वास्तु शास्त्र भारतीय वास्तुकला का प्राचीन-विज्ञान। छोटे-समायोजन भी घर की ऊर्जा, पारिवारिक-सद्भाव, समृद्धि में नाटकीय-सुधार लाते।
✦ 8 दिशाएँ
| दिशा | तत्त्व | श्रेष्ठ-कार्य |
|---|---|---|
| ईशान (पूर्व-उत्तर) | जल | पूजा-कक्ष, ध्यान |
| पूर्व | वायु | मुख्य-द्वार, अध्ययन |
| आग्नेय (पूर्व-दक्षिण) | अग्नि | रसोई, बिजली |
| दक्षिण | पृथ्वी | मास्टर-बेडरूम |
| नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) | पृथ्वी | मास्टर-बेडरूम, तिजोरी |
| पश्चिम | वायु | बच्चों का कमरा |
| वायव्य (पश्चिम-उत्तर) | वायु | अतिथि-कक्ष, गाड़ी |
| उत्तर | जल | कार्यालय, तिजोरी |
| केन्द्र (ब्रह्मस्थान) | आकाश | खाली रखें |
✦ 21 व्यावहारिक उपाय
मुख्य-द्वार (सर्वाधिक-महत्त्वपूर्ण)
1. मुख्य-द्वार पूर्व, उत्तर, या ईशान मुख श्रेष्ठ।
2. मुख्य-द्वार अन्य-दरवाज़ों से बड़ा होना चाहिए।
3. दरवाज़ा अन्दर की ओर खुले (बाहर खुलना = धन-बहाव-बाहर)।
4. मुख्य-द्वार के सामने सीधा-दरवाज़ा नहीं (ऊर्जा सीधी निकल जाती)।
5. प्रवेश पर तोरण + गणेश-मूर्ति।
बैठक
6. उत्तर/पूर्व में आदर्श।
7. सोफ़ा दक्षिण/पश्चिम-दीवार पर।
8. TV/electronics दक्षिण-पूर्व।
9. दर्पण उत्तर/पूर्व-दीवारों पर ही (दक्षिण कभी नहीं)।
रसोई
10. रसोई दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)।
11. चूल्हा पूर्व-मुख खाना बनाते समय।
12. सिंक रसोई के उत्तर-पूर्व कोने में।
13. चूल्हा-सिंक सीधे-आमने-सामने नहीं (अग्नि-जल विरोध)।
बेडरूम
14. मास्टर-बेडरूम दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)।
15. सोते-समय सिर दक्षिण/पूर्व की ओर।
16. पैर दक्षिण की ओर कभी नहीं (मृत्यु-दिशा)।
17. बिस्तर के सामने दर्पण नहीं।
पूजा-कक्ष
18. घर के उत्तर-पूर्व कोने में।
19. पूर्व/उत्तर-मुख प्रार्थना करते समय।
20. देवी-देवता आमने-सामने नहीं।
21. पूजा-स्थल स्वच्छ, प्रकाशित, अव्यवस्था-मुक्त।
✦ पौधे
शुभ-पौधे - **तुलसी**: ईशान — दैनिक-पूजा - **मनी-प्लांट**: दक्षिण-पूर्व — धन - **बाँस**: पूर्व — भाग्य - **गुलाब**: दक्षिण-पश्चिम — प्रेम
अन्दर वर्जित - कैक्टस (नकारात्मक-ऊर्जा) - बोनसाई (बाधित-वृद्धि का प्रतीक)
✦ निष्कर्ष
वास्तु शास्त्र अंधविश्वास नहीं — 5000+ वर्षों के अवलोकन-आधारित पर्यावरण-मनोविज्ञान। छोटे-परिवर्तन भी मूड, एकाग्रता, पारिवारिक-सद्भाव, धन-प्रवाह पर मापने-योग्य प्रभाव डालते।