पितृ पक्ष एवं श्राद्ध — व्यावहारिक मार्गदर्शिका

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पितृ पक्ष एवं श्राद्ध — व्यावहारिक मार्गदर्शिका

सोलह-दिवसीय पितृ पक्ष का प्रयोजन, दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्राद्ध-तर्पण-विधि, गृहस्थ द्वारा निष्पन्न करने योग्य सरल आचार एवं भाद्रपद कृष्ण पक्ष से तिथियों का निर्धारण।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

पितृ पक्ष — "पूर्वजों का पक्ष" — भाद्रपद का कृष्ण पक्ष, दिवंगत पूर्वजों के सम्मान हेतु निर्धारित सोलह तिथियाँ। यह सर्वाधिक प्राचीन निरंतर-पालित हिंदू प्रथाओं में से है, मनुस्मृति एवं मार्कण्डेय पुराण में स्पष्ट उल्लेख सहित।

तिथियाँ

पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से प्रारंभ होकर भाद्रपद अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) पर समाप्त होता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में सामान्यतः सितम्बर–अक्टूबर।

मूल भाव

हिंदू परंपरा प्रत्येक व्यक्ति पर तीन ऋण मानती है — देव-ऋण, ऋषि-ऋण, पितृ-ऋण। पितृ पक्ष तीसरे का औपचारिक अवसर है — उन सबके स्मरण का जिनके जीवन ने अपना संभव बनाया।

तिथिगत श्राद्ध

दिवंगत स्वजन का श्राद्ध उस तिथि पर निष्पन्न होता है जिस पर उनका देहांत हुआ था। तिथि अज्ञात हो तो सर्वपितृ अमावस्या समस्त पूर्वजों के लिए सार्वभौम दिवस है।

सरल गृहस्थ-श्राद्ध

पुरोहित-सहित विस्तृत श्राद्ध आदर्श है। जहाँ वह संभव न हो, गृहस्थ-स्वरूप भी मूल भाव बनाए रखता है:

  1. 1**प्रात:स्नान**, स्वच्छ सूती श्वेत वस्त्र।
  2. 2**तर्पण** — काले तिल एवं चावल-सहित जलधारा दक्षिण दिशा में अर्पित करें (दक्षिण पितृ-दिशा); प्रत्येक स्मरित पूर्वज का नाम लें।
  3. 3**भोजन-अर्पण** — खीर अथवा दिवंगत के प्रिय व्यंजन सहित शाकाहारी भोजन; एक भाग आँगन में काक-बलि हेतु, एक गौ-ग्रास, एक भाग संन्यासी-अतिथि हेतु।
  4. 4**ब्राह्मण अथवा सत्पात्र-भोजन** — पूर्ण आदर सहित एक व्यक्ति को भोजन कराना अनुष्ठान का हृदय है।
  5. 5**दान** — पूर्वज के नाम से लघु दान।

वर्जित

नवारंभ, विवाह, गृहप्रवेश, नवीन वाहन-क्रय इस पक्ष में टाले जाते हैं। पक्ष अंतर्मुख स्मरण के लिए है, बहिर्मुख आरंभ के लिए नहीं।

भाव

पितृ पक्ष असंतुष्ट प्रेतों के तुष्टीकरण का नहीं, संरचित स्मरण-साधना का अवसर है — वर्ष-दर-वर्ष, उन सबके स्मरण के लिए जो पूर्व आए, तथा यह स्वीकार के लिए कि अपना जीवन उनके जीवन की निरंतरता है।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यदि मुझे पूर्वज की मृत्यु-तिथि ज्ञात न हो?

सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करें — पितृ पक्ष का अंतिम दिवस — जो सभी ऐसे पूर्वजों के लिए सार्वभौम दिवस है जिनकी तिथि अज्ञात हो।

क्या स्त्रियाँ श्राद्ध कर सकती हैं?

हाँ। शास्त्रीय एवं आधुनिक दोनों आचार स्त्रियों द्वारा श्राद्ध-निष्पादन को मान्य करते हैं। रामायण में सीता दशरथ का श्राद्ध करती हैं।

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॥ ॐ शुभं भवतु ॥