मौनी अमावस्या — मौन की अमावस्या

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मौनी अमावस्या — मौन की अमावस्या

माघ अमावस्या — मौन, उपवास एवं प्रात:कालीन नदी-स्नान का पर्व। प्रयाग कुम्भ एवं माघ मेले के प्रमुख स्नान-दिवसों में से एक।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

मौनी अमावस्या माघ मास की अमावस्या है (ग्रेगोरियन में जनवरी-अंत से फरवरी-मध्य)। नाम मौन + अमावस्या से बना है। यह माघ मेला एवं प्रयागराज कुम्भ का प्रमुख स्नान-दिवस है।

मौन क्यों?

मन का अपना गुरुत्व-चक्र — अमावस्या पर ज्वार-भाटे पर चंद्र-खिंचाव चरम पर, रात्रि अंधतम, अनेक संस्कृतियाँ इसे चक्र का निम्न-ऊर्जा बिंदु मानती हैं। इस दिन का मौन प्रकृति के मौन से मेल खाता है।

वाणी सूक्ष्मतम कर्म है — एक दिन का मौन दिखाता है कि सामान्य वाणी कितनी अशांत है — अनावश्यक, पुनरावृत्त, प्रदर्शनात्मक। कुछ घंटों का मौन भी दर्पण बन जाता है।

माघ मनु-मुनि से सम्बद्ध है — मौनी का व्युत्पत्तिक संबंध मुनि शब्द से है। इस दिन का मुनि-व्रत मुनि के मौन को आदर्श बनाता है।

विधि

  1. 1**प्रात:पूर्व-स्नान** — सूर्योदय से पूर्व नदी अथवा पवित्र जल में स्नान। प्रयाग में त्रिवेणी-स्नान; अन्यत्र गंगाजल-छिड़क सहित स्वच्छ जल पर्याप्त।
  2. 2**मौन** — प्रात: से दोपहर तक, अथवा यथासम्भव अधिक। सुरक्षा-सेवा हेतु आवश्यक वाणी अनुमत; अनावश्यक वार्तालाप, सामाजिक माध्यम, दूरदर्शन स्थगित।
  3. 3**मंत्र-जप** — मौन मंत्र-जप; गायत्री मंत्र (108 आवृत्ति) सामान्य चयन।
  4. 4**उपवास या सात्विक भोजन** — दिन भर का व्रत, संध्या में सात्विक भोजन से पारणा। जहाँ संभव न हो, दोपहर का एकल लघु भोजन।
  5. 5**दान** — काले तिल, गर्म वस्त्र (माघ शीत-काल), अन्न।

व्यावहारिक सूत्र

यदि पूर्ण-दिन मौन परिस्थिति के अनुकूल न हो, प्रात:काल का 90-मिनट का मौन — फोन बंद, वाणी विराम, मंत्र-जप अथवा मौन-आसन — पर्व का भाव सहेजता है।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मौनी अमावस्या को कार्यालय जा सकते हैं?

हाँ। अधिकांश व्रती दोपहर तक ही मौन रखते हैं तथा फिर सामान्य कार्य प्रारंभ। कुछ अवकाश लेकर मौन बढ़ाते हैं, परंतु गृहस्थ हेतु अर्ध-दिवस का आचार शास्त्रीय मानक है।

मौन आध्यात्मिक क्यों माना गया है?

मौन मन की मूल अशांति को प्रकट करता है, जो सामान्यतः वाणी के शोर में छुप जाती है। कुछ घंटों का मौन साधक को दिखाता है कि उसके शब्दों के नीचे वास्तव में क्या हो रहा है — किसी भी चिंतन-साधना का प्रथम पद।

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