वट सावित्री व्रत — हिंदू कैलेंडर के सर्वाधिक प्राचीन सुहागिन व्रतों में से, उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्या एवं महाराष्ट्र-गुजरात के भागों में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पालित। महाभारत के आरण्यक पर्व में वर्णित — सावित्री द्वारा यम से सत्यवान को छुड़ाना — का स्मरण-पर्व।
✦ सावित्री-कथा
राजकुमारी सावित्री ने नारद की चेतावनी (विवाह के ठीक एक वर्ष बाद सत्यवान की मृत्यु) के विरुद्ध सत्यवान को पति चुना। सावित्री ने एक-वर्षीय तप किया। नियत-दिवस पर, सत्यवान के साथ वन में जाकर वट-वृक्ष के नीचे उनके मूर्च्छित होने पर, यम के आगमन पर, उसने न रोना न प्रार्थना — यम के पीछे चलकर धर्म-संवाद किया। यम प्रसन्न होकर तीन वर मांगे; पति का जीवन वर नहीं बन सकता था। सावित्री की बुद्धिमत्ता-पूर्ण वर-चयन (तृतीय: "मेरे पति से मुझे अनेक संतान प्राप्त हों") ने यम को तार्किक रूप से बाँध लिया — सत्यवान को पुनर्जीवित किए बिना तृतीय वर पूर्ण नहीं हो सकता था। यम पराजित होकर सत्यवान को पुनर्जीवित किया।
कथा सावित्री को बुद्धि, भक्ति एवं मौन दृढ़ता से पति-रक्षा करनेवाली पत्नी का आदर्श बनाती है।
✦ वट-वृक्ष क्यों?
वट-वृक्ष जिसके नीचे सत्यवान पुनर्जीवित हुए, व्रत का स्वाभाविक केन्द्र बना। वट के सांकेतिक भाव पर्व के विषय से मेल खाते हैं:
- ✦यह भारत के दीर्घजीवी वृक्षों में से — कुछ वट-वृक्ष सहस्र वर्ष से अधिक प्राचीन।
- ✦एकल वृक्ष जो वन बन जाता है — अवरोही जड़ें तने बनकर बहुगुणित होती हैं।
- ✦विष्णु एवं ब्रह्मा से सम्बद्ध (प्राचीन ग्रंथों में ब्रह्मा वट के नीचे निवास।)
जो पत्नी वट की परिक्रमा करती है तथा सूत्र बाँधती है — वह पति की आयु को वट के समान दीर्घ, गहन-मूल एवं बहुगुणित होने की प्रार्थना करती है।
✦ दैनिक विधि
- 1**प्रात:स्नान**, **परंपरागत वस्त्र** — लाल अथवा पीला; अनेक विवाह-वस्त्र भी।
- 2**थाली** में धूप, दीप, रोली, अक्षत, फल (विशेष आम), चना, मिठाई, नया लाल सूत्र।
- 3**वट-वृक्ष-दर्शन** — वास्तविक वट संभव हो; नहीं तो गमले का फिकस, पीपल, अथवा वट-छवि।
- 4**अर्पण** — मूल पर जल अर्पित; थाली रखें; पुष्प अर्पित।
- 5**सूत्र-परिक्रमा** — पत्नी लम्बे लाल सूत्र को वृक्ष-तने पर लपेटते हुए परिक्रमा करती है (कठोर पालन में 108, व्यावहारिक में 7 अथवा 11)।
- 6**कथा-पाठ** — वट सावित्री व्रत कथा।
- 7**उपवास** — अनेक पूर्ण-दिवस उपवास, चन्द्र-दर्शन (अथवा अमावस्या पर सूर्यास्त) के पश्चात् पारणा।
- 8**पति का आशीर्वाद** — अंत में पत्नी पति का आशीर्वाद लेती है, परिवार साथ भोजन करता है।
✦ समानता पर सूत्र
आधुनिक पाठक प्रायः प्रश्न उठाते हैं कि वट सावित्री जैसे व्रत क्या एकपक्षीय वैवाहिक धारणा को सुदृढ़ करते हैं। दो उत्तर: प्रथम, मूल महाभारत-कथा सावित्री को सक्रिय कर्ता बनाती है, निष्क्रिय पीड़िता नहीं — यम से उनका धर्म-संवाद ही विजय का आधार है। द्वितीय, आधुनिक अनेक गृहों में पति भी इसी दिन समानांतर पुरुष-व्रत पाल रहे हैं — यह प्रथा बढ़ रही है।