विश्वकर्मा पूजा दिव्य वास्तुकार-इंजीनियर विश्वकर्मा का पर्व — वैदिक देव जिन्हें ऋग्वेद एवं महाभारत में देवों के अस्त्रों, द्वारका एवं इन्द्रप्रस्थ जैसे नगरों, रावण की लंका, तथा स्वयं ब्रह्माण्डिक संरचनाओं के निर्माता के रूप में नामांकित किया गया है। दिवस निश्चित सौर-तिथि पर — सामान्यतः 17 सितम्बर (अत्यन्त-दुर्लभ रूप से 16 अथवा 18, लीप-वर्ष-प्रवृत्ति के कारण) — कन्या संक्रान्ति (सूर्य का कन्या-प्रवेश) के साथ संगत।
✦ विश्वकर्मा-पर्व क्यों?
शास्त्रीय भारतीय ब्रह्माण्ड-विद्या में संसार-सृष्टि एकल दिव्य-कर्म नहीं, सतत शिल्प-कौशल है। विश्वकर्मा का शाब्दिक अर्थ "सर्व-कर्ता" — वह देव जो रूप-शिल्पी, संरचना-रूपकार, सामग्री-परिष्कारक है। वे संरक्षक हैं:
- ✦वास्तुकार (स्थपति)
- ✦शिल्पी-बढ़ई (वर्धकि)
- ✦पाषाण-शिल्पी (शिल्पी)
- ✦धातु-कर्मी (लोहकार)
- ✦वस्त्र-निर्माता (तन्तुवायि)
- ✦इंजीनियर, मशीनिस्ट, यांत्रिक — एवं आधुनिक अनुकूलन में सॉफ्टवेयर-कर्मी, कारखाना-कर्मी, तथा कोई भी जो उपकरणों से कार्य करता है।
पर्व औद्योगिक एवं विनिर्माण क्षेत्रों में सर्वाधिक दृश्य रूप से पालित: कारखाना-फर्श सजाया जाता है, मशीनें पुष्प-मालाओं से, उपकरण साफ़ किए जाते हैं तथा देव-छवि के साथ पूजा। बंगाल, बिहार, ओडिशा, झारखण्ड एवं असम में यह बड़ा कार्यस्थल-अवकाश।
✦ सौर-कैलेंडर लंगर
अधिकांश हिंदू पर्व चन्द्र-कैलेंडर का अनुसरण करते हैं, ग्रेगोरियन वर्षों के बीच तिथि एक मास तक खिसकती है। विश्वकर्मा पूजा उन कुछ में से है जो सौर कैलेंडर — भास्कर-मान — का अनुसरण करते हैं, अतः ग्रेगोरियन तिथि लगभग निश्चित। सौर-वर्ष से यह संगति शिल्पी-देव के भौतिक यथार्थ एवं सूर्य के मापनीय चक्र से सम्बन्ध को परावर्तित करती है।
✦ सरल कार्यशाला-विधि
- 1**सफाई** — कार्यशाला, कारखाना-फर्श अथवा कार्यालय एक दिन पूर्व पूर्णतः साफ़। उपकरण एवं मशीनें झाड़ी, आवश्यक हो तो तेल-लेपित, स्वच्छ क्रम में।
- 2**विश्वकर्मा-छवि** — मिट्टी अथवा मुद्रित लघु विश्वकर्मा-छवि वस्त्र-चावल की लघु वेदी पर।
- 3**अर्पण** — पुष्प (विशेष गेंदा एवं लाल गुड़हल), फल, मिठाई, धूप, दीप, नवीन वस्त्र-खण्ड, तथा — सर्वाधिक विशिष्ट — प्रत्येक प्रमुख उपकरण पर रखा एक सूत्र।
- 4**उपकरण-पूजा** — प्रत्येक उपकरण पर पुष्प एवं सिंदूर-तिलक। कार्यकर्ता परंपरागत रूप से इस दिन उपकरण उपयोग नहीं करते; उन्हें सम्मानित किया जाता है, उनका उपयोग नहीं।
- 5**मंत्र** — "ॐ विश्वकर्माय विद्महे शिल्पाचार्याय धीमहि। तन्नो विश्वः प्रचोदयात्॥"
- 6**प्रसाद** — फल एवं मिठाई सभी कार्यकर्ताओं को; अनेक कारखानों में सामूहिक भोज।
✦ भाव
विश्वकर्मा पूजा हिंदू कैलेंडर के सर्वाधिक लोकतांत्रिक पर्वों में से। कार्यशाला-फर्श पर इस दिन कोई जातिगत पदानुक्रम नहीं — स्वामी, पर्यवेक्षक एवं प्रशिक्षु सभी समान मशीनों को मालार्पित करते हैं, समान प्रसाद खाते हैं, समान संरक्षक का स्वीकार करते हैं। यह वह दिवस है जब कर्म स्वयं पवित्र किया जाता है — श्रम के रूप में नहीं, बल्कि उस ब्रह्माण्डिक शिल्प-कौशल में सहभागिता के रूप में जिसका विश्वकर्मा प्रतिनिधित्व करते हैं।
✦ जो संगणक पर कार्य करते हैं
पर्व का आधुनिक अनुकूलन भौतिक उपकरणों से डिजिटल तक विस्तारित। कोलकाता, बेंगलुरु एवं पुणे के अनेक सॉफ्टवेयर कार्यालय अब अपने मुख्य सर्वरों को मालार्पित करके, कार्यालय के द्वार पर पूजा करके, तथा मंत्र-पाठ में समकालीन कार्यकर्ताओं द्वारा उपयुक्त डिजिटल उपकरणों को सम्मिलित करके विश्वकर्मा पूजा मनाते हैं। विश्वकर्मा का शास्त्रीय विस्तार — सर्व-कर्ता — इस विस्तार को सहज रूप से समायोजित करता है।