एकादशी व्रत: संपूर्ण विधि गाइड

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एकादशी व्रत: संपूर्ण विधि गाइड

एकादशी व्रत की संपूर्ण जानकारी — वर्ष की 24 एकादशी, क्या खाएँ, क्या न खाएँ, पारण-समय, मन्त्र, लाभ।

2026-04-22

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

एकादशी हिन्दू कैलेण्डर के प्रत्येक पक्ष की 11वीं तिथि है। प्रत्येक माह में दो एकादशी — एक शुक्ल पक्ष में, एक कृष्ण पक्ष में। 12 महीनों में कुल 24 एकादशी (अधिक-मास वर्ष में 26)।

एकादशी क्यों?

पद्म-पुराण — स्वयं भगवान विष्णु ने एकादशी को पाप-नाशक तिथि घोषित किया। एकादशी व्रत हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य देता। 11वीं तिथि — चन्द्र-मन का सूक्ष्मतम सम्बन्ध — व्रत-ध्यान के लिए श्रेष्ठ।

24 एकादशी

#मासशुक्लकृष्ण
1चैत्रकामदापापमोचनी
2वैशाखमोहिनीवरूथिनी
3ज्येष्ठनिर्जलाअपरा
4आषाढ़देवशयनीयोगिनी
5श्रावणपुत्रदा (पवित्रा)कामिका
6भाद्रपदपार्श्वअजा
7आश्विनपापांकुशाइन्दिरा
8कार्तिकदेवुत्थानी (प्रबोधिनी)रमा
9मार्गशीर्षमोक्षदाउत्पन्ना
10पौषपुत्रदासफला
11माघजयाषट्तिला
12फाल्गुनआमलकीविजया

क्या खाएँ / क्या न खाएँ

अनुमत (फलाहार) - फल (सभी) - दूध-दही-घी-पनीर - साबूदाना - सिंघाड़े का आटा - कुट्टू का आटा - आलू, शकरकन्द - सेन्धा नमक मात्र

कठोर-वर्जित - **चावल** (सर्वाधिक महत्वपूर्ण — विष्णु के क्रोध से उत्पन्न दानव-आत्मा का वास) - गेहूँ, दाल, फलियाँ - साधारण नमक - प्याज, लहसुन - माँसाहार - मद्य, तम्बाकू

व्रत के तीन स्तर

1. निर्जला (कठोरतम) न जल न अन्न। वर्ष में एक बार — निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल) — भीम ने प्रसिद्ध की।

2. फलाहार (मानक) फल-दूध-अनुमत-आटे। अधिकांश लोग।

3. एकभुक्त (हल्का) सूर्यास्त पश्चात एक फलाहार।

पारण

पारण द्वादशी (12वीं तिथि) प्रातः — एकादशी रात कभी नहीं।

  1. 1द्वादशी तिथि में, सूर्योदय पश्चात
  2. 2**हरि-वासर** (द्वादशी का प्रथम चतुर्थांश) में नहीं
  3. 3प्रथम भोजन विष्णु को अर्पित
  4. 4पारम्परिक: घी-सहित चावल

मन्त्र

विष्णु-सहस्रनाम `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय` — 108 बार

एकादशी मन्त्र `विष्णो विश्वम्भरो विश्वरूपकृतिर्विभुः`

स्वास्थ्य-लाभ (आधुनिक-दृष्टि)

  • 24-घण्टे उपवास = हल्का autophagy (कोशिकीय सफाई)
  • घटी कैलोरी → चयापचय-रीसेट
  • मानसिक-अनुशासन
  • सूजन-कमी (24-72h उपवास)

⚠️ सावधानी: मधुमेह, गर्भवती, बुजुर्ग — डॉक्टर-परामर्श।

सामान्य-गलतियाँ

  1. 1एकादशी पर चावल खाना (सबसे बड़ा निषेध)
  2. 2द्वादशी सूर्योदय से पहले पारण
  3. 3साधारण नमक
  4. 4अगले-दिन पारण-छोड़ना
  5. 5क्रोध, झूठ, जुआ — पुण्य नष्ट

निष्कर्ष

एकादशी सबसे सुलभ आध्यात्मिक-साधना — न यज्ञ, न पुरोहित, न खर्च। बस 24 घण्टे संयम, 11 मन्त्र, सही पारण। माह में एक एकादशी से शुरू करें, अनुभव करें। हरि ॐ!

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकादशी पर चावल क्यों वर्जित?

पद्म-पुराण — विष्णु के स्वेद से उत्पन्न दानव-आत्मा एकादशी पर चावल में निवास। चावल-भक्षण = वह ऊर्जा। आधुनिक: चावल भारी-कार्ब, उपवास-प्रभाव-नष्ट।

एकादशी में जल पी सकते?

हाँ, निर्जला एकादशी छोड़कर। मानक फलाहार-व्रत में जल, दूध, फल-रस सब अनुमत।

पारण ठीक कब?

द्वादशी प्रातः, सूर्योदय पश्चात किन्तु हरि-वासर (द्वादशी का प्रथम चौथाई) समाप्ति पूर्व। प्रत्येक पंचांग में पारण-काल।

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॥ ॐ शुभं भवतु ॥