धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी — दीपावली से दो दिन पूर्व — पर। नाम धन (सम्पत्ति) + तेरस (त्रयोदशी) से। यह पंच-दिवसीय दीपावली का प्रथम दिवस है तथा दो भिन्न परंतु सम्बद्ध उत्सव-धाराएँ धारण करता है।
✦ दो धाराएँ
लक्ष्मी धनतेरस — लोक-स्वरूप। दीपावली पर औपचारिक पूजा से पूर्व लक्ष्मी का स्वागत। गृह सिक्का, स्वर्ण-रजत आभूषण, अथवा पीतल-स्टील पात्र का सांकेतिक क्रय करते हैं — "लक्ष्मी को घर लाना"। इस दिन लाई गई धन-वस्तु वर्ष भर वर्धित होती है, ऐसा माना गया।
धन्वंतरि जयन्ती — प्राचीन स्वरूप। भागवत पुराण में कथा है कि धन्वंतरि — दिव्य चिकित्सक, आयुर्वेद-देव — अमृत-कलश सहित समुद्र-मंथन से इसी दिन प्रकट हुए। चिकित्सा एवं आयुर्वेद समुदायों के लिए धनतेरस मूलतः धन्वंतरि-दिवस है। भारत में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस इसी कारण धनतेरस को।
✦ दोनों धाराओं का संदेश
युग्म महत्वपूर्ण है। शास्त्रीय हिंदू-चिंतन में धन केवल मुद्रा नहीं — जीवन-सम्पत्ति है। स्वास्थ्य (धन्वंतरि का वरदान) प्रथम धन है; आर्थिक सुरक्षा (लक्ष्मी की) द्वितीय। धनतेरस दोनों को एक ही वेदी पर रखता है, तथा क्रम महत्वपूर्ण है: दिवस प्रथमतः शारीरिक कल्याण का, तत्पश्चात् भौतिक समृद्धि का।
✦ सरल गृह-विधि
- 1**गृह की पूर्ण सफाई** — यदि न हुई हो, धनतेरस दीपावली-स्वच्छता का औपचारिक आरंभ।
- 2**द्वार-तैयारी** — दहलीज पर हल्दी अथवा रंगोली, दोनों ओर मिट्टी का छोटा दीप।
- 3**लघु क्रय** — सांकेतिक सिक्का, स्टील-पीतल पात्र, अथवा व्यावहारिक उपयोग की सामान्य वस्तु।
- 4**लक्ष्मी-धन्वंतरि पूजा** संध्या में — दोनों की छवि सहित लघु वेदी, पीले पुष्प, खील-बताशे, हल्दी, लाल वस्त्र।
- 5**यम दीप** — सूर्यास्त पर द्वार के बाहर दक्षिण-मुख एक छोटा दीप यम-समर्पित। परंपरा: अकाल-मृत्यु से रक्षा। व्यवहार: अगली रात्रियों की समृद्धि सदा मृत्यु के व्यापक परिप्रेक्ष्य में स्थित है, इसका स्वीकार।
- 6**आरती** लक्ष्मी एवं धन्वंतरि की, मिष्ठान्न-वितरण।
✦ परंपरागत क्रय
रजत-सिक्के; स्वर्ण-रजत आभूषण, सांकेतिक भी; पीतल-ताम्र-स्टील पात्र; नई झाड़ू (लक्ष्मी से सम्बद्ध); दीपावली के दीप; सम्पूर्ण अनाज। धनतेरस को अचल-सम्पत्ति अथवा वाहन पंजीयन भी शुभ माना गया।
✦ व्यय पर सूत्र
धनतेरस का शास्त्रीय अर्थ "जितना संभव क्रय करें" नहीं, "घर में कुछ अच्छा लाएँ" है। एक सोची-समझी क्रय — वर्षों उपयोग होनेवाला उत्तम पात्र, एक सहेजा जानेवाला रजत-सिक्का — पर्व के भाव के निकट है, क्रेडिट-कार्ड का अंधाधुन्ध व्यय नहीं।