गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा — दीपावली के तुरन्त बाद की तिथि — पर। यह भागवत पुराण की एक प्रिय कथा का स्मरण-पर्व है: कृष्ण द्वारा बाएँ हाथ की कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर, इन्द्र के सात-दिवसीय प्रलय-वर्षण से वृन्दावनवासियों की रक्षा।
✦ कथा
वृन्दावन के गोप परंपरागत रूप से इन्द्र — वर्षा के देव — की पूजा करते थे। बाल कृष्ण ने उन्हें समझाया कि गोवर्धन पर्वत एवं वहाँ चरनेवाली गायें ही उनके जीवन की वास्तविक धारक हैं, गोवर्धन ही उनकी पूजा के अधिकारी हैं। उन्होंने ऐसा किया। अपमानित इन्द्र ने कुपित होकर ग्राम के डूबने हेतु प्रचण्ड वर्षा की। कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर सात दिनों तक छत्र के समान धारण किया, जब तक इन्द्र का अहंकार शांत नहीं हुआ।
✦ पर्व के दो भाव
अन्नकूट (भोजन-पर्वत) — गोवर्धन-स्मरण हेतु भक्त विस्तृत शाकाहारी भोजन — सामान्यतः 56 (छप्पन भोग) अथवा बड़े मंदिरों में 108 व्यंजन — पर्वताकार में कृष्ण-छवि के समक्ष व्यवस्थित करते हैं। पूजा के पश्चात् भोजन प्रसाद रूप में वितरित।
गौ-पूजा — गायों को स्नान, पुष्प-तिलक से सज्जित कर पूजा। ग्रामीण भारत में इस दिन गोपाल अपनी गायों का सर्वाधिक औपचारिक सम्मान करते हैं।
✦ सरल गृह-विधि
- 1**गोवर्धन-आकृति** — आँगन अथवा पूजा-कक्ष में स्वच्छ वस्त्र पर गोबर (परंपरागत), चावल अथवा रेत का छोटा टीला बनाएँ। पुष्प एवं छोटी टहनियों से वृक्ष-रूप में सज्जित करें।
- 2**लघु कृष्ण-छवि** टीले के पास रखें।
- 3**अन्नकूट** — परिवार जितने शाकाहारी व्यंजन बना सके। खीर, पूड़ी, सब्ज़ी, हलवा, सलाद, फल, मिठाई। संख्या सांकेतिक है; गृहस्थ हेतु सात भी मान्य।
- 4**पूजा** — भोजन अर्पित करें, दीप जलाएँ, संक्षिप्त कृष्ण-स्तुति अथवा गोवर्धन भजन।
- 5**परिक्रमा** — परिवार सात बार टीले की परिक्रमा, सात दिनों का स्मरण।
- 6**प्रसाद** — परिवार, पड़ोसी, निर्धन, यथासंभव गायों के साथ साझा।
✦ वृन्दावन के मंदिरों में
वृन्दावन के गोवर्धन-मंदिर एवं बाँकेबिहारी मंदिर का अन्नकूट प्रसिद्ध रूप से विस्तृत होता है — सैकड़ों व्यंजन। सात किलोमीटर की गोवर्धन परिक्रमा प्रति वर्ष लाखों तीर्थयात्रियों द्वारा की जाती है — तथा वर्ष में इसी दिन परिक्रमा सर्वाधिक व्यस्त।
✦ पारिस्थितिक पाठ
आधुनिक पाठक प्रायः टिप्पणी करते हैं कि गोवर्धन-कथा एक प्राचीन पारिस्थितिक रूपक है: समुदाय को स्मरण कराया जाता है कि जो उन्हें धारण करता है — पर्वत, गायें, स्थानीय परिवेश — वह दूरस्थ शक्तियों से अधिक प्राथमिक आदर का अधिकारी है।