ओणम — केरल का दस-दिवसीय हार्वेस्ट पर्व

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ओणम — केरल का दस-दिवसीय हार्वेस्ट पर्व

महाराजा बलि के पुनरागमन का स्मरण-पर्व, मलयालम कैलेंडर का दस-दिवसीय उत्सव — पौराणिक वंश, पूकलम पुष्प-चित्र, सद्या भोज, वल्लम काली नौका-दौड़, तथा हिंदू कैलेंडर में ओणम की विशिष्टता।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

ओणम केरल का प्रमुख हार्वेस्ट पर्व, मलयालम मास चिंगम (अगस्त-सितम्बर) में अतम नक्षत्र के दिवस से आरंभ होकर तिरुवोनम पर समाप्त होनेवाला दस-दिवसीय उत्सव। यह हिंदू कैलेंडर के सर्वाधिक विशिष्ट पर्वों में से — जिसका भाव अद्वितीय एवं पूज्य-वस्तु असामान्य है।

महाराजा बलि की कथा

पर्व राजा बलि (महाबलि) के वार्षिक पुनरागमन का स्मरण है। भागवत पुराण: महाबलि उदार एवं शक्तिशाली असुर-राजा थे जिनका त्रिलोक-शासन इतना न्यायपूर्ण था कि देव स्वयं विचलित हो गए। विष्णु ने वामन (बौने) अवतार में महाबलि के पास तीन पग भूमि की प्रार्थना। दानशीलता के व्रत में अटल महाबलि ने स्वीकार किया। वामन ने ब्रह्माण्डिक रूप धारण कर एक पग में पृथ्वी, द्वितीय में स्वर्ग ढके, तृतीय कहाँ रखें — पूछा। महाबलि ने पहचानकर, वचन-भंग करने की इच्छा न रखते हुए, अपना ही मस्तक प्रस्तुत किया। वामन ने तृतीय पग से उन्हें कोमलता से पाताल में दबा दिया।

परंतु विष्णु ने महाबलि को वर भी दिया: वर्ष में एक बार वे अपनी प्रजा से मिलने आ सकते हैं। ओणम महाबलि के घर आने का दिवस है।

विलोमता

अधिकांश हिंदू पर्व देवों, अवतारों, धर्म-व्यवस्था का उत्सव हैं। ओणम असामान्य है: यह असुर-राजा का उत्सव है — अवतार से पराजित। मलयालम लोक-परंपरा भावुक नहीं है: महाबलि का शासन स्वर्ण-युग के रूप में स्मरित, बाद के समय से अधिक न्यायपूर्ण, तथा उनका वार्षिक प्रत्यागमन निष्कासित प्रिय शासक के प्रति स्नेह से व्यवहारित। अधिकांश ओणम-गीत — "मवेलिनाडु वनिडुम कालम" ("जब महाबलि शासन करते थे") — कोई दुःख नहीं, कोई चोरी नहीं, कोई जाति नहीं, कोई कपट नहीं।

दस दिवस

पर्व चिंगम की दैनिक नक्षत्रों के चारों ओर संरचित — अतम (दिवस 1, जब आँगन में पूकलम — पुष्प-चित्र — आरंभ) से तिरुवोनम (दिवस 10, मुख्य भोज-दिवस) तक। पूकलम प्रत्येक दिन बढ़ता है, नवीन पंक्तियाँ एवं रंग, तिरुवोनम पर अपने विशालतम रूप तक।

ओणम की विशिष्टताएँ

पूकलम — ओणम का चिह्न-दृश्य प्रत्येक गृह के द्वार पर दैनिक पुष्प-चित्र। अतम पर लघु, दस दिवसों में विस्तृत संकेन्द्रित प्रतिमानों में बढ़ता। गेंदा, इक्सोरा, गुड़हल, गुलमोहर — जो पुष्प गृह संग्रह कर सके। पूकलम महाबलि का स्वागत है।

सद्या — ओणम सद्या पर्व का व्यंजन-केन्द्र। केले के पत्ते पर परोसा गया, परंपरागत रूप से 26-30 शाकाहारी व्यंजन, प्रत्येक पत्ते पर निश्चित स्थान पर। केन्द्र में चावल; अचार, चटनियाँ, थोरन, कालन, ओलन, अवियल, सम्भार, रसम, पायसम — अपने निश्चित स्थानों पर। प्रथम मौन में, द्वितीय चावल-परिवेषण के पश्चात् वार्तालाप।

वल्लम काली — प्रसिद्ध सर्प-नौका दौड़ें, विशेषतः अलप्पुझा का नेहरू ट्रॉफी, ओणम-काल में। लम्बी, नीची नौकाएँ, सौ तक चालक, ढोल-लय पर दौड़ती।

पुलिकलि — "व्याघ्र-नृत्य" — व्याघ्र-चीते के रूप में चित्रित नर्तक गलियों में नृत्य। थ्रिशूर से सर्वाधिक सम्बद्ध।

तिरुवोनम सद्या — महाबलि-भोज। परंपरा प्रत्येक गृह से, चाहे निर्धन हो, तिरुवोनम पर कम-से-कम मूल सद्या परोसने की अपेक्षा करती है — महाबलि का प्रत्यागमन उनकी प्रजा के पटल बिना अधूरा।

स्वागत पर सूत्र

ओणम केरल के सभी निवासियों — हिंदू, ईसाई, मुस्लिम — द्वारा राज्य भर में एवं डायस्पोरा में मनाया जाता है। यह हिंदू कैलेंडर में अद्वितीय है क्योंकि यह हिंदू-पर्व होने से पूर्व केरल-पर्व है। कथा भागवत पुराण की है परंतु उत्सव मलयालम-भूमि का।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदू पर्व में असुर-राजा का उत्सव क्यों?

हिंदू कथा-परंपरा सदा महान असुरों एवं जटिल नैतिक चित्रों को स्थान देती आई है। भागवत में महाबलि स्पष्ट रूप से धार्मिक हैं — उदार, न्यायपूर्ण, भक्त। उनकी पराजय इसलिए नहीं कि वे दुष्ट थे, बल्कि इसलिए कि ब्रह्माण्डिक व्यवस्था को पुनर्संयोजन चाहिए था। पर्व उनकी सत्यनिष्ठा को सम्मानित करता है, उनकी प्रजाति को नहीं।

क्या एक सामान्य गृह 26-व्यंजन सद्या वहन कर सकता है?

अधिकांश आधुनिक गृह 8–12 व्यंजनों की सरलीकृत सद्या परोसते हैं, जो घर में बनाने एवं साझा करने पर पहुँच में है। शास्त्रीय 26-व्यंजन स्वरूप आकांक्षा है, आवश्यकता नहीं। पर्व का भाव केले के पत्ते पर साथ भोजन में है, व्यंजन-संख्या में नहीं।

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