दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन: धन के लिए संपूर्ण विधि

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दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन: धन के लिए संपूर्ण विधि

दीपावली लक्ष्मी पूजा विधि चरण-दर-चरण — सामग्री, मन्त्र, समय, गलतियाँ, क्यों कार्य करती।

2026-05-01

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

दीपावली (दीपावली) लक्ष्मी-पूजन की सर्वाधिक-शुभ रात्रि। परम्परा — लक्ष्मी उन्हीं घरों में आतीं जो स्वच्छ, प्रकाशमय हों और अमावस्या-रात्रि सही-पूजा हो।

2026 में कब

दीपावली 2026 — रविवार, 8 नवम्बर 2026। लक्ष्मी-पूजन-मुहूर्त: 6:30 PM – 8:45 PM (प्रदोष-काल + स्थिर-लग्न)।

अमावस्या पर लक्ष्मी क्यों?

अमावस्या सामान्यतः अशुभ — किन्तु दीपावली-अमावस्या अपवाद: - लक्ष्मी समुद्र-मन्थन से उत्पन्न - दीपावली-रात्रि विष्णु से विवाह - विशेष-इस-रात्रि भक्तों को आशीर्वाद देने पृथ्वी पर

सामग्री

प्रतिमा/चित्र - लक्ष्मी (महालक्ष्मी या धनलक्ष्मी) - गणेश (अनिवार्य — प्रथम-पूजा) - सरस्वती (वैकल्पिक किन्तु अनुशंसित) - कुबेर (कोषाध्यक्ष)

पूजा-सामग्री 1. चौकी 2. लाल-वस्त्र 3. कलश + जल + सिक्का + आम-पत्ते + नारियल 4. अक्षत (कुमकुम-मिश्रित चावल) 5. रोली, कुमकुम, चन्दन 6. पुष्प (कमल, गेन्दा, गुलाब) 7. माला (गेन्दा + गुलाब) 8. अगरबत्ती (चन्दन, गुलाब) 9. कपूर + दीया (न्यूनतम 5 बत्ती) 10. पंचामृत (दूध+दही+घी+शहद+शक्कर) 11. नैवेद्य (5 मिठाई, 5 फल) 12. नया-झाडू (लक्ष्मी स्वच्छता-प्रिय) 13. नकद, स्वर्ण, रजत-सिक्का (अर्पित, फिर पुनः)

विशेष - खाता-पुस्तकें / व्यापार-बही (चोपड़ा-पूजन) - तिजोरी/नकद-बक्सा-चाबियाँ

विधि चरण-दर-चरण

चरण 1: शुद्धिकरण (5 PM) - तिल-तेल-स्नान - नए/स्वच्छ-वस्त्र (लाल, पीला, सुनहरा) - पूरा-घर सफाई — धूल, बुहारी, पोछा - रंगोली, फूल, रोशनी

चरण 2: व्यवस्था (6 PM) - चौकी पूर्व या उत्तर-मुख - लाल-वस्त्र - प्रतिमा: गणेश बाएँ, लक्ष्मी बीच, सरस्वती दाएँ - कलश दायीं ओर - सब पूजा-सामग्री थाली में

चरण 3: संकल्प (6:30 PM) `मम आत्मनः परमेश्वर-प्रीत्यर्थम्, महालक्ष्मी-पूजनम् करिष्ये`

चरण 4: गणेश-पूजा (10 मिनट) `वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा`

चरण 5: कलश-पूजा (5 मिनट) - सब तीर्थों का आवाहन `गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती...`

चरण 6: लक्ष्मी-आवाहन (10 मिनट) - मूल-मन्त्र: `ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः` — 108 बार - या लक्ष्मी-अष्टोत्तर

चरण 7: षोडशोपचार-पूजा (30 मिनट) 16 उपचार: 1. आसन 2. पाद्य (पाद-प्रक्षालन) 3. अर्घ्य 4. आचमन 5. स्नान (पंचामृत) 6. वस्त्र 7. यज्ञोपवीत 8. गन्ध (चन्दन) 9. पुष्प 10. धूप 11. दीप 12. नैवेद्य 13. आचमन (पुनः) 14. ताम्बूल (पान) 15. दक्षिणा 16. प्रदक्षिणा

चरण 8: लक्ष्मी-आरती (5 मिनट) `ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता...`

चरण 9: कुबेर + चोपड़ा-पूजन (10 मिनट) - कुबेर-पूजन (धन-रक्षा) - नई खाता-पुस्तकें कुमकुम-स्पर्श - प्रथम-पृष्ठ: `शुभ लाभ` और `ॐ श्री गणेशाय नमः`

चरण 10: दीप-प्रज्ज्वलन (प्रदोष-काल) - न्यूनतम 11 दीये - स्थान: मुख्य-द्वार, हर-कक्ष-कोना, आँगन, बाल्कनी, तुलसी-निकट - सरसों-तेल श्रेष्ठ

चरण 11: प्रसाद-वितरण - परिवार - पड़ोसी - गरीब-दान

महालक्ष्मी मूल मन्त्र

`ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः` 108 बार — विशेषतः स्थिर-लग्न में

सामान्य-गलतियाँ

  1. 1**गन्दा-घर** — लक्ष्मी स्वच्छ-घरों में ही
  2. 2**नया-झाडू नहीं** — पुराना झाडू लक्ष्मी-दूर
  3. 3**गलत-दिशा** — दक्षिण-मुख कभी नहीं
  4. 4**गणेश-छोड़ना** — अनादर, परिणाम-बाधक
  5. 5**तामसिक-भोजन** (माँसाहार, लहसुन, प्याज) — कठोर-त्याग
  6. 6**झगड़ा** — छोटी-कलह भी पुण्य-नष्ट
  7. 7**जल्दी-सोना** — रात भर एक दीया जलाएँ
  8. 8**द्वार जल्दी-बन्द** — 11 PM तक खुला (लक्ष्मी-प्रवेश)

आधुनिक-अनुकूलन

अपार्टमेन्ट - छोटा पूजा-कोना भी पर्याप्त - खुली-ज्वाला निषेध हो तो LED दीये - परिवार-सदस्यों संग ऑनलाइन-सत्संग

कार्यालय-पूजन - तिजोरी/केबिन में प्रतिमा - व्यापार-आरम्भ पूर्व त्वरित-पूजा - नई स्टेशनरी बुजुर्गों द्वारा स्पर्श

दीपावली-लक्ष्मी-पूजा कार्य क्यों करती

पारम्परिक: लक्ष्मी स्वच्छता, प्रकाश, भक्ति, उदारता को आशीर्वाद देती। आधुनिक: अनुष्ठान मनोवैज्ञानिक-रीसेट — वित्त-वर्ष-आरम्भ, ताज़ा-खाते, कृतज्ञता-अभ्यास, परिवार-बन्धन। संयुक्त = धन-मानसिकता।

निष्कर्ष

दीपावली-लक्ष्मी-पूजा श्रद्धा + स्वच्छता + सही-विधि = एक-वर्ष का कम्पनात्मक-परिवर्तन। याद — लक्ष्मी धन से चरित्र अधिक प्रिय। ईमानदार, उदार, धर्मी रहें। शुभ दीपावली!

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लक्ष्मी-पूजन चौकी की श्रेष्ठ-दिशा?

पूजा करते समय पूर्व या उत्तर-मुख। देवी-प्रतिमा पश्चिम या दक्षिण-मुखी (जिससे भक्त पूर्व/उत्तर-मुख)। दक्षिण या नैऋत्य-मुख कभी नहीं।

क्या मैं अकेले बिना पुरोहित लक्ष्मी-पूजा कर सकता?

हाँ, बिल्कुल। लक्ष्मी-पूजा गृह-अनुष्ठान — प्रत्येक-गृहस्थ स्वयं करता। पुरोहित षोडशोपचार-मन्त्रों में सहायक किन्तु अनिवार्य नहीं। भक्ति + स्वच्छता सर्वाधिक-महत्वपूर्ण।

पूजा सूर्यास्त के पहले या बाद?

सूर्यास्त-पश्चात, प्रदोष-काल (सामान्यतः 6:00-8:30 PM)। श्रेष्ठ — स्थिर-लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुम्भ) — ये "स्थिर" राशियाँ लक्ष्मी-आशीर्वाद-स्थिर। स्थानीय-पंचांग देखें।

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॥ ॐ शुभं भवतु ॥