द्विपुष्कर योग

द्विपुष्कर योग

फल का दोगुना — द्विगुणित सिद्धि

द्विपुष्कर योग क्या है?

द्विपुष्कर योग में किया गया हर कार्य "दो बार" फलित होता है — अर्थात् फल दोगुना होता है। यह कहावत मुहूर्त ग्रन्थों में स्पष्ट है: "द्विपुष्करे कृतं कर्म द्विगुणं फलमश्नुते"।

सकारात्मक कार्यों में यह दुगुना लाभ देता है — सोना खरीद, सम्पत्ति, व्यापार। परन्तु ध्यान रखें — नकारात्मक कार्य (जैसे हानि, झगड़ा) भी द्विगुणित हो जाते हैं, इसलिए इस योग में सावधानी से कार्य करें।

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योग बनने का नियम

त्रि-संयोग आवश्यक — वार: रविवार/मंगलवार/शनिवार · तिथि: द्वितीया/सप्तमी/द्वादशी (शुक्ल या कृष्ण पक्ष) · नक्षत्र: मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा (इन तीन में से कोई एक)। तीनों के एक ही दिन एक साथ होने पर ही द्विपुष्कर बनता है — इसलिए यह योग वर्ष में कुछ ही बार आता है।

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आगामी द्विपुष्कर योग तिथियाँ

7 जून 2026

रविवार · धनिष्ठा

5 दिसम्बर 2026

शनिवार · चित्रा

3 अप्रैल 2027

शनिवार · धनिष्ठा

8 अगस्त 2027

रविवार · चित्रा

5 दिसम्बर 2027

रविवार · धनिष्ठा

* दिल्ली पंचांग सन्दर्भ। स्थान बदलने पर तिथियाँ ±1 दिन भिन्न हो सकती हैं।

इस योग में करने योग्य कार्य

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सोना, चाँदी, वस्त्र क्रय (फल दोगुना)
🏡
भूमि एवं सम्पत्ति क्रय
📈
व्यापारिक निवेश
🙏
दान — पुण्य भी दोगुना

— द्विपुष्कर योग में आरम्भ कार्य की सिद्धि कई गुना —