त्रिपुष्कर योग

त्रिपुष्कर योग

फल का तीन गुना — त्रिगुणित सिद्धि

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त्रिपुष्कर योग क्या है?

त्रिपुष्कर योग द्विपुष्कर का "बड़ा भाई" है — फल दो गुना नहीं, अपितु "तीन गुना" मिलता है। संरचना द्विपुष्कर के समान है, परन्तु नक्षत्र पाँच होते हैं जिनमें ३-पाद किसी राशि में पड़ते हैं — इसलिए "त्रि" गुणन।

दान-धर्म, सोना-चाँदी क्रय, सम्पत्ति, अभिषेक — इन सब के लिए यह योग सर्वोत्तम है। फल त्रिगुणित होने से पुण्य भी त्रिगुणित होता है। परन्तु नकारात्मक कार्य भी त्रिगुणित हो जाते हैं — ध्यान रखें।

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योग बनने का नियम

त्रि-संयोग आवश्यक — वार: रविवार/मंगलवार/शनिवार · तिथि: द्वितीया/सप्तमी/द्वादशी · नक्षत्र: कृत्तिका, पुनर्वसु, उत्तर फाल्गुनी, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, पूर्व भाद्रपद (इन छह में से कोई एक)। द्विपुष्कर से अधिक नक्षत्र हैं, इसलिए यह थोड़ा अधिक बार आता है।

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आगामी त्रिपुष्कर योग तिथियाँ

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11 जुलाई 2026

शनिवार · कृत्तिका

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25 अगस्त 2026

मंगलवार · उत्तराषाढ़ा

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9 जनवरी 2027

शनिवार · उत्तराषाढ़ा

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27 फ़रवरी 2027

शनिवार · विशाखा

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26 जून 2027

शनिवार · पूर्व भाद्रपद

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29 अगस्त 2027

रविवार · पुनर्वसु

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31 अक्टूबर 2027

रविवार · विशाखा

* दिल्ली पंचांग सन्दर्भ। स्थान बदलने पर तिथियाँ ±1 दिन भिन्न हो सकती हैं।

इस योग में करने योग्य कार्य

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सोना, चाँदी, वस्त्र क्रय (फल तीन गुना)
🏡
भूमि एवं सम्पत्ति क्रय
📈
व्यापारिक निवेश
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अभिषेक एवं पूजा (फल तीन गुना)

— त्रिपुष्कर योग में आरम्भ कार्य की सिद्धि कई गुना —