✦ क्षेत्रीय नाम
समान खगोलीय घटना अनेक नामों में पालित:
- ✦**मकर संक्रान्ति** — उत्तर भारत, महाराष्ट्र
- ✦**पोंगल** — तमिलनाडु (चार-दिवसीय)
- ✦**लोहड़ी** — पंजाब (पिछली संध्या, 13 जनवरी)
- ✦**माघ बिहू / भोगाली बिहू** — असम
- ✦**उत्तरायन** — गुजरात (पतंग-पर्व प्रसिद्ध)
- ✦**खिचड़ी** — बिहार, उ.प्र.
- ✦**माघी** — पंजाब-हरियाणा के भाग
- ✦**पौष संक्रान्ति** — बंगाल
नाम भिन्न; तिथि लगभग एक; अंतर्निहित अर्थ — सूर्य की वापसी का आरंभ — साझा।
✦ क्रिया
तिल-गुड़ पर्व का चिह्न-भोजन। दोनों माघ की शीत के लिए शास्त्रीय रूप से उष्ण; दोनों लोह एवं ऊर्जा से सम्पन्न जब कृषि-श्रम तीव्र होता है। महाराष्ट्र में अभिवादन "तिल-गुड़ ध्या, गोड़-गोड़ बोला"। तिल-गुड़ लड्डू एवं चिक्की बनाई एवं साझा की जाती है।
स्नान — सूर्योदय पर नदी अथवा पवित्र जल में। प्रयाग, गंगा सागर, त्रिवेणी एवं हरिद्वार में बड़े स्नान-पर्व।
दान — खिचड़ी-भोजन, गर्म वस्त्र, कम्बल, तिल, गुड़, ताज़ा कृषि-उत्पाद। संक्रान्ति हिंदू कैलेंडर के बड़े दान-दिवसों में से।
पतंग-उड़ान — गुजरात (अहमदाबाद का उत्तरायन पतंग-पर्व) में सबसे विशाल, परंतु राजस्थान, पंजाब, उ.प्र. के भागों में भी व्यापक। पतंगें सूर्य की उत्तर-यात्रा का रूपक हैं।
गौ-सज्जा — विशेषतः तमिलनाडु के पोंगल में, जहाँ चार दिनों में से एक (मट्टु पोंगल) गौ-सम्मान को।
✦ संदेश
संक्रान्ति मोड़-दिवस है। सूर्य पथ बदलता है; कृषि-चक्र मुड़ता है; मौसम (सप्ताहों में) उष्ण होने लगेगा। पर्व का तेज उत्सव-पूर्ण है, परंतु अंतर्भाव स्वीकार है: वर्ष समतल नहीं, वक्र है, तथा वक्र के मोड़-बिंदु चिह्न के योग्य हैं।