धनतेरस — धन एवं स्वास्थ्य की पूजा

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धनतेरस — धन एवं स्वास्थ्य की पूजा

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी — दीपावली से दो दिन पूर्व — लक्ष्मी (धन) तथा धन्वंतरि (आयुर्वेद-देव) की संयुक्त पूजा। परंपरागत क्रय, सरल विधि, तथा दिवस का चिंतन।

2026-05-02

लेखक: मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम

पंचांग एवं मुहूर्त सन्दर्भ

✦ प्रकाशित: समीक्षित:

मुहूर्त चौघड़िया सम्पादकीय टीम द्वारा संकलित

धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी — दीपावली से दो दिन पूर्व — पर। नाम धन (सम्पत्ति) + तेरस (त्रयोदशी) से। यह पंच-दिवसीय दीपावली का प्रथम दिवस है तथा दो भिन्न परंतु सम्बद्ध उत्सव-धाराएँ धारण करता है।

दो धाराएँ

लक्ष्मी धनतेरस — लोक-स्वरूप। दीपावली पर औपचारिक पूजा से पूर्व लक्ष्मी का स्वागत। गृह सिक्का, स्वर्ण-रजत आभूषण, अथवा पीतल-स्टील पात्र का सांकेतिक क्रय करते हैं — "लक्ष्मी को घर लाना"। इस दिन लाई गई धन-वस्तु वर्ष भर वर्धित होती है, ऐसा माना गया।

धन्वंतरि जयन्ती — प्राचीन स्वरूप। भागवत पुराण में कथा है कि धन्वंतरि — दिव्य चिकित्सक, आयुर्वेद-देव — अमृत-कलश सहित समुद्र-मंथन से इसी दिन प्रकट हुए। चिकित्सा एवं आयुर्वेद समुदायों के लिए धनतेरस मूलतः धन्वंतरि-दिवस है। भारत में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस इसी कारण धनतेरस को।

दोनों धाराओं का संदेश

युग्म महत्वपूर्ण है। शास्त्रीय हिंदू-चिंतन में धन केवल मुद्रा नहीं — जीवन-सम्पत्ति है। स्वास्थ्य (धन्वंतरि का वरदान) प्रथम धन है; आर्थिक सुरक्षा (लक्ष्मी की) द्वितीय। धनतेरस दोनों को एक ही वेदी पर रखता है, तथा क्रम महत्वपूर्ण है: दिवस प्रथमतः शारीरिक कल्याण का, तत्पश्चात् भौतिक समृद्धि का।

सरल गृह-विधि

  1. 1**गृह की पूर्ण सफाई** — यदि न हुई हो, धनतेरस दीपावली-स्वच्छता का औपचारिक आरंभ।
  2. 2**द्वार-तैयारी** — दहलीज पर हल्दी अथवा रंगोली, दोनों ओर मिट्टी का छोटा दीप।
  3. 3**लघु क्रय** — सांकेतिक सिक्का, स्टील-पीतल पात्र, अथवा व्यावहारिक उपयोग की सामान्य वस्तु।
  4. 4**लक्ष्मी-धन्वंतरि पूजा** संध्या में — दोनों की छवि सहित लघु वेदी, पीले पुष्प, खील-बताशे, हल्दी, लाल वस्त्र।
  5. 5**यम दीप** — सूर्यास्त पर द्वार के बाहर दक्षिण-मुख एक छोटा दीप यम-समर्पित। परंपरा: अकाल-मृत्यु से रक्षा। व्यवहार: अगली रात्रियों की समृद्धि सदा मृत्यु के व्यापक परिप्रेक्ष्य में स्थित है, इसका स्वीकार।
  6. 6**आरती** लक्ष्मी एवं धन्वंतरि की, मिष्ठान्न-वितरण।

परंपरागत क्रय

रजत-सिक्के; स्वर्ण-रजत आभूषण, सांकेतिक भी; पीतल-ताम्र-स्टील पात्र; नई झाड़ू (लक्ष्मी से सम्बद्ध); दीपावली के दीप; सम्पूर्ण अनाज। धनतेरस को अचल-सम्पत्ति अथवा वाहन पंजीयन भी शुभ माना गया।

व्यय पर सूत्र

धनतेरस का शास्त्रीय अर्थ "जितना संभव क्रय करें" नहीं, "घर में कुछ अच्छा लाएँ" है। एक सोची-समझी क्रय — वर्षों उपयोग होनेवाला उत्तम पात्र, एक सहेजा जानेवाला रजत-सिक्का — पर्व के भाव के निकट है, क्रेडिट-कार्ड का अंधाधुन्ध व्यय नहीं।

📝सम्पादकीय टिप्पणी

इस लेख की रचना हमारी सम्पादकीय टीम ने मूल संस्कृत ज्योतिष ग्रन्थों — बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, मुहूर्त चिन्तामणि, सूर्य सिद्धान्त — से प्रत्यक्ष अध्ययन के पश्चात् की है। हमने आधुनिक खगोलीय गणनाओं से इन सिद्धान्तों का सत्यापन भी किया है। यदि आपको कोई त्रुटि मिले अथवा कोई सुझाव हो तो कृपया हमें muhuratchoghadiya@gmail.com पर ईमेल करें। हम आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

सत्यापन स्रोत: Wikipedia: Hindu CalendarPanchangamSurya SiddhantaLahiri Ayanamsa

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या धनतेरस पर कुछ खरीदना वास्तव में आवश्यक है?

सांकेतिक रूप से हाँ; व्यावहारिक रूप से नहीं। कर्म कल्याण के स्वागत का संकेत है। यदि अर्थ-स्थिति कठिन हो, थोड़ा अनाज अथवा गुड़ का क्रय पर्याप्त। शास्त्रीय सिद्धांत भाव है, मात्रा नहीं।

धनतेरस को यम-दीप क्यों जलाया जाता है?

पद्म पुराण में मूल रखनेवाली प्राचीन लोक-प्रथा — दक्षिण-मुख दीप यम-दिशा को आदर-स्वरूप अर्पित, आगामी वर्ष में अकाल-मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना। यह उन कुछ भारतीय पर्व-अनुष्ठानों में से है जो मृत्यु को स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हैं।

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