अष्ट लक्ष्मी — "आठ लक्ष्मी" — समृद्धि की देवी के आठ रूप, प्रत्येक शास्त्रीय हिंदू चिंतन में सम्पत्ति की भिन्न श्रेणी का प्रतिनिधित्व करता है। उत्तर-मध्यकालीन वैष्णव मंदिर परंपरा में संहिताबद्ध सूची स्पष्ट करती है कि हिंदू चिंतन में "सम्पत्ति" बहुआयामी है — भौतिक सम्पत्ति आठ में से एक रूप, सम्पूर्ण नहीं।
✦ आठ रूप
1. आदि लक्ष्मी — आदि-लक्ष्मी। मूल रूप, विष्णु की पत्नी, अन्यों से पूर्व स्थापित। उस स्रोत का प्रतिनिधित्व जिससे शेष सब लक्ष्मी प्रवाहित।
2. धन लक्ष्मी — द्रव्य एवं भौतिक सम्पत्ति की लक्ष्मी। मुद्रा, सम्पत्ति, स्वर्ण, व्यवसाय-सफलता की लक्ष्मी। सर्वाधिक लोकप्रिय रूप से पूज्य।
3. धान्य लक्ष्मी — अनाज एवं कृषि-उत्पाद की लक्ष्मी। कृषि सभ्यता में यह सर्वाधिक मूलभूत सम्पत्ति — भण्डार में अनाज वर्षों तक परिवारों को धारण करता है।
4. गज लक्ष्मी — हाथियों के मध्य लक्ष्मी। राजकीय/राजनैतिक प्राधिकार, बड़े-पैमाने के संसाधन, शासन एवं बड़ी संस्थाओं से सम्बद्ध सम्पत्ति का प्रतिनिधित्व। शास्त्रीय प्रतिमा-रूप सर्वाधिक प्रदर्शित।
5. सन्तान लक्ष्मी — सन्तान की लक्ष्मी। स्वस्थ, सद्गुणी सन्तान स्वयं सम्पत्ति का रूप हैं। विशेषतः सन्तान-कामी अथवा सन्तान-कल्याण हेतु पूज्य।
6. वीर लक्ष्मी — वीरता की लक्ष्मी। साहस, संकट का सामना करने की शक्ति, आन्तरिक संसाधन जो धन नहीं खरीद सकता। बड़े संघर्षों का सामना करनेवालों द्वारा विशेष पूज्य।
7. विजय लक्ष्मी — विजय की लक्ष्मी। विशिष्ट उद्यमों में सफलता — न्यायालय, परीक्षा, व्यवसाय, खेल। आरम्भित कार्यों के समापन से सम्बद्ध रूप।
8. विद्या लक्ष्मी — ज्ञान एवं शिक्षा की लक्ष्मी। कभी-कभी सरस्वती के साथ संयुक्त मानी जातीं, परंतु यहाँ ज्ञान के सम्पत्ति-पक्ष के रूप में पृथक — कैसे विद्या जीवन भर धारक सम्पत्ति बन जाती है।
✦ आठ क्यों?
शास्त्रीय हिंदू चिंतन में आठ की संख्या लौकिक आयाम में पूर्णता का प्रतिनिधित्व करती है। (आठ दिशाएँ, आठ गुण, अष्टांग योग के आठ अंग, अष्ट सिद्धियाँ।) आठ लक्ष्मी समृद्धि के रूप में शास्त्रीय चिंतन ने जो माना उसके पूर्ण विस्तार को आवृत करती हैं, कोई महत्त्वपूर्ण श्रेणी छूटी नहीं। अतः सूची आकस्मिक नहीं; यह कल्याण का व्यवस्थित वर्गीकरण है।
✦ अभ्यास में
अधिकांश गृह लक्ष्मी-पूजा — मुख्य दीपावली पूजा सहित — महालक्ष्मी को सम्पूर्ण रूप के रूप में आह्वानित करती है, आठों की अंतर्निहित समझ सहित। एक रूप पर केन्द्रित विशिष्ट पालन भी संभव:
- ✦आर्थिक राहत-कामी परिवार धन लक्ष्मी पर केन्द्रित हो सकता है।
- ✦बच्चे की परीक्षा-सफलता हेतु प्रार्थना करते अभिभावक विद्या एवं विजय लक्ष्मी एकसाथ आह्वानित कर सकते हैं।
- ✦नया उद्यम आरम्भ करता व्यवसाय आदि लक्ष्मी (आधार हेतु) एवं विजय लक्ष्मी (सफलता हेतु) सम्मानित कर सकता है।
अष्ट लक्ष्मी स्तोत्र — उत्तर-मध्यकाल में रचित संस्कृत सूक्त — आठों का श्लोक-दर-श्लोक वर्णन देता है, प्रत्येक को गुण एवं रूप से नामित करता है। प्रमुख लक्ष्मी-मंदिरों में पाठ किया जाता तथा गृह-पूजा हेतु बढ़ती मात्रा में ऑडियो-रूप में उपलब्ध।
✦ प्रमुख अष्ट लक्ष्मी मंदिर
चेन्नई (बेसन्ट नगर) — 1970 के दशक में निर्मित, मंदिर के आठों के लिए पृथक क्षेत्र, भिन्न मंजिलों पर। दक्षिण भारत के सर्वाधिक देखे जानेवाले आधुनिक मंदिरों में से।
हैदराबाद (वासवी कन्यका परमेश्वरी मंदिर) — अष्ट लक्ष्मी क्षेत्र-समूहीकरण है।
कई छोटे अष्ट लक्ष्मी क्षेत्र दक्षिण भारत भर में, विशेषतः तमिलनाडु एवं आंध्र प्रदेश में, जहाँ इस सम्प्रदाय की ऐतिहासिक रूप से सर्वाधिक सशक्तता रही है।
✦ शास्त्रीय दृष्टि पर सूत्र
आठों को साथ पढ़ना सामान्य आधुनिक भ्रम सुधारता है — कि हिंदू समृद्धि-पूजा द्रव्य-पूजा तक संकुचित है। शास्त्रीय समझ कहीं व्यापक: सन्तान, शिक्षा, साहस, विजय, कृषि-पर्याप्तता एवं राजनैतिक प्राधिकार सभी लक्ष्मी के रूप हैं, द्रव्य के साथ। पर्याप्त आय परंतु सन्तान-रहित परिवार लक्ष्मी से पूर्ण रूप से आशीर्वादित नहीं; न ही साहस अथवा ज्ञान-रहित धनी व्यक्ति। पूर्ण जीवन आठों की एकसाथ उपस्थिति है, तथा प्रार्थना केवल एक तक संकुचित न हो।