प्रत्येक वर्ष एक परिचित प्रश्न दोहराया जाता है: "इस बार दिवाली अंग्रेज़ी कैलेंडर पर अलग दिनांक पर क्यों है?" संक्षिप्त उत्तर — हिन्दू पर्व तिथियों से जुड़े हैं जो निरयण चान्द्र-सौर कैलेंडर में गणना होती हैं, जबकि अंग्रेज़ी (Gregorian) कैलेंडर पूर्णतः सौर है। दोनों प्रणालियों की इकाइयाँ भिन्न हैं — इसलिए उनकी तिथियाँ एक-दूसरे के सापेक्ष खिसकती रहती हैं।
✦ दोनों कैलेंडर एक नज़र में
Gregorian (अंग्रेज़ी) कैलेंडर पृथ्वी की सूर्य-परिक्रमा पर आधारित है। साधारण वर्ष में 365 दिन, अधिवर्ष में 366 दिन। प्रत्येक तारीख — जैसे 1 जनवरी — पृथ्वी की कक्षा के लगभग एक ही बिन्दु पर आती है।
हिन्दू (वैदिक) कैलेंडर *चान्द्र-सौर* है। दिन चन्द्रमा से (तिथि, पक्ष, मास) ट्रैक होते हैं, परन्तु वर्ष को सूर्य के सापेक्ष समायोजित रखा जाता है — प्रत्येक 32-33 चन्द्र मासों में एक 13वाँ *अधिक मास* जोड़कर। इससे हिन्दू मास सदैव लगभग एक ही ऋतु में आते हैं, परन्तु उस मास के भीतर किसी विशेष तिथि का अंग्रेज़ी कैलेंडर पर स्थान एक वर्ष से दूसरे वर्ष में ±15 दिनों तक खिसक सकता है।
✦ तिथि वास्तव में क्या है?
तिथि वह काल है जिसमें चन्द्रमा एवं सूर्य के निरयण देशान्तरों के बीच कोणीय अन्तर 12° बढ़ जाता है। एक चन्द्र मास में 30 तिथियाँ — 15 *शुक्ल पक्ष* (बढ़ती) एवं 15 *कृष्ण पक्ष* (घटती)। चन्द्रमा की दीर्घवृत्तीय कक्षा में तात्कालिक गति के कारण एक तिथि की अवधि 19 से 26 घंटे के बीच भिन्न हो सकती है।
पर्व तिथियों से जुड़े हैं, सौर दिनांक से नहीं: - दिवाली = कार्तिक कृष्ण अमावस्या - होली = फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन) एवं चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (धुलेटी) - रक्षाबन्धन = श्रावण पूर्णिमा - जन्माष्टमी = भाद्रपद कृष्ण अष्टमी - गणेश चतुर्थी = भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
तिथि एक निश्चित खगोलीय घटना है। उस तिथि पर अंग्रेज़ी कैलेंडर पर जो तारीख होती है — वह उस वर्ष के संयोग की बात है।
✦ अंग्रेज़ी तारीख क्यों खिसकती है
एक चन्द्र मास (अमावस्या से अमावस्या) लगभग 29.53 दिन का होता है। 12 चन्द्र मास = 354.36 दिन — यह 365-दिन के सौर वर्ष से लगभग 11 दिन कम है। बिना सुधार के चन्द्र मास ऋतुओं में पीछे खिसकते जाते हैं — यह पूर्णतः चन्द्र इस्लामी हिजरी कैलेंडर में होता है, जहाँ रमज़ान प्रत्येक वर्ष लगभग 11 दिन पहले आता है।
हिन्दू कैलेंडर इस खिसकाव को *अधिक मास* से रोकता है: जब सूर्य पूरे एक चन्द्र मास तक एक ही निरयण राशि में रहे (कोई *संक्रान्ति* न हो) — तब उस चन्द्र मास का दोहराव कर दिया जाता है। परिणाम — हिन्दू मास एवं उनके पर्व ऋतुओं से बँधे रहते हैं (होली बसन्त में, दिवाली शरद में), परन्तु सटीक अंग्रेज़ी तारीख प्रत्येक वर्ष भिन्न।
अधिक मास वाले वर्षों में पर्व 18-20 दिन तक खिसक सकते हैं। साधारण वर्षों में खिसकाव लगभग ±10-11 दिन।
✦ सूर्योदय-सम्मेलन
जब किसी पर्व की तिथि निर्धारित हो जाये, एक नियम और लागू होता है: कौन-सी अंग्रेज़ी तारीख उस तिथि को *सूर्योदय* के समय धारण करे। स्थानीय सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो — वही उस दिन की तिथि मानी जाती है। दो परिणाम: 1. यदि कोई तिथि देर रात आरम्भ हो — वह "अगले दिन" की तिथि मानी जा सकती है, "आज" की नहीं। 2. एक ही पर्व विभिन्न शहरों में भिन्न अंग्रेज़ी तारीख पर हो सकता है, यदि तिथि-सन्धि उन शहरों के सूर्योदय-समयों के बीच पड़े।
इसी कारण कभी-कभी एक ही पर्व लगातार दो अंग्रेज़ी तारीखों पर अलग-अलग पंचांगों में दिखता है — दोनों क्षेत्रीय परम्परानुसार सही हो सकते हैं।
✦ उदाहरण: दिवाली
दिवाली = कार्तिक कृष्ण अमावस्या। नये चन्द्र का सटीक क्षण (सूर्य एवं चन्द्र समान निरयण देशान्तर पर) पृथ्वी पर एक ही क्षण होता है — सबके लिए। परन्तु: - वह क्षण भारत में रात 10:35 बजे हो सकता है, कैलिफोर्निया में दोपहर 12:05। - यदि नया चन्द्र भारत में सूर्योदय के *बाद* हो — दिवाली अगले दिन मनायी जायेगी, क्योंकि सूर्योदय के समय पूर्व-तिथि (चतुर्दशी) चल रही थी। - *लक्ष्मी पूजा* के लिए एक और सूक्ष्मता: पूजा *प्रदोष काल* (सूर्यास्त से लगभग 3 घंटे) में होती है — जिस दिन अमावस्या उस सन्ध्या-काल में पड़े। यदि अमावस्या रात देर से आरम्भ हो — *अगले* दिन के प्रदोष में अमावस्या नहीं रहेगी, अतः पूर्व-सन्ध्या ही श्रेष्ठ।
ये नियम मनमाने नहीं — *धर्मसिन्धु* एवं *निर्णयसिन्धु* के सुसंगत शास्त्रीय मार्गदर्शन से अनुसरण करते हैं।
✦ व्यावहारिक निष्कर्ष
- ✦पर्व की *तिथि* निश्चित है; उसकी अंग्रेज़ी तारीख प्रत्येक वर्ष गणना की जाती है।
- ✦दिवाली, होली, रक्षाबन्धन का "वही दिनांक" अपेक्षित न रखें — चन्द्र कैलेंडर सौर कैलेंडर के सापेक्ष ±10-18 दिन खिसकता है।
- ✦सूर्योदय-आधारित पर्वों की तारीख शहर/क्षेत्र-वार भिन्न हो सकती है — दोनों सही हो सकते हैं।
- ✦नवरात्रि अथवा पितृ पक्ष जैसे बहु-दिवसीय पर्वों में क्षेत्रीय परम्पराएँ कभी एक ही खगोलीय घटना को लगातार दो अंग्रेज़ी दिनों में बाँट सकती हैं।
यह "खिसकाव" कोई कैलेंडर-त्रुटि नहीं — दो भिन्न काल-गणना प्रणालियों के साथ-साथ चलने का स्वाभाविक परिणाम है, प्रत्येक अपने ढाँचे में सटीक।