✦ द्विपुष्कर योग ✦
✦ फल का दोगुना — द्विगुणित सिद्धि ✦
✦ द्विपुष्कर योग क्या है? ✦
द्विपुष्कर योग में किया गया हर कार्य "दो बार" फलित होता है — अर्थात् फल दोगुना होता है। यह कहावत मुहूर्त ग्रन्थों में स्पष्ट है: "द्विपुष्करे कृतं कर्म द्विगुणं फलमश्नुते"।
सकारात्मक कार्यों में यह दुगुना लाभ देता है — सोना खरीद, सम्पत्ति, व्यापार। परन्तु ध्यान रखें — नकारात्मक कार्य (जैसे हानि, झगड़ा) भी द्विगुणित हो जाते हैं, इसलिए इस योग में सावधानी से कार्य करें।
✦ योग बनने का नियम ✦
त्रि-संयोग आवश्यक — वार: रविवार/मंगलवार/शनिवार · तिथि: द्वितीया/सप्तमी/द्वादशी (शुक्ल या कृष्ण पक्ष) · नक्षत्र: मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा (इन तीन में से कोई एक)। तीनों के एक ही दिन एक साथ होने पर ही द्विपुष्कर बनता है — इसलिए यह योग वर्ष में कुछ ही बार आता है।
✦ आगामी द्विपुष्कर योग तिथियाँ ✦
7 जून 2026
रविवार · धनिष्ठा
5 दिसम्बर 2026
शनिवार · चित्रा
3 अप्रैल 2027
शनिवार · धनिष्ठा
8 अगस्त 2027
रविवार · चित्रा
5 दिसम्बर 2027
रविवार · धनिष्ठा
* दिल्ली पंचांग सन्दर्भ। स्थान बदलने पर तिथियाँ ±1 दिन भिन्न हो सकती हैं।
✦ इस योग में करने योग्य कार्य ✦
✦ और देखें ✦
✦ — द्विपुष्कर योग में आरम्भ कार्य की सिद्धि कई गुना — ✦