एकादशी हिन्दू कैलेण्डर के प्रत्येक पक्ष की 11वीं तिथि है। प्रत्येक माह में दो एकादशी — एक शुक्ल पक्ष में, एक कृष्ण पक्ष में। 12 महीनों में कुल 24 एकादशी (अधिक-मास वर्ष में 26)।
✦ एकादशी क्यों?
पद्म-पुराण — स्वयं भगवान विष्णु ने एकादशी को पाप-नाशक तिथि घोषित किया। एकादशी व्रत हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य देता। 11वीं तिथि — चन्द्र-मन का सूक्ष्मतम सम्बन्ध — व्रत-ध्यान के लिए श्रेष्ठ।
✦ 24 एकादशी
| # | मास | शुक्ल | कृष्ण |
|---|---|---|---|
| 1 | चैत्र | कामदा | पापमोचनी |
| 2 | वैशाख | मोहिनी | वरूथिनी |
| 3 | ज्येष्ठ | निर्जला | अपरा |
| 4 | आषाढ़ | देवशयनी | योगिनी |
| 5 | श्रावण | पुत्रदा (पवित्रा) | कामिका |
| 6 | भाद्रपद | पार्श्व | अजा |
| 7 | आश्विन | पापांकुशा | इन्दिरा |
| 8 | कार्तिक | देवुत्थानी (प्रबोधिनी) | रमा |
| 9 | मार्गशीर्ष | मोक्षदा | उत्पन्ना |
| 10 | पौष | पुत्रदा | सफला |
| 11 | माघ | जया | षट्तिला |
| 12 | फाल्गुन | आमलकी | विजया |
✦ क्या खाएँ / क्या न खाएँ
अनुमत (फलाहार) - फल (सभी) - दूध-दही-घी-पनीर - साबूदाना - सिंघाड़े का आटा - कुट्टू का आटा - आलू, शकरकन्द - सेन्धा नमक मात्र
कठोर-वर्जित - **चावल** (सर्वाधिक महत्वपूर्ण — विष्णु के क्रोध से उत्पन्न दानव-आत्मा का वास) - गेहूँ, दाल, फलियाँ - साधारण नमक - प्याज, लहसुन - माँसाहार - मद्य, तम्बाकू
✦ व्रत के तीन स्तर
1. निर्जला (कठोरतम) न जल न अन्न। वर्ष में एक बार — निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल) — भीम ने प्रसिद्ध की।
2. फलाहार (मानक) फल-दूध-अनुमत-आटे। अधिकांश लोग।
3. एकभुक्त (हल्का) सूर्यास्त पश्चात एक फलाहार।
✦ पारण
पारण द्वादशी (12वीं तिथि) प्रातः — एकादशी रात कभी नहीं।
- 1द्वादशी तिथि में, सूर्योदय पश्चात
- 2**हरि-वासर** (द्वादशी का प्रथम चतुर्थांश) में नहीं
- 3प्रथम भोजन विष्णु को अर्पित
- 4पारम्परिक: घी-सहित चावल
✦ मन्त्र
विष्णु-सहस्रनाम `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय` — 108 बार
एकादशी मन्त्र `विष्णो विश्वम्भरो विश्वरूपकृतिर्विभुः`
✦ स्वास्थ्य-लाभ (आधुनिक-दृष्टि)
- ✦24-घण्टे उपवास = हल्का autophagy (कोशिकीय सफाई)
- ✦घटी कैलोरी → चयापचय-रीसेट
- ✦मानसिक-अनुशासन
- ✦सूजन-कमी (24-72h उपवास)
⚠️ सावधानी: मधुमेह, गर्भवती, बुजुर्ग — डॉक्टर-परामर्श।
✦ सामान्य-गलतियाँ
- 1एकादशी पर चावल खाना (सबसे बड़ा निषेध)
- 2द्वादशी सूर्योदय से पहले पारण
- 3साधारण नमक
- 4अगले-दिन पारण-छोड़ना
- 5क्रोध, झूठ, जुआ — पुण्य नष्ट
✦ निष्कर्ष
एकादशी सबसे सुलभ आध्यात्मिक-साधना — न यज्ञ, न पुरोहित, न खर्च। बस 24 घण्टे संयम, 11 मन्त्र, सही पारण। माह में एक एकादशी से शुरू करें, अनुभव करें। हरि ॐ!